सोमवती अमावस्या पर हरिद्वार में उमड़ा आस्था का महासैलाब, लाखों श्रद्धालुओं ने लगाई गंगा में पवित्र डुबकी

हरिद्वार। सोमवती अमावस्या के पावन पर्व पर धर्मनगरी हरिद्वार श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर नजर आई। तड़के सुबह से ही गंगा तटों पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। हर की पैड़ी सहित ब्रह्मकुंड, मालवीय घाट, सुभाष घाट और कुशा घाट पर लाखों श्रद्धालुओं ने मां गंगा में आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित किया और देश-दुनिया की सुख-समृद्धि की कामना की।

पर्व के अवसर पर हरिद्वार के घाटों पर सुबह से ही “हर-हर गंगे” और “गंगा मैया की जय” के जयघोष गूंजते रहे। देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे श्रद्धालुओं के साथ-साथ विदेशों से आए भक्तों ने भी गंगा स्नान कर धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। पूरे शहर में श्रद्धा और उत्साह का अनूठा संगम देखने को मिला।

हर की पैड़ी पर उमड़ी सबसे अधिक भीड़

सोमवती अमावस्या स्नान के लिए सबसे अधिक भीड़ हर की पैड़ी और ब्रह्मकुंड क्षेत्र में देखने को मिली। श्रद्धालु सुबह ब्रह्ममुहूर्त से ही घाटों पर पहुंचने लगे थे। स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने मंदिरों में पूजा-अर्चना की और पितरों के निमित्त तर्पण व दान-पुण्य के कार्य भी संपन्न किए।

धार्मिक मान्यता के अनुसार सोमवती अमावस्या पर गंगा स्नान, दान और पूजा-अर्चना का विशेष महत्व माना जाता है। इसी कारण हरिद्वार में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।

प्रशासन और पुलिस रहे पूरी तरह मुस्तैद

पर्व के दौरान सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर रहा। जिलाधिकारी Mayur Dixit और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक Navneet Singh Bhullar ने स्वयं विभिन्न घाटों और संवेदनशील क्षेत्रों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

दोनों अधिकारियों ने मौके पर तैनात अधिकारियों को भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने के निर्देश दिए। प्रशासन का पूरा फोकस श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुगम आवागमन पर रहा।

सेक्टरों में बांटा गया मेला क्षेत्र

मेले के सफल संचालन के लिए पूरे मेला क्षेत्र को विभिन्न सेक्टरों में विभाजित किया गया था। प्रत्येक सेक्टर में नोडल अधिकारी और सेक्टर मजिस्ट्रेट तैनात किए गए, जिन्हें अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई।

अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि किसी भी स्थान पर अत्यधिक भीड़ एकत्रित न होने पाए और श्रद्धालुओं की आवाजाही निर्बाध बनी रहे।

हाईटेक निगरानी व्यवस्था रही सक्रिय

श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरे मेला क्षेत्र में व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए थे। प्रमुख घाटों और संवेदनशील स्थानों पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया।

सीसीटीवी कैमरों, ड्रोन कैमरों और कंट्रोल रूम के माध्यम से मेले की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी गई। सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे क्षेत्र में सतर्कता बनाए रखी ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।

आपदा और स्वास्थ्य सेवाएं रहीं अलर्ट

किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, फायर ब्रिगेड, मेडिकल टीमों और एम्बुलेंस सेवाओं को तैनात रखा गया था। घाटों पर बैरिकेडिंग की गई थी और अनाउंसमेंट सिस्टम के माध्यम से श्रद्धालुओं को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा रहे थे।

स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने भी विभिन्न स्थानों पर चिकित्सा शिविर स्थापित कर श्रद्धालुओं को प्राथमिक उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई।

विशेष ट्रैफिक प्लान से मिली राहत

सोमवती अमावस्या पर भारी भीड़ को देखते हुए शहर में विशेष यातायात योजना लागू की गई। विभिन्न मार्गों पर डायवर्जन व्यवस्था बनाई गई और बाहरी जिलों से आने वाले वाहनों के लिए अलग-अलग पार्किंग स्थल निर्धारित किए गए।

पार्किंग स्थलों से श्रद्धालुओं को शटल सेवाओं के माध्यम से घाटों तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई, जिससे शहर में यातायात का दबाव काफी हद तक नियंत्रित रहा।

भक्ति और आस्था से सराबोर रही धर्मनगरी

दिनभर गंगा घाटों, मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। श्रद्धालुओं ने स्नान, पूजन, दान-पुण्य और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से पुण्य अर्जित किया। सोमवती अमावस्या के अवसर पर हरिद्वार एक बार फिर सनातन आस्था के विराट स्वरूप का साक्षी बना, जहां श्रद्धा और विश्वास का अद्भुत संगम देखने को मिला।

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