ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे पर दर्दनाक हादसा, बस से टकराई बाइक; एक युवक की मौत, दूसरा गंभीर घायल

देवप्रयाग। ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर मंगलवार को एक दर्दनाक सड़क हादसे में बाइक सवार एक युवक…

उत्तराखंड में जुलाई से फिर बढ़ेगा बिजली बिल, यूपीसीएल ने जारी की नई एफपीपीसीए दरें

देहरादून। उत्तराखंड के बिजली उपभोक्ताओं को जुलाई महीने में भी महंगे बिजली बिल का सामना करना…

नैनीझील से चार दिन में तीसरा शव बरामद, 28 वर्षीय युवक का शव मिलने से मचा हड़कंप

नैनीताल। विश्व प्रसिद्ध नैनीझील एक बार फिर चर्चा का केंद्र बन गई है। मंगलवार सुबह झील…

उत्तराखंड की स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा हाईटेक बूस्ट, पीएम निधि से मिलेंगी MRI, डिजिटल मैमोग्राफी और AI एक्स-रे मशीनें

देहरादून। उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक तकनीक से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण…

नैनीताल हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता से मांगा विस्तृत जवाब, अगली सुनवाई 29 जुलाई को; देहरादून से मुजफ्फरनगर स्थानांतरित मुकदमे को दी गई है चुनौती

नैनीताल। उत्तराखंड राज्य आंदोलन के सबसे चर्चित और संवेदनशील मामलों में शामिल रामपुर तिराहा कांड से…

यौन शोषण मामले में भवाली व्यापार मंडल अध्यक्ष को हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत, राज्य सरकार से मांगा जवाब

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एक युवती के कथित यौन शोषण और धमकी के मामले में भवाली…

केतन हत्याकांड पर सियासत गरमाई, भीम आर्मी का टिहरी कूच हरिद्वार में रुका, हाईवे पर हंगामा

हरिद्वार/टिहरी। टिहरी जिले के बहुचर्चित केतन लाल हत्याकांड को लेकर प्रदेश की राजनीति और सामाजिक माहौल…

उत्तराखंड के युवाओं को फिल्मी उड़ान, फिल्म नीति के तहत पहली बार मिली छात्रवृत्ति

देहरादून। उत्तराखंड सरकार की नई फिल्म नीति अब केवल कागजों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसका…

सत्ता के गलियारों से लेकर गांव की चौपालों तक मिशन-2027 की चर्चा, भाजपा, कांग्रेस, आप और यूकेडी ने तेज की संगठनात्मक तैयारियां

देहरादून। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव-2027 में अभी समय है, लेकिन प्रदेश का राजनीतिक माहौल अभी से…

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर 15 दिनों तक जिला, ब्लॉक और तहसील स्तर पर लगेंगे विशेष शिविर, मौके पर होगा जनसमस्याओं का समाधान

देहरादून। उत्तराखंड सरकार एक बार फिर आम जनता तक सरकारी सेवाएं और योजनाओं का लाभ सीधे…

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का आह्वान—हर घर पहुंचे कार्यकर्ता, सरकार की उपलब्धियां बताएं और जनता का फीडबैक जुटाएं

उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव-2027 भले ही अभी कुछ समय दूर हों, लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने…

रुड़की में सीएम का युवा संवाद, युवाओं को दिए बड़े संदेश

रुड़की। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को रुड़की में आयोजित “युवा शक्ति संवाद” कार्यक्रम में…

रुड़की को मिली आधुनिक खेल सुविधाओं की बड़ी सौगात, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 3.75 करोड़ के स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स का किया लोकार्पण

हरिद्वार उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश के खिलाड़ियों को एक और बड़ी सौगात देते हुए रुड़की में…

अंगदान है मानव सेवा का सर्वोच्च कार्य, इसे जनआंदोलन बनाएं: जे.पी. नड्डा

अंगदान है मानव सेवा का सर्वोच्च कार्य, इसे जनआंदोलन बनाएं: जे.पी. नड्डा देवसंस्कृति विश्वविद्यालय में दधीचि…

देहरादून। उत्तराखंड की प्रीमियम हिमालयन ट्राउट फिश ने पहली बार अंतरराष्ट्रीय बाजार में दस्तक देकर नया इतिहास रच दिया है। राज्य से पहली बार 5 मीट्रिक टन ट्राउट फिश नेपाल निर्यात की गई है। इस उपलब्धि से न केवल उत्तराखंड के मत्स्य पालन क्षेत्र को नई पहचान मिली है, बल्कि इससे जुड़े 33 मत्स्य पालकों को लगभग 23.5 लाख रुपये की आय भी प्राप्त हुई है। राज्य सरकार अब ट्राउट फिश को केवल नेपाल तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि दुबई सहित खाड़ी देशों और देश के बड़े महानगरों में भी इसकी पहुंच बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। मत्स्य विभाग का मानना है कि आने वाले महीनों में नेपाल को लगभग 30 मीट्रिक टन ट्राउट फिश का निर्यात किया जा सकता है। दुबई निर्यात की तैयारी, लेकिन सामने हैं कई चुनौतियां उत्तराखंड सरकार दुबई के बाजार में भी ट्राउट फिश पहुंचाने की तैयारी कर रही है। पिछले वर्ष गल्फ फूड एक्सपो के दौरान अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के साथ सकारात्मक बातचीत हुई थी, लेकिन अभी तक निर्यात शुरू नहीं हो पाया है। विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे तीन प्रमुख कारण हैं— – राज्य में आधुनिक फिश प्रोसेसिंग प्लांट का अभाव। – उत्तराखंड में तैयार होने वाली ट्राउट फिश का औसत वजन 700 से 800 ग्राम, जबकि गल्फ देशों में लगभग 3 किलोग्राम वजन की मछली की मांग। – निर्यात से जुड़े तकनीकी मानकों और दस्तावेजी प्रक्रियाओं को पूरी तरह पूरा करना। इन चुनौतियों को दूर करने के लिए सरकार बड़े आकार की ट्राउट फिश तैयार करने, आधुनिक प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने और कोल्ड चेन नेटवर्क को मजबूत करने पर काम कर रही है। 150 साल पुराना है ट्राउट फिश पालन का इतिहास उत्तराखंड में ट्राउट फिश पालन की शुरुआत ब्रिटिश शासनकाल में हुई थी। वर्ष 1850 के दशक में अंग्रेज स्विट्जरलैंड से ट्राउट फिश का बीज हिमालयी क्षेत्रों में लाए थे। तब से यह मछली राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों की पहचान बन गई और आज इसे उत्तराखंड की सबसे प्रीमियम मछलियों में गिना जाता है। रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ा उत्पादन राज्य में ट्राउट फिश उत्पादन लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है। वर्ष 2020-21 में जहां उत्पादन लगभग 250 मीट्रिक टन था, वहीं 2025-26 में यह बढ़कर करीब 800 मीट्रिक टन तक पहुंच गया। यह उत्पादन प्रदेशभर में संचालित 1,625 रेसवेज के माध्यम से किया जा रहा है। हजारों परिवारों की बढ़ी आमदनी मत्स्य पालन अब उत्तराखंड के हजारों परिवारों के लिए रोजगार और आय का मजबूत माध्यम बन चुका है। वर्ष 2021-22 में जहां 10,011 परिवार इस व्यवसाय से जुड़े थे, वहीं 2025-26 तक यह संख्या बढ़कर 15,657 परिवारों तक पहुंच गई। इनमें 3,584 महिला मत्स्य पालक भी शामिल हैं, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में अहम भूमिका निभा रही हैं। मत्स्य पालन पर सरकार का बढ़ता फोकस मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत अब तक 1,651 मत्स्य पालकों को लाभ दिया जा चुका है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदेश में कुल 11,805 मीट्रिक टन मछली उत्पादन हुआ, जिससे लगभग 165 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ। मत्स्य विभाग का बजट भी लगातार बढ़ाया गया है। वर्ष 2021-22 में विभाग का बजट 55.76 करोड़ रुपये था, जिसे बढ़ाकर 2026-27 में 261.41 करोड़ रुपये कर दिया गया है। आईटीबीपी को भी हो रही सप्लाई उत्तराखंड की ट्राउट फिश की गुणवत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2024 से अब तक 45.10 टन ट्राउट फिश भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) को भी सप्लाई की जा चुकी है, जिसकी कुल कीमत लगभग 2.10 करोड़ रुपये रही है। मत्स्य पालन विभाग का कहना है कि आने वाले समय में ट्राउट फिश की ब्रांडिंग, आधुनिक प्रोसेसिंग, कोल्ड चेन और अंतरराष्ट्रीय मार्केटिंग पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि उत्तराखंड की यह प्रीमियम हिमालयन ट्राउट दुनिया के बड़े बाजारों तक अपनी पहचान बना सके।

देहरादून। उत्तराखंड की प्रीमियम हिमालयन ट्राउट फिश ने पहली बार अंतरराष्ट्रीय बाजार में दस्तक देकर नया…

हल्द्वानी। उत्तराखंड के हल्द्वानी से एक बेहद दुखद और संवेदनशील मामला सामने आया है। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले की रहने वाली 19 वर्षीय अंजलि जाटव, जो NEET परीक्षा की तैयारी के लिए हाल ही में हल्द्वानी आई थीं, अपने पीजी के कमरे में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत मिलीं। सूचना मिलने पर पुलिस उन्हें तत्काल सुशीला तिवारी अस्पताल लेकर पहुंची, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। जानकारी के अनुसार, अंजलि ने 30 मई को हल्द्वानी स्थित एक निजी कोचिंग संस्थान में दाखिला लिया था। वह फिलहाल डेमो क्लास कर रही थीं और 29 जून से उनकी नियमित कक्षाएं शुरू होने वाली थीं। मुखानी क्षेत्र के एक निजी पीजी में रहकर वह डॉक्टर बनने के अपने सपने को पूरा करने की तैयारी कर रही थीं। पुलिस के अनुसार, मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। हालांकि कमरे से एक डायरी मिली है, जिसमें लिखी एक पंक्ति—”एक को छोड़ दिया है, दूसरे को नहीं छोड़ूंगी।”—अब जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है। पुलिस ने डायरी को सुरक्षित कब्जे में लेकर उसकी जांच शुरू कर दी है। फिलहाल इस पंक्ति के अर्थ या संदर्भ को लेकर कोई आधिकारिक निष्कर्ष नहीं निकाला गया है। इसके अलावा मृतका का मोबाइल फोन भी पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया है। अधिकारियों का कहना है कि मामले को फिलहाल संदिग्ध मानते हुए सभी संभावित पहलुओं की गहन जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, डिजिटल साक्ष्यों और अन्य तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस घटना से परिवार गहरे सदमे में है। बताया जा रहा है कि अंजलि के पिता पहले अपने बेटे को भी NEET की तैयारी के लिए हल्द्वानी भेज चुके हैं, जो वर्तमान में एम्स भोपाल में अध्ययन कर रहा है। अंजलि भी डॉक्टर बनने का सपना लेकर हल्द्वानी आई थीं, लेकिन उनका यह सपना अधूरा रह गया। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि मामले की जांच पूरी होने से पहले किसी भी तरह की अफवाह या अपुष्ट जानकारी साझा करने से बचें।

हल्द्वानी। उत्तराखंड के हल्द्वानी से एक बेहद दुखद और संवेदनशील मामला सामने आया है। मध्य प्रदेश…

रुद्रपुर। उधम सिंह नगर जिले के रुद्रपुर में पुरानी रंजिश ने एक बार फिर खूनी रूप ले लिया। लालपुर चौकी क्षेत्र के टिब्बा इलाके में 17 वर्षीय विक्रांत बागी को कथित तौर पर नजदीक से गोली मार दी गई। गंभीर रूप से घायल किशोर को पहले जिला अस्पताल और बाद में हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल रेफर किया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार, विक्रांत बागी का किच्छा क्षेत्र के सैजनी गांव निवासी एक युवक से काफी समय से विवाद चल रहा था। बताया जा रहा है कि शुक्रवार शाम दोनों के बीच कहासुनी हुई, जिसके बाद आरोपी ने कथित तौर पर तमंचे से फायर कर दिया। गोली लगते ही विक्रांत गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़ा, जबकि आरोपी मौके से फरार हो गया। परिजन घायल विक्रांत को तत्काल जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। हालत नाजुक होने पर डॉक्टरों ने उसे हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल रेफर कर दिया, लेकिन चिकित्सकों के तमाम प्रयासों के बावजूद देर रात उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिवार और स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया। अस्पताल परिसर में किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया। इधर, घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है। पुलिस ने फरार आरोपी की तलाश के लिए विशेष टीमें गठित कर विभिन्न स्थानों पर दबिश शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और आरोपी को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। हत्या के पीछे पुरानी रंजिश को प्रमुख वजह माना जा रहा है, हालांकि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की तस्वीर साफ हो सकेगी।

रुद्रपुर। उधम सिंह नगर जिले के रुद्रपुर में पुरानी रंजिश ने एक बार फिर खूनी रूप…

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने रुद्रप्रयाग में चौकीदार की करंट लगने से हुई मौत से जुड़े मुआवजा मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि ‘कर्मचारी मुआवजा अधिनियम, 1923’ के तहत मुआवजे की जिम्मेदारी केवल कर्मचारी के नियोक्ता की होती है। किसी तीसरे पक्ष या विभाग पर इस अधिनियम के तहत मुआवजा देने का आदेश नहीं दिया जा सकता, भले ही दुर्घटना कथित लापरवाही के कारण हुई हो। न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी की एकलपीठ ने उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPCL) की ओर से दायर अपील पर सुनवाई करते हुए कर्मचारी मुआवजा आयुक्त, रुद्रप्रयाग के आदेश में संशोधन किया। क्या था मामला? मृतक दिनेश प्रसाद डिमरी अगस्त्यमुनि स्थित फॉरेस्ट गेस्ट हाउस में चौकीदार के पद पर कार्यरत थे। 21 अक्टूबर 2012 को वे पानी की आपूर्ति बाधित होने का कारण देखने गए थे। इसी दौरान टूटे हुए बिजली के तार की चपेट में आने से उन्हें करंट लगा और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। मृतक की पत्नी ने कर्मचारी मुआवजा अधिनियम के तहत मुआवजे का दावा किया। सुनवाई के बाद कर्मचारी मुआवजा आयुक्त, रुद्रप्रयाग ने ₹4,15,480 का मुआवजा देने का आदेश पारित किया और यह जिम्मेदारी बिजली विभाग पर डालते हुए कहा कि टूटे हुए तार की समय पर मरम्मत न होना विभाग की लापरवाही थी। हाईकोर्ट ने क्या कहा? इस आदेश को चुनौती देते हुए उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कंपनी का तर्क था कि मृतक उनका कर्मचारी नहीं था, इसलिए कर्मचारी मुआवजा अधिनियम के तहत उन पर मुआवजे की जिम्मेदारी नहीं डाली जा सकती। हाईकोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए कहा कि कर्मचारी मुआवजा अधिनियम, 1923 का उद्देश्य नियोक्ता द्वारा अपने कर्मचारी को कार्य के दौरान हुई दुर्घटना या मृत्यु पर मुआवजा देना है। इस कानून के तहत किसी तीसरे पक्ष, विभाग या संस्था पर जिम्मेदारी तय नहीं की जा सकती। कोर्ट ने कहा कि चूंकि मृतक डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर के अधीन कार्यरत थे, इसलिए मुआवजे की जिम्मेदारी भी उनके नियोक्ता यानी वन विभाग की होगी, न कि उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड की। आदेश में संशोधन हाईकोर्ट ने कर्मचारी मुआवजा आयुक्त के आदेश में संशोधन करते हुए निर्देश दिया कि मुआवजे की पूरी राशि, ब्याज सहित, उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड के बजाय संबंधित डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (वन विभाग) द्वारा अदा की जाएगी। यह फैसला कर्मचारी मुआवजा अधिनियम के दायरे और नियोक्ता की कानूनी जिम्मेदारी को स्पष्ट करने वाला महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने रुद्रप्रयाग में चौकीदार की करंट लगने से हुई मौत से जुड़े मुआवजा…