4,238 पेड़ों की कटाई और वन भूमि हस्तांतरण बनी बड़ी बाधा, बेलबाबा में 64 हेक्टेयर जमीन उपलब्ध; अंतिम फैसला सरकार और केंद्र की मंजूरी पर निर्भर
देहरादून/नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट को नैनीताल से हल्द्वानी स्थानांतरित करने की लंबे समय से चल रही कवायद अब नए मोड़ पर पहुंच गई है। अब तक गौलापार को हाईकोर्ट के नए परिसर के लिए सबसे उपयुक्त स्थान माना जा रहा था, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर हुए नए आकलन के बाद रामपुर रोड स्थित बेलबाबा क्षेत्र सबसे मजबूत विकल्प बनकर उभर रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह गौलापार में वनभूमि हस्तांतरण और हजारों पेड़ों की कटाई से जुड़ी जटिल प्रक्रिया है।
गौलापार में 4,238 पेड़ों की कटाई सबसे बड़ी चुनौती
हाईकोर्ट परिसर के निर्माण के लिए पहले गौलापार में लगभग 26 हेक्टेयर वनभूमि चिन्हित की गई थी। इस क्षेत्र में पूर्व प्रस्तावित आईएसबीटी परियोजना की भूमि भी शामिल थी। सर्वेक्षण के दौरान सामने आया कि निर्माण शुरू करने से पहले 4,238 पेड़ों की कटाई करनी होगी। इनमें शीशम, खैर, नीम, सेमल, बेल और अमलतास जैसी महत्वपूर्ण प्रजातियां शामिल हैं।
वनभूमि हस्तांतरण का प्रस्ताव केंद्रीय स्तर पर मंजूरी नहीं मिलने के कारण यह परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी। इसी वजह से अब वैकल्पिक स्थानों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
बेलबाबा क्यों बना पहली पसंद?
करीब तीन महीने पहले प्रशासनिक अधिकारियों की टीम ने रामपुर रोड स्थित बेलबाबा क्षेत्र का निरीक्षण किया। अधिकारियों के अनुसार यहां पहले ही व्यावसायिक वन प्रबंधन (कॉमर्शियल प्लांटेशन) के तहत बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई हो चुकी है, जिससे पर्याप्त समतल भूमि उपलब्ध है। ऐसे में यहां निर्माण कार्य अपेक्षाकृत आसान और कम जटिल माना जा रहा है।
वन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार बेलबाबा के भाखड़ा रेंज में प्लॉट संख्या 46 और 47 में करीब 64 हेक्टेयर खाली भूमि उपलब्ध है, जो हाईकोर्ट परिसर जैसी बड़ी परियोजना के लिए पर्याप्त मानी जा रही है।
पहले ही कट चुके हैं 41 हजार पेड़
बेलबाबा क्षेत्र में पूर्व में स्वीकृति मिलने के बाद लगभग 41 हजार सागौन और खैर के पेड़ों की कटाई की जा चुकी है। इन पेड़ों की नीलामी से सरकार को करीब 73.10 करोड़ रुपये का राजस्व भी प्राप्त हुआ था। इसी कारण यहां निर्माण के लिए पर्यावरणीय बाधाएं अपेक्षाकृत कम मानी जा रही हैं।
वन मंत्रालय की मंजूरी फिर भी होगी जरूरी
हालांकि बेलबाबा में भी परियोजना शुरू करने से पहले वनभूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। प्रस्ताव को रेंज, डिवीजन, सर्किल और राज्य मुख्यालय से होते हुए केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की अंतिम स्वीकृति प्राप्त करनी होगी। इसके बाद ही निर्माण कार्य शुरू हो सकेगा।
गौलापार आईएसबीटी परियोजना को भी मिल सकती है नई गति
यदि हाईकोर्ट के लिए बेलबाबा का चयन होता है तो गौलापार में वर्षों से लंबित आईएसबीटी परियोजना को दोबारा गति मिलने की संभावना भी बढ़ जाएगी। लगभग 75 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना वर्ष 2017 से ठप पड़ी हुई है। परिवहन विभाग हाल ही में नए आईएसबीटी के लिए विभिन्न स्थलों का दोबारा सर्वे भी कर चुका है, जिसमें गौलापार का पुराना स्थल भी शामिल है।
2022 में मिली थी सैद्धांतिक मंजूरी
उत्तराखंड राज्य गठन के बाद नैनीताल को हाईकोर्ट का मुख्यालय बनाया गया था। नवंबर 2022 में राज्य कैबिनेट ने हाईकोर्ट को नैनीताल से हल्द्वानी स्थानांतरित करने के प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दी थी। इसके बाद विभिन्न संभावित स्थलों का निरीक्षण शुरू हुआ।
अब अंतिम निर्णय राज्य सरकार, न्यायपालिका और केंद्र सरकार की आवश्यक मंजूरियों के बाद ही लिया जाएगा। फिलहाल उपलब्ध परिस्थितियों को देखते हुए बेलबाबा हाईकोर्ट के नए परिसर के लिए सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है।