‘मुंबई वाली डांस पार्टी’ विवाद पर महेंद्र भट्ट की चुप्पी से सियासत गरमाई, चुनावी साल में बढ़े सियासी मायने

देहरादून: प्रदेश में विधानसभा चुनाव का बिगुल भले ही अभी आधिकारिक रूप से न बजा हो, लेकिन सियासी दल पूरी तरह चुनावी मोड में आ चुके हैं। एक ओर भाजपा हिंदू सम्मेलनों के जरिए गांव-गांव तक अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटी है, तो वहीं कांग्रेस सरकार की नीतियों को मुद्दा बनाकर भाजपा को घेरने में लगी है। इस बीच पूर्व विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन द्वारा उछाले गए ‘मुंबई वाली डांस पार्टी’ विवाद ने प्रदेश की राजनीति में बड़ा भूचाल ला दिया है।

चैंपियन के वीडियो से शुरू हुआ विवाद

हाल ही में एक विवाह समारोह में डांसर पर नोट उड़ाते हुए चैंपियन का वीडियो वायरल हुआ था। इसके बाद आरोप-प्रत्यारोपों का दौर शुरू हुआ और मामला भाजपा व कांग्रेस के शीर्ष नेताओं तक जा पहुंचा। चैंपियन ने कांग्रेस के कई नेताओं के नाम लेते हुए गंभीर आरोप लगाए, जिस पर कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए अपना पक्ष रखा।

महेंद्र भट्ट की चुप्पी पर सियासी चर्चा

इस पूरे विवाद में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आने से राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी साल में उनकी यह चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है और इसके अलग-अलग मायने निकाले जा रहे हैं।

सोशल मीडिया पर छाया विवाद

‘मुंबई वाली डांस पार्टी’ का मुद्दा इन दिनों सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा चर्चित है। फेसबुक, एक्स और यूट्यूब सहित तमाम प्लेटफॉर्म पर चैंपियन, हरक सिंह रावत और गणेश गोदियाल के वीडियो वायरल हो रहे हैं। वहीं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की प्रतिक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं।

भाजपा का पलटवार

भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह कांग्रेस की अपनी पोल खुलने के बाद मुद्दे को भाजपा की ओर मोड़ने की कोशिश है। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष के बयान को सफेद झूठ करार देते हुए कहा कि डांस पार्टी विवाद कांग्रेस के काले अध्याय का हिस्सा रहा है और भाजपा अध्यक्ष के संस्कार, व्यवहार और सार्वजनिक जीवन से प्रदेश की जनता भली-भांति परिचित है।

चुनावी साल में सियासी ‘मसाला’

चुनावी माहौल में इस विवाद ने दोनों दलों को एक-दूसरे पर हमले का नया मौका दे दिया है। कांग्रेस भाजपा से जवाब मांग रही है तो भाजपा इसे कांग्रेस का अंदरूनी मामला बता रही है। ऐसे में अब सभी की नजरें भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की संभावित प्रतिक्रिया पर टिकी हैं, जो इस विवाद की सियासी दिशा तय कर सकती है।

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