जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृह मंत्री के सामने उठाए कई अहम मुद्दे, मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू बनाने पर भी हुई चर्चा
नई दिल्ली/जम्मू: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शुक्रवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। राजधानी नई दिल्ली में हुई इस बैठक के दौरान जम्मू-कश्मीर से जुड़े कई महत्वपूर्ण राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने केंद्र के सामने जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा जल्द बहाल करने की मांग को प्रमुखता से रखा। इसके अलावा शासन व्यवस्था से जुड़े नियमों को अंतिम रूप देने, आरक्षण व्यवस्था के युक्तिकरण, जनकल्याण और विकास से जुड़े विषयों पर भी दोनों नेताओं के बीच बातचीत हुई।
यह मुलाकात इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने का मुद्दा पिछले कई वर्षों से केंद्र और जम्मू-कश्मीर की राजनीति के बीच प्रमुख विषय बना हुआ है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पहले भी कई मौकों पर केंद्र सरकार से राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग कर चुके हैं।
2019 के बाद बदली जम्मू-कश्मीर की संवैधानिक स्थिति
जम्मू-कश्मीर की मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था की पृष्ठभूमि वर्ष 2019 के फैसलों से जुड़ी है। 5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 के अधिकांश प्रावधानों को समाप्त किया था। इसके बाद तत्कालीन जम्मू-कश्मीर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों—जम्मू-कश्मीर और लद्दाख—में विभाजित कर दिया गया।
इसके बाद से जम्मू-कश्मीर को फिर से पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग लगातार उठती रही है। केंद्र सरकार की ओर से समय आने पर राज्य का दर्जा बहाल करने की बात कही जाती रही है, जबकि जम्मू-कश्मीर की निर्वाचित सरकार मौजूदा केंद्र शासित प्रदेश की व्यवस्था में प्रशासनिक अधिकारों और कामकाज से जुड़ी चुनौतियों का मुद्दा उठाती रही है।
संसद सत्र से पहले प्रदर्शन के बाद पहली बड़ी मुलाकात
अमित शाह और उमर अब्दुल्ला के बीच यह मुलाकात 20 जुलाई को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन मुख्यमंत्री द्वारा नई दिल्ली में राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर किए गए प्रदर्शन के बाद पहली मुलाकात बताई जा रही है। ऐसे में दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत को राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टियों से अहम माना जा रहा है।
उमर अब्दुल्ला ने बैठक के दौरान केंद्र सरकार के सामने जम्मू-कश्मीर की मौजूदा व्यवस्था से जुड़े विषयों को रखा और प्रशासनिक कामकाज को अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत पर जोर दिया।
शासन व्यवस्था के नियमों को अंतिम रूप देने पर भी चर्चा
मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, बैठक में जम्मू-कश्मीर के लिए शासन व्यवस्था से जुड़े नियमों को अंतिम रूप देने पर भी विशेष रूप से चर्चा हुई। निर्वाचित सरकार के कामकाज को प्रभावी बनाने और प्रशासनिक स्तर पर स्पष्टता सुनिश्चित करने के लिहाज से यह मुद्दा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इसके साथ ही आरक्षण व्यवस्था के युक्तिकरण का विषय भी बैठक में उठाया गया। जम्मू-कश्मीर में विभिन्न वर्गों से जुड़े आरक्षण और उससे संबंधित नीतिगत प्रावधान लंबे समय से चर्चा का विषय रहे हैं।
जनकल्याण और विकास के मुद्दे भी एजेंडे में
बैठक केवल राजनीतिक और संवैधानिक मुद्दों तक सीमित नहीं रही। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर में जनकल्याणकारी योजनाओं, प्रशासनिक दक्षता और दीर्घकालिक विकास से जुड़े विषय भी केंद्रीय गृह मंत्री के सामने रखे।
मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, बैठक में जम्मू-कश्मीर से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई। इसमें राज्य का दर्जा बहाल करने, शासन व्यवस्था से जुड़े नियमों को अंतिम रूप देने, आरक्षण व्यवस्था के युक्तिकरण के साथ-साथ जनकल्याण और विकास से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे।
राज्य का दर्जा बहाली पर टिकी नजरें
जम्मू-कश्मीर में निर्वाचित सरकार बनने के बाद से राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग लगातार राजनीतिक विमर्श के केंद्र में है। ऐसे में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और गृह मंत्री अमित शाह की यह मुलाकात इस मुद्दे को लेकर आगे की दिशा के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
हालांकि, बैठक के बाद राज्य का दर्जा बहाल करने को लेकर कोई तत्काल घोषणा सामने नहीं आई है। ऐसे में अब निगाहें केंद्र सरकार की आगामी पहल और जम्मू-कश्मीर सरकार के साथ होने वाली आगे की बातचीत पर रहेंगी।