एफआईआर की मांग को लेकर थानों में पहुंच रहे कांग्रेस कार्यकर्ता, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट की भूमिका की जांच की मांग; कार्रवाई नहीं हुई तो 1 सितंबर को सचिवालय घेराव की चेतावनी
देहरादून: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की हल्द्वानी रामलीला मैदान में हुई जनसभा के बाद कार्यक्रम स्थल के कथित शुद्धिकरण का मामला अब उत्तराखंड की सियासत में बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। इस प्रकरण को लेकर कांग्रेस ने प्रदेशभर में मोर्चा खोल दिया है। पार्टी कार्यकर्ता अलग-अलग जिलों में पुलिस थानों, कोतवालियों और रिपोर्टिंग चौकियों में पहुंचकर तहरीर दे रहे हैं और घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग कर रहे हैं।
कांग्रेस ने साफ किया है कि यदि पुलिस प्रशासन ने तहरीरों पर नियमानुसार कार्रवाई नहीं की तो पार्टी लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से अपने आंदोलन को और तेज करेगी। कांग्रेस की ओर से 1 सितंबर को सचिवालय घेराव का भी ऐलान किया गया है।
प्रीतम सिंह ने सहसपुर थाने में दी तहरीर
उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह ने कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल के साथ विकासनगर क्षेत्र के सहसपुर थाने पहुंचकर तहरीर दी। उन्होंने हल्द्वानी रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की जनसभा के बाद कार्यक्रम स्थल के कथित शुद्धिकरण को बेहद शर्मनाक कृत्य बताया।
प्रीतम सिंह ने कहा कि घटना को तीन सप्ताह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन इसके बावजूद दोषियों के खिलाफ अब तक कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने पुलिस से मामले में मुकदमा दर्ज कर दोषियों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई करने की मांग की।
पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ने देहरादून जिले के सहसपुर और विकासनगर क्षेत्र के थानों में भी तहरीर सौंपकर इस पूरे मामले में पुलिस से कार्रवाई की मांग की।
प्रदेशभर के थानों में कांग्रेस ने दी तहरीर
प्रदेश कांग्रेस के निर्देश पर अलग-अलग जिलों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पुलिस प्रशासन के समक्ष अपनी शिकायत दर्ज कराई। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के निर्देश पर जिलाध्यक्षों, महानगर अध्यक्षों, नगर अध्यक्षों और ब्लॉक अध्यक्षों के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ता अपने-अपने क्षेत्रों की कोतवालियों, थानों और पुलिस रिपोर्टिंग चौकियों में पहुंचे।
कांग्रेस की ओर से दी जा रही तहरीरों में संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट और राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज करने की मांग की जा रही है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि किसी भी लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष समाज में किसी व्यक्ति अथवा राजनीतिक दल के नेता की मौजूदगी के बाद सार्वजनिक मंच का कथित तौर पर ‘शुद्धिकरण’ करना सामाजिक सौहार्द के खिलाफ है। पार्टी ने इसे संविधान की मूल भावना और लोकतांत्रिक मर्यादाओं का अपमान बताया है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट की भूमिका की जांच की मांग
कांग्रेस ने इस मामले में संबंधित असामाजिक तत्वों के साथ-साथ भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट की भूमिका की भी जांच किए जाने की मांग की है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जो भी व्यक्ति इस प्रकरण में दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि घटना के संबंध में पर्याप्त समय बीत जाने के बावजूद पुलिस की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई है। इसी के विरोध में पार्टी ने प्रदेशभर में पुलिस प्रशासन को तहरीर देकर मुकदमा दर्ज करने की मांग उठाई है।
कांग्रेस नेताओं ने पुलिस प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि तहरीरों पर नियमानुसार कार्रवाई नहीं की गई तो पार्टी लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से अपने आंदोलन को आगे बढ़ाएगी।
1 सितंबर को सचिवालय घेराव का ऐलान
कांग्रेस नेताओं के अनुसार, प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा के निर्देश पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में 1 सितंबर को सचिवालय घेराव किया जाएगा।
पार्टी का कहना है कि यह आंदोलन केवल एक राजनीतिक दल के कार्यक्रम स्थल से जुड़े विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे लोकतांत्रिक मर्यादा, सामाजिक सौहार्द और संवैधानिक मूल्यों से जोड़कर देखा जा रहा है।
अल्मोड़ा में भी गरमाया मामला
वहीं दूसरी ओर हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कार्यक्रम स्थल के कथित शुद्धिकरण का मामला अब अल्मोड़ा में भी सियासी चिंगारी भड़काने लगा है।
सोमवार को बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता अल्मोड़ा कोतवाली पहुंचे। कार्यकर्ताओं ने घटना के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की और पुलिस पर मामले में कार्रवाई का दबाव बनाया।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट कहा कि राजनीतिक विरोध की आड़ में सामाजिक और धार्मिक भावनाओं को भड़काने की कोशिश किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी।
‘राजनीतिक असहमति का जवाब धार्मिक प्रतीकों से दिया जाएगा?’
कोतवाली पहुंचे कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता और विपक्ष के बीच वैचारिक संघर्ष स्वाभाविक है। राजनीतिक दल एक-दूसरे की नीतियों और विचारधारा का विरोध कर सकते हैं, लेकिन किसी राजनीतिक दल के कार्यक्रम स्थल का कथित तौर पर गंगाजल से शुद्धिकरण करना विरोध की राजनीति को एक अलग ही स्तर पर ले जाता है।
कांग्रेस ने सवाल उठाया कि क्या अब राजनीतिक असहमति का जवाब धार्मिक प्रतीकों के जरिए दिया जाएगा?
पार्टी कार्यकर्ताओं ने पुलिस को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की जाए। इसके साथ ही वीडियो और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर संबंधित लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाए।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि कानून सबके लिए बराबर है और राजनीतिक प्रभाव के कारण किसी को भी कार्रवाई से बचने नहीं दिया जाना चाहिए।
पुलिस-प्रशासन पर भी कांग्रेस ने उठाए सवाल
कांग्रेस नेताओं ने पुलिस और प्रशासन को सीधे निशाने पर लेते हुए कहा कि यदि घटना सामने आने के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं होती है तो इससे प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े होंगे।
कांग्रेस नेताओं का कहना था कि कानून की किताब में आरोपी का राजनीतिक झंडा नहीं देखा जाता, बल्कि अपराध देखा जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में लगातार ऐसी राजनीति को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसमें वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाकर धार्मिक और भावनात्मक विषयों को आगे किया जा रहा है।
पार्टी ने चेतावनी दी कि यदि पुलिस ने मामले में तत्काल कार्रवाई नहीं की तो कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे।
विधानसभा चुनाव से पहले बढ़ सकती है सियासी तल्खी
हल्द्वानी का मंच शुद्धिकरण प्रकरण अब केवल एक शहर तक सीमित नहीं रह गया है। कांग्रेस इसे लोकतांत्रिक मर्यादा, सामाजिक सौहार्द और संवैधानिक मूल्यों से जोड़कर प्रदेशभर में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाने की तैयारी में दिखाई दे रही है।
अल्मोड़ा में कोतवाली पहुंचकर एफआईआर की मांग को इसी राजनीतिक रणनीति का अगला कदम माना जा रहा है। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी माहौल पहले ही गरम है। ऐसे में मंच शुद्धिकरण का विवाद भाजपा और कांग्रेस के बीच बढ़ती राजनीतिक तल्खी को और हवा दे सकता है।
कांग्रेस जहां इस प्रकरण को सामाजिक सौहार्द और संवैधानिक मूल्यों से जोड़कर कार्रवाई की मांग कर रही है, वहीं आने वाले दिनों में यह विवाद प्रदेश की राजनीति में कितना बड़ा मुद्दा बनता है, यह देखने वाली बात होगी।