सरकारी दफ्तरों की सुरक्षा पर सरकार सख्त: सीएम धामी ने एसओपी बनाने के दिए निर्देश, शिक्षक मोर्चा विधायक की गिरफ्तारी की मांग पर अड़ा

देहरादून: प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय में हुए मारपीट प्रकरण के बाद उत्तराखंड में सरकारी कार्मिकों की सुरक्षा का मुद्दा गंभीर हो गया है। इस घटना के विरोध में उत्तराखंड अधिकारी-कर्मचारी-शिक्षक मोर्चा के पदाधिकारियों ने सोमवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और कार्मिकों की सुरक्षा के लिए ठोस व्यवस्था की मांग की। मुख्यमंत्री ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रदेश के सभी सरकारी कार्यालयों में सुरक्षा के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

एसओपी बनाने के निर्देश, सुरक्षा व्यवस्था होगी मजबूत

मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को फोन पर निर्देशित किया कि अधिकारियों, कर्मचारियों और शिक्षकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जल्द एसओपी तैयार की जाए। साथ ही पुलिस महानिदेशक को सभी सरकारी कार्यालयों में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था करने और इस प्रकार की घटनाओं में त्वरित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।
मुख्यमंत्री ने देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को भी शिक्षा निदेशालय में हुई घटना के दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कर्मचारी नेताओं को आश्वस्त किया कि सरकार कार्मिकों के मान-सम्मान और सुरक्षा को लेकर पूरी तरह संवेदनशील है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।

विधायक की गिरफ्तारी की मांग पर अड़े कर्मचारी-शिक्षक

शिक्षा विभाग से जुड़े अधिकारी, कर्मचारी और शिक्षक इस मामले को लेकर आंदोलन की राह पर हैं। उनका कहना है कि यदि 25 फरवरी तक नामजद आरोपी विधायक की गिरफ्तारी नहीं होती है तो वे कार्य बहिष्कार शुरू कर देंगे।
हालांकि पुलिस इस मामले में अब तक हिस्ट्रीशीटर समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, लेकिन मोर्चा का कहना है कि घटना का नेतृत्व जिस जनप्रतिनिधि द्वारा किया गया, उनकी गिरफ्तारी भी जरूरी है।

घटना के बाद तेज हुई सियासत

पूरे मामले में रायपुर से भाजपा विधायक उमेश शर्मा काऊ का नाम सामने आने के बाद राजनीतिक माहौल भी गरमा गया है। विपक्ष लगातार सरकार को घेर रहा है और जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर सवाल उठा रहा है। वहीं सत्तारूढ़ दल के भीतर भी इस प्रकरण को लेकर चर्चा जारी है।

क्या था पूरा विवाद

जानकारी के अनुसार एक विद्यालय का नाम भूमिदान करने वालों के नाम पर रखने की मांग को लेकर विवाद शुरू हुआ था। इसी सिलसिले में विधायक अपने समर्थकों के साथ ननूरखेड़ा स्थित शिक्षा निदेशालय पहुंचे थे, जहां बहस बढ़ने के बाद हाथापाई, कुर्सियां फेंकने और तोड़फोड़ की घटना सामने आई।
इस मामले में प्रारंभिक शिक्षा निदेशक अजय कुमार नौडियाल की तहरीर पर रायपुर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है।

दूसरी ओर विधायक के गनर की ओर से भी अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है, जिसमें विधायक पर मोबाइल फोन फेंके जाने और कमरे में बंद करने जैसे आरोप लगाए गए हैं।

सरकार के लिए चुनौती बना मामला

लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने सरकारी कार्यालयों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यही कारण है कि सरकार ने इसे प्रशासनिक और कानून-व्यवस्था से जुड़ा गंभीर विषय मानते हुए एसओपी बनाने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया है।
अब निगाह इस बात पर टिकी है कि सुरक्षा के नए मानक कितनी जल्दी लागू होते हैं और इस चर्चित प्रकरण में आगे क्या कार्रवाई होती है।

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