‘उत्तराखण्ड-विकास, चुनौतियां और 2027 की राह’ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने गिनाईं सरकार की उपलब्धियां, युवाओं और विकास के भविष्य का रखा विजन
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखण्ड की जनता प्रदेश में स्थायित्व, विकास और बेहतर भविष्य चाहती है। राज्य सरकार इसी भावना के अनुरूप प्रदेश के समग्र विकास के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। सरकार का फोकस जनहित से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता देने के साथ-साथ युवाओं को रोजगार, स्वरोजगार और विकास के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने पर है।
मुख्यमंत्री गुरुवार को राजपुर रोड स्थित एक होटल में अड्डा इनसाइडर समाचार पत्र की ओर से आयोजित ‘उत्तराखण्ड-विकास, चुनौतियां और 2027 की राह’ विषयक कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने राज्य की विकास यात्रा, सरकार की उपलब्धियों, युवाओं की भूमिका और आने वाले समय के लिए सरकार के विजन पर विस्तार से अपने विचार रखे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में उनकी पार्टी का मूल सिद्धांत ‘राष्ट्र प्रथम, संगठन द्वितीय और व्यक्ति तृतीय’ रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य राजनीतिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड के दीर्घकालिक विकास के नजरिए से भी प्रदेश को आगे ले जाना है। सरकार की प्राथमिकता है कि विकास योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
प्रधानमंत्री का उत्तराखण्ड से विशेष लगाव
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उत्तराखण्ड के प्रति विशेष लगाव का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी अब तक 28 बार उत्तराखण्ड का दौरा कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने राज्य के सीमांत क्षेत्रों के विकास को विशेष प्राथमिकता दी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री का माणा गांव पहुंचकर सीमांत गांवों को देश का ‘अंतिम गांव’ नहीं बल्कि ‘प्रथम गांव’ कहना सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास को लेकर बदलती सोच का उदाहरण है। इससे सीमांत क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के विकास और वहां रहने वाले लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में नई दृष्टि को बल मिला है।
विकास के विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा उत्तराखण्ड
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में उत्तराखण्ड विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने नीति आयोग के सतत विकास लक्ष्य (SDG) इंडेक्स का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तराखण्ड ने देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है।
उन्होंने कहा कि पर्यटन के क्षेत्र में भी उत्तराखण्ड को राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न पुरस्कार मिले हैं। राज्य अब केवल धार्मिक पर्यटन तक सीमित नहीं है, बल्कि फिल्म शूटिंग, एडवेंचर टूरिज्म और वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में भी अपनी पहचान बना रहा है। सरकार का प्रयास है कि पर्यटन की नई संभावनाओं का लाभ स्थानीय लोगों और युवाओं को मिले तथा इससे रोजगार के नए अवसर पैदा हों।
विकसित भारत के संकल्प में युवाओं की अहम भूमिका
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया है। इस लक्ष्य को हासिल करने में देश की युवा शक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उत्तराखण्ड युवा राज्य है और यहां के युवाओं में प्रतिभा, ऊर्जा और नई सोच की कोई कमी नहीं है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को बेहतर शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए लगातार काम कर रही है। युवाओं को उनकी योग्यता और क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ने का अवसर मिले, इसके लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने युवाओं से संवाद को अपने लिए विशेष अनुभव बताया। उन्होंने कहा कि उन्हें युवाओं के बीच जाना और उनसे बातचीत करना पसंद है। उनका प्रयास रहता है कि युवा उन्हें केवल मुख्यमंत्री के रूप में नहीं, बल्कि एक दोस्त के रूप में देखें। युवाओं के साथ संवाद से उनके विचारों, आकांक्षाओं और नई सोच को समझने का अवसर मिलता है। साथ ही युवाओं की ऊर्जा से उन्हें भी नई ऊर्जा मिलती है।
भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता पर जोर
मुख्यमंत्री ने राज्य में सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए लागू किए गए सख्त नकल विरोधी कानून का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता रही है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, नकल विरोधी कानून लागू होने के बाद मेहनती और योग्य युवाओं का भर्ती व्यवस्था के प्रति विश्वास मजबूत हुआ है। उन्होंने बताया कि पिछले लगभग पांच वर्षों में राज्य में करीब 35 हजार युवाओं को सरकारी सेवाओं में नियुक्ति प्रदान की गई है।
उन्होंने कहा कि युवाओं को उनकी मेहनत का उचित परिणाम मिले और भर्ती प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता की गुंजाइश न रहे, इसके लिए सरकार ने सख्त व्यवस्था लागू की है।
सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने की कार्रवाई
मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड के मूल स्वरूप और पहचान को सुरक्षित रखने की दिशा में भी सरकार की कार्रवाई का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड के मूल स्वरूप को बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है। इसी क्रम में सरकारी भूमि को अवैध अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में अब तक 13 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया जा चुका है। उन्होंने कहा कि सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा और सार्वजनिक हित में उनका उपयोग सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड इस समय विकास के नए दौर से गुजर रहा है। सरकार का प्रयास है कि विकास का लाभ केवल बड़े शहरों और प्रमुख क्षेत्रों तक सीमित न रहे, बल्कि प्रदेश के दूरस्थ और सीमांत क्षेत्रों सहित समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचे।
उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड को विकसित और सशक्त राज्य बनाने के लिए आधारभूत सुविधाओं के विस्तार, पर्यटन, रोजगार, शिक्षा, कौशल विकास और युवाओं के लिए नए अवसरों पर लगातार काम किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप उत्तराखण्ड को भी विकसित, आत्मनिर्भर और सशक्त राज्य के रूप में आगे बढ़ाना है। इसके लिए सरकार विकास की गति को बनाए रखते हुए जनहित से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ा रही है।