अपने ही नेताओं के पोस्टर पर कांग्रेस में संग्राम! देहरादून में गुस्से में फाड़ा महानगर अध्यक्ष का पोस्टर, गुटबाजी फिर आई सामने

संकल्प यात्रा में स्थानीय नेताओं की अनदेखी से नाराज हुईं कांग्रेस नेत्री पिया थापा, कांग्रेस भवन पहुंचकर जताया विरोध; प्रदेश प्रवक्ता बोले- बड़े परिवार में छोटे-मोटे मनमुटाव स्वाभाविक

देहरादून। उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच कांग्रेस के सामने जहां संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को एकजुट करने की चुनौती है, वहीं पार्टी के भीतर की अंतर्कलह और गुटबाजी एक बार फिर खुलकर सामने आती दिखाई दी है। देहरादून में कांग्रेस की एक नेत्री ने अपनी ही पार्टी के महानगर अध्यक्ष का पोस्टर फाड़कर विरोध जताया है। इस घटना के बाद कांग्रेस संगठन के भीतर चल रही खींचतान को लेकर सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं।

मामला कौलागढ़ क्षेत्र में निकली संकल्प यात्रा से जुड़ा है। आरोप है कि कांग्रेस की संकल्प यात्रा स्थानीय क्षेत्र से होकर गुजरी, लेकिन वहां के प्रमुख स्थानीय कांग्रेस नेताओं को इसकी जानकारी तक नहीं दी गई। इसी बात से नाराज कांग्रेस की ओबीसी विभाग की राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर पिया थापा ने कांग्रेस प्रदेश मुख्यालय पहुंचकर महानगर अध्यक्ष डॉ. जसविंदर गोगी का पोस्टर फाड़कर अपना विरोध दर्ज कराया।

घटना ने उस समय राजनीतिक रंग ले लिया, जब कांग्रेस लगातार 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर संगठन को एकजुट करने और भाजपा के खिलाफ मजबूत विपक्ष खड़ा करने की रणनीति पर काम कर रही है।

कौलागढ़ में यात्रा, लेकिन स्थानीय नेताओं को नहीं मिली जानकारी

दरअसल कांग्रेस की ओर से निकाली गई संकल्प यात्रा कौलागढ़ क्षेत्र से होकर गुजरी थी। इस यात्रा में कांग्रेस की चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत भी शामिल हुए।

लेकिन कांग्रेस नेत्री पिया थापा और कांग्रेस के गोरखा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष एवं स्थानीय निवासी अनिल बस्नेत का आरोप है कि उन्हें यात्रा के संबंध में कोई जानकारी नहीं दी गई। उनका कहना है कि जिस क्षेत्र में कार्यक्रम आयोजित किया गया, वहां के स्थानीय पार्टी पदाधिकारियों और नेताओं को ही कार्यक्रम से दूर रखा गया।

यही बात पिया थापा को नागवार गुजरी और उन्होंने खुलकर इसका विरोध किया।

कांग्रेस भवन पहुंचीं पिया थापा, पोस्टर फाड़कर जताया विरोध

पिया थापा का कहना है कि उनके क्षेत्र में कांग्रेस का कार्यक्रम आयोजित किया गया, लेकिन महानगर अध्यक्ष जसविंदर सिंह की ओर से उन्हें न तो यात्रा के बारे में बताया गया और न ही कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया।

नाराज पिया थापा कांग्रेस भवन पहुंचीं और वहां महानगर अध्यक्ष जसविंदर सिंह का पोस्टर फाड़कर अपना विरोध दर्ज कराया।

इस घटना के बाद कांग्रेस भवन में पार्टी के भीतर चल रही आपसी खींचतान एक बार फिर सार्वजनिक हो गई। पोस्टर फाड़े जाने की घटना ने कांग्रेस संगठन में चल रही अंदरूनी राजनीति को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

2027 से पहले कांग्रेस के लिए बढ़ सकती है मुश्किल

उत्तराखंड में अगले विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस अभी से अपनी तैयारियों में जुटी है। पार्टी लगातार सरकार के खिलाफ बेरोजगारी, महंगाई, पलायन, कानून-व्यवस्था और विकास जैसे मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाने की कोशिश कर रही है।

ऐसे समय में संगठन के भीतर ही नेताओं के बीच नाराजगी और कार्यक्रमों में स्थानीय नेताओं की कथित अनदेखी पार्टी के लिए चुनौती बन सकती है।

कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती अलग-अलग गुटों को एक मंच पर लाने की है। प्रदेश स्तर पर वरिष्ठ नेताओं की ओर से कई बार कार्यकर्ताओं और नेताओं से आपसी मतभेद भुलाकर चुनाव की तैयारी में जुटने की अपील की जा चुकी है। इसके बावजूद इस तरह की घटनाएं सामने आना पार्टी की एकजुटता पर सवाल खड़े करता है।

कांग्रेस ने कहा- बड़े परिवार में मनमुटाव स्वाभाविक

मामले पर कांग्रेस ने सफाई भी दी है। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता शीशपाल बिष्ट ने कहा कि 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस पूरी तरह तैयार है और प्रदेश नेतृत्व पूरी तरह एकजुट है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व भी उत्तराखंड को पूरी गंभीरता से ले रहा है। पोस्टर फाड़े जाने की घटना पर उन्होंने कहा कि अगर किसी कार्यकर्ता ने किसी दूसरे कार्यकर्ता का पोस्टर फाड़ा भी है तो इतने बड़े कांग्रेस परिवार में छोटे-मोटे मनमुटाव होना स्वाभाविक है।

प्रदेश प्रवक्ता ने यह भी कहा कि पार्टी इस मामले का संज्ञान लेगी और अगर कहीं कोई दिक्कत होगी तो उसे दूर करने का पूरा प्रयास किया जाएगा।

क्या स्थानीय नेताओं की अनदेखी बन रही है गुटबाजी की वजह?

इस पूरे घटनाक्रम के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर कांग्रेस के स्थानीय नेताओं और पदाधिकारियों के बीच नाराजगी क्यों बढ़ रही है?

कौलागढ़ की घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि क्या पार्टी के कार्यक्रमों में स्थानीय संगठन और नेताओं को पर्याप्त महत्व नहीं मिल रहा है? यदि ऐसा है तो चुनाव से पहले कांग्रेस को अपने संगठनात्मक ढांचे में तालमेल बढ़ाने की जरूरत होगी।

क्योंकि चुनावी मैदान में उतरने से पहले किसी भी राजनीतिक दल के लिए बूथ स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक संगठन की एकजुटता बेहद महत्वपूर्ण होती है। स्थानीय नेताओं की नाराजगी अगर लगातार सामने आती रही तो इसका असर चुनावी तैयारियों पर भी पड़ सकता है।

भाजपा को मिल सकता है कांग्रेस पर हमला करने का मौका

कांग्रेस के भीतर सामने आई इस घटना को भाजपा भी राजनीतिक मुद्दा बना सकती है। भाजपा लंबे समय से कांग्रेस पर गुटबाजी और अंदरूनी खींचतान के आरोप लगाती रही है। ऐसे में अपने ही पार्टी नेता का पोस्टर फाड़े जाने की घटना भाजपा को कांग्रेस पर निशाना साधने का एक और मौका दे सकती है।

हालांकि कांग्रेस ने इसे बड़ा विवाद मानने के बजाय आपसी मनमुटाव बताया है और मामले को पार्टी स्तर पर सुलझाने की बात कही है।

चुनाव से पहले संगठन को साधना कांग्रेस के लिए जरूरी

2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के सामने सत्ता में वापसी की बड़ी चुनौती है। इसके लिए पार्टी को जहां जनता के बीच सरकार के खिलाफ मुद्दे उठाने होंगे, वहीं अपने संगठन को भी मजबूत और एकजुट रखना होगा।

कौलागढ़ में संकल्प यात्रा को लेकर सामने आया विवाद भले ही एक स्थानीय घटनाक्रम हो, लेकिन इसके राजनीतिक संकेत व्यापक हैं। अगर ऐसे विवाद लगातार सामने आते हैं तो पार्टी के लिए चुनावी अभियान को एक दिशा में आगे बढ़ाना मुश्किल हो सकता है।

फिलहाल कांग्रेस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए समाधान की बात कही है। अब देखना होगा कि पार्टी स्थानीय नेताओं की नाराजगी को किस तरह दूर करती है और 2027 के चुनाव से पहले संगठन को एकजुट रखने में कितना सफल होती है।

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