रेखा आर्या पर 210 करोड़ के भ्रष्टाचार के आरोप से गरमाई सियासत, कांग्रेस बोली- सरकार का कच्चा चिट्ठा खोलेंगे

कांग्रेस प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा ने धामी सरकार पर लगाए सवाल, मंत्री रेखा आर्या ने पति के खिलाफ दर्ज कराई शिकायत; आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी

देहरादून। उत्तराखंड में कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या और उनके पति गिरधारी लाल साहू के बीच विवाद ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। गिरधारी लाल साहू की ओर से मंत्री पर 210 करोड़ रुपये के कथित भ्रष्टाचार के आरोप लगाए जाने के बाद कांग्रेस ने राज्य सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। कांग्रेस प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा ने कहा कि पार्टी प्रदेश सरकार के विभिन्न विभागों में हुए कथित भ्रष्टाचार के मामलों को जनता के सामने लाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि धामी सरकार के कार्यकाल में कई मामलों को लेकर सवाल उठे हैं और कांग्रेस इनकी पड़ताल कर जवाबदेही तय करने की मांग करेगी।

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब उत्तराखंड में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। हालांकि, मंत्री पर लगाए गए 210 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं हुई है। इसलिए इन आरोपों को फिलहाल आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

पति के खिलाफ मंत्री ने दर्ज कराया मुकदमा

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने 15 अक्टूबर को अपने पति गिरधारी लाल साहू के खिलाफ देहरादून के कैंट थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में उन्होंने कथित शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न, जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल और जालसाजी जैसे आरोप लगाए।

इसके अगले दिन, 16 अक्टूबर को गिरधारी लाल साहू ने अपना पक्ष रखते हुए मंत्री पर 210 करोड़ रुपये के कथित भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। उनके इस बयान के बाद मामला पारिवारिक विवाद से आगे बढ़कर राजनीतिक बहस का विषय बन गया। कांग्रेस ने इसे राज्य सरकार की जवाबदेही से जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं।

शिकायत में लगाए गए आरोपों और भ्रष्टाचार से संबंधित दावों पर संबंधित जांच की स्थिति तथा आधिकारिक निष्कर्ष सामने आना महत्वपूर्ण होगा। किसी भी आरोप को जांच या न्यायिक प्रक्रिया के निष्कर्ष से पहले प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।

कुमारी सैलजा बोलीं- प्रदेश सरकार के मामलों को जनता के सामने लाएगी कांग्रेस

कांग्रेस प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा ने कहा कि रेखा आर्या के पति की ओर से लगाए गए आरोपों पर सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि धामी सरकार के कार्यकाल में विभिन्न मंत्रियों और विभागों को लेकर कई सवाल उठते रहे हैं।

सैलजा के मुताबिक, कांग्रेस केवल एक मामले तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि प्रदेश के अलग-अलग विभागों में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों को भी उठाएगी। उन्होंने कहा कि पार्टी इन मामलों का पूरा ब्योरा जनता के सामने रखने का प्रयास करेगी।

कांग्रेस प्रभारी ने सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस पूरे प्रकरण में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की भूमिका और सरकार की जानकारी को लेकर स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि यदि लगाए गए आरोपों में तथ्य हैं, तो सरकार को उनकी जांच करानी चाहिए; और यदि आरोप निराधार हैं, तो उनका तथ्यात्मक जवाब सामने आना चाहिए।

कांग्रेस ने सरकार की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

कुमारी सैलजा ने आरोप लगाया कि प्रदेश में कथित वित्तीय अनियमितताओं के कई मामले सामने आए हैं और कांग्रेस उन्हें जनता के बीच उठाएगी। उन्होंने राज्य सरकार पर प्रदेश के लोगों के हितों की अनदेखी करने का आरोप भी लगाया।

कांग्रेस का कहना है कि भ्रष्टाचार से जुड़े किसी भी आरोप की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जनता को वास्तविक स्थिति बताई जानी चाहिए। पार्टी इस प्रकरण को सरकार की पारदर्शिता और जवाबदेही से जोड़कर देख रही है।

वहीं, इस मामले में आरोपों की पुष्टि, किसी जांच एजेंसी की कार्रवाई या आधिकारिक निष्कर्ष के संबंध में उपलब्ध सामग्री में विस्तृत जानकारी नहीं है। ऐसे में यह स्पष्ट होना बाकी है कि कथित 210 करोड़ रुपये के मामले में कोई औपचारिक शिकायत या जांच शुरू हुई है या नहीं।

2027 चुनाव से पहले बढ़ सकती है राजनीतिक बयानबाजी

उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए रेखा आर्या और गिरधारी लाल साहू से जुड़ा विवाद राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बन गया है। कांग्रेस ने इस मामले को सरकार से सवाल पूछने के अवसर के रूप में उठाया है और दूसरे विभागों से जुड़े कथित मामलों को भी सामने लाने की बात कही है।

अब इस पूरे प्रकरण में सरकार और संबंधित मंत्री का पक्ष, लगाए गए आरोपों से जुड़े दस्तावेज तथा किसी आधिकारिक जांच की स्थिति अहम होगी। राजनीतिक बयानबाजी के बीच जनता की अपेक्षा यही रहेगी कि आरोपों की निष्पक्ष जांच हो, तथ्य सार्वजनिक किए जाएं और दोष सिद्ध होने की स्थिति में कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।

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