मिडिल ईस्ट तनाव का असर चारधाम यात्रा पर, श्रद्धालु असमंजस में, कारोबारियों को नुकसान की आशंका

मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध का असर अब उत्तराखंड की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा पर भी दिखाई देने लगा है। हरिद्वार, जिसे चारधाम यात्रा का प्रवेश द्वार माना जाता है, वहां ट्रैवल कारोबारियों के सामने इस सीजन में अनिश्चितता की स्थिति बन गई है। श्रद्धालु यात्रा को लेकर उत्साहित तो हैं, लेकिन ईंधन और गैस सिलेंडर की उपलब्धता को लेकर उनके मन में कई सवाल हैं।

ट्रैवल कारोबारियों के अनुसार इस बार यात्रियों की प्राथमिक चिंता दर्शन या रूट नहीं, बल्कि गैस सिलेंडर, पेट्रोल-डीजल और सीएनजी की उपलब्धता को लेकर है। फोन पर आने वाली अधिकतर पूछताछ इन्हीं विषयों पर केंद्रित है। कई श्रद्धालु प्री-बुकिंग करने से पहले यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि यात्रा के दौरान उन्हें खाने-पीने और ईंधन से जुड़ी किसी तरह की परेशानी न हो।

राजस्थान, गुजरात और पश्चिम बंगाल से आने वाले श्रद्धालु बड़ी बसों में जत्थे के साथ आते हैं और उन्हें खाना बनाने के लिए गैस सिलिंडर की जरूरत होती है.

-विजय शुक्ला, ट्रैवल कारोबारी-

इस बार यात्री खाने, गैस सिलिंडर, डीजल-पेट्रोल और सीएनजी की सुनिश्चितता चाह रहा है और बुकिंग कन्फर्म से पहले लगातार पूछताछ कर रहा है.

-गिरीश भाटिया, ट्रैवल कारोबारी-

ट्रैवल कारोबारी संजय शर्मा का कहना है कि कोविड काल की मार झेल चुके यात्री इस बार असमंजस की स्थिति में हैं. उनको ऐसा लग रहा है कि युद्ध बढ़ने से उन्हें भी दिक्कत उठानी पड़ सकती है. हालांकि सबके बीच सरकार की तरफ से श्रद्धालुओं की भरोसा दिया जा रहा है कि उन्हें किसी भी तरह की कोई दिक्कत नहीं होगी. प्रशासन का कहना है कि चारधाम यात्रा की शुरुआत से सभी तरह की व्यवस्थाएं दुरुस्त करने में लगे हुए हैं. यात्रा के मुख्य पड़ावों पर सिलेंडर की सप्लाई भी बढ़ाई जा रही है.

हरिद्वार में ईंधन और सिलेंडर की कोई किल्लत नहीं है. होटल एसोसिएशन और ट्रैवल कारोबारियों के साथ प्रशासन समन्वय में बना रहा है, ताकि श्रद्धालुओं को कोई दिक्कत ना हो. जल्द ही हरिद्वार के सभी होटलों और आश्रमों में एलपीजी के विकल्प में पीएनजी के कनेक्शन भी दिए जाएंगे.

-मयूर दीक्षित, हरिद्वार डीएम-

पिछले साल की तुलना में इस बार बुकिंग में गिरावट भी दर्ज की जा रही है। खासतौर पर राजस्थान, गुजरात और पश्चिम बंगाल से आने वाले बड़े जत्थे, जो बसों के जरिए यात्रा करते हैं, वे अभी निर्णय लेने में हिचकिचा रहे हैं। इन यात्रियों को रास्ते में भोजन बनाने के लिए गैस सिलेंडर की आवश्यकता होती है, जिससे उनकी चिंता और बढ़ गई है।

ट्रैवल कारोबारियों का कहना है कि कोविड के बाद धीरे-धीरे पटरी पर लौट रहा यह व्यवसाय अब एक नई चुनौती का सामना कर रहा है। उन्हें डर है कि अगर यही स्थिति बनी रही, तो इस सीजन में बड़ा आर्थिक नुकसान हो सकता है।

हालांकि जिला प्रशासन श्रद्धालुओं को भरोसा दिला रहा है कि यात्रा पूरी तरह सुरक्षित और सुगम रहेगी। प्रशासन के अनुसार ईंधन और गैस सिलेंडर की कोई कमी नहीं है और यात्रा मार्गों पर सप्लाई को और मजबूत किया जा रहा है। साथ ही, होटलों और आश्रमों में एलपीजी के विकल्प के रूप में पीएनजी कनेक्शन देने की तैयारी भी की जा रही है, ताकि यात्रियों को किसी तरह की असुविधा न हो।

हर साल लाखों श्रद्धालु चारधाम यात्रा में शामिल होते हैं, ऐसे में इस बार की स्थिति को देखते हुए सरकार और प्रशासन के लिए चुनौती है कि वे भरोसा बनाए रखते हुए सभी जरूरी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करें, ताकि यात्रा प्रभावित न हो।

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