उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी संयुक्त परिषद के बैनर तले दिलाराम चौक से निकाला जुलूस, कैंट रोड पुल के पास प्रशासन ने की वार्ता
लंबित आवेदनों के निस्तारण और चिन्हीकरण प्रक्रिया सरल बनाने की मांग, बोले आंदोलनकारी- पहचान के इंतजार में कई बुजुर्ग आंदोलनकारियों का हो चुका है निधन
देहरादून। उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण की मांग को लेकर बुधवार को आंदोलनकारियों ने मुख्यमंत्री आवास कूच किया। उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी संयुक्त परिषद के आह्वान पर चिन्हीकरण से वंचित आंदोलनकारी दिलाराम चौक पर एकत्र हुए और जुलूस के रूप में मुख्यमंत्री आवास की ओर रवाना हुए। हालांकि, कैंट रोड पुल के पास पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने उन्हें रोक दिया। इस दौरान प्रशासन की ओर से तैनात ड्यूटी मजिस्ट्रेट और कोतवाली पुलिस ने आंदोलनकारियों से वार्ता की।
प्रशासनिक अधिकारियों ने आंदोलनकारियों को बताया कि वीवीआईपी मूवमेंट के चलते पूरा प्रशासनिक अमला व्यस्त है। ऐसे में परिषद के प्रतिनिधिमंडल को चिन्हीकरण के मुद्दे पर वार्ता के लिए आमंत्रित किया जाएगा। इसके बाद आंदोलनकारियों ने अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन मुख्यमंत्री को प्रेषित करने पर सहमति जताई। परिषद ने कार्यक्रम के समापन पर घोषणा की कि 9 नवंबर 2026 को राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर कचहरी स्थित शहीद स्थल पर धरना दिया जाएगा और ज्ञापन सौंपा जाएगा।
मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन में आंदोलनकारियों ने कहा कि उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान तत्कालीन नारायण दत्त तिवारी सरकार के समय आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण की प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन तकनीकी अड़चनों और प्रशासनिक अव्यवस्थाओं के कारण बड़ी संख्या में वास्तविक राज्य आंदोलनकारी आज भी पहचान से वंचित हैं। कई आंदोलनकारियों के पास जेल प्रमाणपत्र अथवा पुलिस रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं, जिसके चलते उन्हें चिन्हीकरण प्रक्रिया में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
परिषद ने मांग की कि आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण की समयसीमा तत्काल बढ़ाई जाए और वर्षों से लंबित सभी आवेदनों का शीघ्र निस्तारण किया जाए। साथ ही चिन्हीकरण की प्रक्रिया को सरल बनाया जाए। पुराने चिन्हित आंदोलनकारियों का सत्यापन करने के साथ ही उस दौर के समकालीन समाचार पत्रों की कतरनों को भी वैध प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जाए।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि 2 अक्टूबर 2026 को मुजफ्फरनगर कांड के शहीद स्थल पर दिए गए आश्वासन का सम्मान करते हुए चिन्हीकरण से छूटे सभी वास्तविक राज्य आंदोलनकारियों को पहचान और सम्मान दिया जाए। इसके अलावा चिन्हीकरण से वंचित आंदोलनकारियों के परिवारों को भी समुचित सम्मान एवं सुरक्षा प्रदान करने की मांग उठाई गई।
परिषद के पदाधिकारियों ने कहा कि उत्तराखंड राज्य का निर्माण हजारों ज्ञात और अज्ञात आंदोलनकारियों के संघर्ष, त्याग और बलिदान का परिणाम है। ऐसे में चिन्हीकरण की प्रक्रिया में लगातार हो रही देरी उनके योगदान की अनदेखी है। उन्होंने चिंता जताई कि कई बुजुर्ग राज्य आंदोलनकारियों का चिन्हीकरण होने की प्रतीक्षा में ही निधन हो चुका है। यह स्थिति बेहद दुखद है और सरकार को इस मामले में संवेदनशीलता दिखाते हुए जल्द निर्णय लेना चाहिए।
ज्ञापन पर संयुक्त परिषद के संरक्षक बालेश बबानिया, जिलाध्यक्ष सुरेश कुमार, महिला अध्यक्ष प्रमिला रावत, केंद्रीय प्रवक्ता चिंतन सकलानी, अनंत आकाश (सचिव, सीपीएम), लेखराज (पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष, डीएवी), राजेश शर्मा, जगमोहन रावत, विकास रावत, सत्या पोखरियाल, सुभागा फर्स्वाण, अमित परमार, नुरैशा अंसारी, कुसुम नौडियाल और दीप्ति रावत सहित अन्य पदाधिकारियों के हस्ताक्षर हैं।
इस दौरान पुष्पलता वैश्य, राजदुलारी, कल्पेश्वरी नेगी, रेखा शर्मा, पारुल बिष्ट, मीरा गुसाईं, मुकेश मोधा, कमलेश, शाकुंभरी रावत, बिंदा मिश्रा, जानकी भट्ट, अल्का, सुरेशी नेगी, शबनम, राजेश्वरी, शशि जैन, मोहिनी, गौरा देवी, मधुलिका बिष्ट, सीता रावत, गीता नेगी, सुमन राम, शीला जखमोला, सत्येश्वरी बहुगुणा, पुष्पा बहुगुणा, कमला, विमला और देवेश्वरी सहित बड़ी संख्या में राज्य आंदोलनकारी