चारधाम यात्रा में बढ़ीं मौतें, 26 दिनों में 45 श्रद्धालुओं ने गंवाई जान; स्वास्थ्य मंत्री बोले- “थकान हो तो आराम करें, पहलवानी नहीं”
देहरादून: उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा 2026 में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। 19 अप्रैल से शुरू हुई यात्रा में 14 मई की शाम तक 13 लाख 32 हजार से अधिक श्रद्धालु बाबा केदार, बदरीविशाल, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के दर्शन कर चुके हैं। एक ओर जहां आस्था का सैलाब लगातार बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की मौत के बढ़ते आंकड़े सरकार और स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा रहे हैं।
26 दिनों में 45 श्रद्धालुओं की मौत
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार चारधाम यात्रा शुरू होने के बाद से अब तक 45 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है। इनमें अधिकांश मामलों में हार्ट अटैक, हाई एल्टीट्यूड सिकनेस, सांस लेने में दिक्कत और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं सामने आई हैं।
धामवार आंकड़ों पर नजर डालें तो सबसे अधिक मौतें केदारनाथ धाम में हुई हैं। 22 अप्रैल को कपाट खुलने के बाद से 14 मई तक यहां 24 श्रद्धालुओं की जान जा चुकी है। इसके अलावा बदरीनाथ धाम में 8, गंगोत्री धाम में 7 और यमुनोत्री धाम में 6 श्रद्धालुओं की मौत हुई है।
सरकार की बढ़ी चिंता, स्वास्थ्य व्यवस्था पर फोकस
श्रद्धालुओं की लगातार हो रही मौतों को लेकर स्वास्थ्य विभाग पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि यात्रा शुरू होने से पहले सरकार ने बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और आपातकालीन सेवाओं के दावे किए थे। हालांकि अब सरकार लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है।
उत्तराखंड सरकार में स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि चारधाम यात्रा मार्गों पर स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत किया गया है। उन्होंने बताया कि यात्रा मार्गों पर 47 अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को सक्रिय रखा गया है। इसके साथ ही 400 से अधिक डॉक्टरों की तैनाती की गई है।
मंत्री ने कहा कि इनमें 180 डॉक्टरों को विशेष रूप से हाई एल्टीट्यूड सिकनेस, हाइपरटेंशन और शुगर मरीजों के उपचार की ट्रेनिंग दी गई है, ताकि यात्रा के दौरान किसी भी आपात स्थिति में तत्काल इलाज मिल सके।
“यात्रा में पहलवानी दिखाने की जरूरत नहीं”
स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने श्रद्धालुओं से अपील करते हुए कहा कि चारधाम यात्रा कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाली यात्रा है, इसलिए स्वास्थ्य को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि 50 से 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में हाई एल्टीट्यूड सिकनेस का खतरा अधिक रहता है। यदि यात्रा के दौरान सांस फूलना, चक्कर आना या अत्यधिक थकान महसूस हो, तो तुरंत आराम करना चाहिए।
उन्होंने साफ शब्दों में कहा,
“चारधाम यात्रा में पहलवानी दिखाने की जरूरत नहीं है। अगर थकान महसूस हो रही है तो कुछ देर आराम करें, उसके बाद ही आगे बढ़ें।”
स्वास्थ्य जांच कराकर ही यात्रा पर आने की सलाह
स्वास्थ्य विभाग ने एडवाइजरी जारी कर हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर और शुगर से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। विभाग का कहना है कि ऐसे श्रद्धालु यात्रा पर आने से पहले पूरा मेडिकल चेकअप जरूर कराएं और डॉक्टर की सलाह के बाद ही यात्रा करें।
मंत्री ने बताया कि राज्य में कार्डियोलॉजिस्ट की संख्या सीमित है, लेकिन सरकार लगातार सुविधाएं बढ़ाने में जुटी हुई है। श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में पहली बार कैथ लैब शुरू की गई है और जरूरत पड़ने पर हेलीकॉप्टर सेवाओं के जरिए मरीजों को एयरलिफ्ट भी किया जा रहा है।
रिकॉर्ड संख्या में पहुंच रहे श्रद्धालु