रुद्रप्रयाग में जिला पंचायत सदस्य के दलबदल से मचा सियासी घमासान, डीपीसी सदस्य बनने के बाद कांग्रेस में लौटे ग्यालू लाल; भाजपा में शामिल होने के पीछे बताई रणनीति
रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले की राजनीति में पांच दिन के भीतर ऐसा सियासी घटनाक्रम सामने आया है, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हुए जिला पंचायत सदस्य ग्यालू लाल ने महज पांच दिन बाद ही कांग्रेस में वापसी कर ली है। जिला योजना समिति (डीपीसी) के चुनाव के बाद हुए इस घटनाक्रम ने जिले में राजनीतिक समीकरणों, दलों की रणनीति और पंचायत स्तर पर बदलते सियासी समीकरणों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
भाजपा में शामिल होने के पांच दिन बाद कांग्रेस में लौटे ग्यालू लाल ने अपने फैसले पर सफाई देते हुए कहा कि भाजपा में शामिल होना उनकी सबसे बड़ी गलती थी, जिसे उन्होंने अब सुधार लिया है। उन्होंने दावा किया कि डीपीसी का सदस्य बनने के लिए भाजपा में शामिल होने की शर्त रखी गई थी। उनके इस बयान के बाद रुद्रप्रयाग की राजनीति में चर्चाएं और तेज हो गई हैं।
पांच दिन पहले भाजपा में हुए थे शामिल
ग्यालू लाल ने हाल ही में कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा था। उनके भाजपा में शामिल होने को रुद्रप्रयाग जिले की पंचायत राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा गया था। हालांकि, उनके इस फैसले के महज पांच दिन बाद ही कांग्रेस में वापसी ने सभी को चौंका दिया।
रुद्रप्रयाग नगर के गुलाबराय स्थित एक होटल में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ग्यालू लाल ने भाजपा में जाने के अपने निर्णय के पीछे की परिस्थितियों का खुलासा किया। उन्होंने कहा कि अब वह अपने पुराने राजनीतिक दल कांग्रेस में वापस लौट आए हैं।
उनकी इस वापसी ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि आखिर पांच दिन के भीतर ऐसा क्या हुआ कि उन्हें भाजपा छोड़कर कांग्रेस में लौटने का फैसला करना पड़ा।
डीपीसी सदस्य बनने के लिए भाजपा में जाने की रखी गई थी शर्त: ग्यालू लाल
ग्यालू लाल ने पत्रकारों से बातचीत में दावा किया कि जिला योजना समिति का सदस्य बनने के लिए भाजपा में शामिल होने की शर्त रखी गई थी। उन्होंने बताया कि कार्यकर्ताओं से विचार-विमर्श करने के बाद उन्होंने एक रणनीति बनाई और उसी के तहत भाजपा में शामिल होने का फैसला किया।
उन्होंने कहा कि डीपीसी सदस्य बनने में सफलता मिलने के बाद अब वह कांग्रेस में लौट आए हैं। ग्यालू लाल के इस बयान से साफ है कि वह अपने दल-बदल के फैसले को जिला योजना समिति के चुनाव से जोड़कर देख रहे हैं।
उनके मुताबिक, भाजपा में शामिल होने का फैसला एक रणनीति के तहत लिया गया था। हालांकि, इस दावे पर भाजपा की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है और इस पूरे घटनाक्रम को पार्टी किस रूप में देखती है, यह आगे महत्वपूर्ण होगा।
भाजपा में जाना बताया अपनी सबसे बड़ी गलती
कांग्रेस में वापसी के बाद ग्यालू लाल ने अपने पिछले फैसले पर खुलकर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि भाजपा में शामिल होना उनकी सबसे बड़ी गलती थी और अब उन्होंने इसे सुधार लिया है।
उन्होंने भाजपा पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप भी लगाया। ग्यालू लाल ने कहा कि उन्होंने उसी की भाषा में जवाब दिया है।
उनके इस बयान ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है। पांच दिन पहले भाजपा में शामिल होने और फिर कांग्रेस में लौटने के बीच की घटनाओं को लेकर जिले में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।
डीपीसी चुनाव के बाद बदले राजनीतिक समीकरण
ग्यालू लाल की कांग्रेस में वापसी ऐसे समय हुई है, जब जिला योजना समिति के चुनाव को लेकर जिले की राजनीति में गतिविधियां तेज थीं। डीपीसी चुनाव में सदस्य बनने के बाद उनका कांग्रेस में लौटना स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जिला योजना समिति स्थानीय विकास योजनाओं और जिला स्तर पर विकास से जुड़े विषयों के लिहाज से महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में समिति के चुनाव के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों की सक्रियता और सदस्यों का समर्थन हासिल करने की रणनीति चर्चा का विषय रहती है।
ग्यालू लाल के मामले में भी डीपीसी सदस्य बनने और उसके बाद दल में वापसी के घटनाक्रम को जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, इस घटनाक्रम का जिले के भविष्य के राजनीतिक समीकरणों पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
कांग्रेस में वापसी से भाजपा के लिए उठे सवाल
ग्यालू लाल का पांच दिन के भीतर भाजपा छोड़कर कांग्रेस में लौटना भाजपा के लिए भी असहज स्थिति पैदा करने वाला घटनाक्रम माना जा रहा है। जिस सदस्य के पार्टी में शामिल होने को राजनीतिक रूप से अहम माना गया, उसी का कुछ ही दिनों में वापस लौट जाना दल-बदल की रणनीति पर सवाल खड़े करता है।
दूसरी ओर, कांग्रेस के लिए उनकी वापसी को अपने पुराने राजनीतिक आधार और संगठनात्मक मजबूती के लिहाज से अहम माना जा सकता है। हालांकि, इस घटनाक्रम का वास्तविक राजनीतिक लाभ किसे मिलेगा, यह स्थानीय स्तर पर आगे की गतिविधियों और नेताओं की प्रतिक्रिया से तय होगा।
क्या पहले से तैयार थी पूरी रणनीति?
ग्यालू लाल के भाजपा में शामिल होने और फिर कांग्रेस में लौटने के बीच केवल पांच दिन का अंतर रहा। उनके अपने बयान में डीपीसी सदस्य बनने के लिए भाजपा में शामिल होने की शर्त और कार्यकर्ताओं के साथ बनाई गई रणनीति का जिक्र किए जाने से इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सवाल और गहरे हो गए हैं।
क्या यह पहले से तय राजनीतिक रणनीति थी या फिर चुनाव के बाद परिस्थितियों के अनुसार फैसला बदला गया? फिलहाल, ग्यालू लाल के बयान के आधार पर इस घटनाक्रम को लेकर चर्चाएं जारी हैं। उनके दावे और भाजपा की प्रतिक्रिया इस मामले में आगे की राजनीतिक तस्वीर स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण होंगे।
फिलहाल, इतना तय है कि रुद्रप्रयाग में पांच दिन के भीतर हुए इस सियासी उलटफेर ने जिला पंचायत की राजनीति को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब देखना होगा कि ग्यालू लाल की कांग्रेस में वापसी का जिले की राजनीति पर कितना असर पड़ता है और इस मुद्दे पर भाजपा तथा कांग्रेस की ओर से आगे क्या बयान सामने आते हैं।