Pushkar Singh Dhami ने सड़क पर नमाज पढ़ने को लेकर बड़ा बयान दिया है। हल्द्वानी दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि नमाज पढ़ने पर किसी प्रकार की रोक नहीं है, लेकिन यह केवल चिन्हित और निर्धारित स्थलों पर ही अदा की जानी चाहिए, ताकि आम जनता और श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
हल्द्वानी में अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक
मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami सोमवार को हल्द्वानी पहुंचे, जहां उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ कानून व्यवस्था, ट्रैफिक प्रबंधन, जन सुविधाओं और Char Dham Yatra को लेकर समीक्षा बैठक की।
बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश में आने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने यात्रा मार्गों पर सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, पार्किंग और पेयजल व्यवस्था मजबूत बनाए रखने पर भी जोर दिया।
“धार्मिक गतिविधियों से जनता को परेशानी नहीं होनी चाहिए”
समीक्षा बैठक के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने खुले में नमाज पढ़ने के मुद्दे पर अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा—
“नमाज पढ़ने की किसी को मनाही नहीं है, लेकिन यह सुनिश्चित किया जाना जरूरी है कि नमाज केवल तय और चिन्हित स्थलों पर ही अदा की जाए। किसी भी धार्मिक गतिविधि से सड़क, यातायात या आम जनता को परेशानी नहीं होनी चाहिए।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में चारधाम यात्रा चल रही है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उत्तराखंड पहुंच रहे हैं। ऐसे में सरकार की प्राथमिकता है कि यात्रा मार्गों पर व्यवस्था सुचारु बनी रहे और किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो।
चारधाम यात्रा को लेकर सरकार सतर्क
Pushkar Singh Dhami ने कहा कि राज्य सरकार चारधाम यात्रा को सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित बनाने के लिए लगातार निगरानी कर रही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि यात्रा मार्गों पर ट्रैफिक नियंत्रण, स्वास्थ्य सेवाओं और सुरक्षा व्यवस्थाओं में किसी प्रकार की कमी न रहे।
उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि उत्तराखंड आने वाला हर श्रद्धालु बेहतर अनुभव लेकर वापस लौटे।
बयान के बाद प्रदेश में तेज हुई सियासत
मुख्यमंत्री के सड़क पर नमाज को लेकर दिए गए बयान के बाद प्रदेश में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। विभिन्न राजनीतिक दल इस मुद्दे पर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कुछ दल सरकार के बयान का समर्थन कर रहे हैं, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगा रहा है।
हालांकि मुख्यमंत्री ने अपने बयान में यह स्पष्ट किया कि सरकार किसी धार्मिक गतिविधि पर रोक लगाने के पक्ष में नहीं है, लेकिन सार्वजनिक व्यवस्था और आम लोगों की सुविधा को प्राथमिकता देना जरूरी है।