कवि केवल शब्दों के निर्माता नहीं, समाज के चिंतक और मार्गदर्शक भी हैं: मुख्यमंत्री धामी

“जब समाज चुनौतियों से घिरता है, तब कवि और साहित्यकार अपनी लेखनी से नई दिशा देने का कार्य करते हैं” — मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी। कार्यक्रम में कुमार विश्वास, अशोक चक्रधर और हरिओम पंवार सहित देशभर के प्रतिष्ठित साहित्यकार मौजूद रहे।

कालाढूंगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि कवि और साहित्यकार केवल शब्दों का सृजन करने वाले व्यक्तित्व नहीं होते, बल्कि वे समाज के चिंतक, मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत भी होते हैं। जब समाज चुनौतियों के दौर से गुजरता है, तब साहित्यकार अपनी लेखनी के माध्यम से नई दिशा और नई चेतना प्रदान करते हैं। मुख्यमंत्री शनिवार को कालाढूंगी स्थित नमस्ते कॉर्बेट रिजॉर्ट में आयोजित ललित फाउंडेशन के पंचम अधिवेशन “अभिव्यंजना 5.0” के उद्घाटन अवसर पर संबोधित कर रहे थे।

कार्यक्रम में देश के प्रतिष्ठित कवियों और साहित्यकारों की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को विशेष बना दिया। मंच पर सुप्रसिद्ध कवि कुमार विश्वास, अशोक चक्रधर तथा हरिओम पंवार सहित अनेक नामचीन साहित्यकार उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम से लेकर राष्ट्र निर्माण की यात्रा तक साहित्य और कविता ने जनमानस को जागृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। साहित्यकारों की रचनाएं समाज को नई सोच देने के साथ-साथ सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम भी बनी हैं। उन्होंने कहा कि देश और समाज को दिशा देने में साहित्य की भूमिका सदैव महत्वपूर्ण रही है और भविष्य में भी बनी रहेगी।

उन्होंने उत्तराखंड की समृद्ध साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि देवभूमि ने देश को अनेक महान साहित्यकार, कवि, लोकचिंतक और समाज सुधारक दिए हैं। यहां की लोकसंस्कृति, लोकभाषाएं और साहित्यिक परंपराएं प्रदेश की पहचान हैं। यह विरासत आज भी नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ते हुए राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे साहित्यिक आयोजन समाज में सकारात्मक विचारों के आदान-प्रदान का मंच प्रदान करते हैं। इससे युवा पीढ़ी को साहित्य, संस्कृति और भारतीय मूल्यों को समझने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को जागरूक और संवेदनशील बनाने का सशक्त उपकरण है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले साहित्यकारों, कवियों और समाजसेवियों को सम्मानित भी किया। उन्होंने सम्मानित व्यक्तित्वों को बधाई देते हुए कहा कि उनके कार्य समाज के लिए प्रेरणादायी हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शन का कार्य करेंगे।

कार्यक्रम में देशभर से आए कवियों, साहित्यकारों, शिक्षाविदों, समाजसेवियों और साहित्य प्रेमियों ने भाग लिया। “अभिव्यंजना 5.0” के मंच पर साहित्य, संस्कृति, राष्ट्रवाद और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।

साहित्यिक वातावरण और रचनात्मक संवाद के बीच आयोजित यह अधिवेशन उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान और साहित्यिक परंपरा को नई ऊर्जा देने वाला साबित हुआ।

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