अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण गठन की तैयारी तेज, नियमावली जल्द कैबिनेट में; 1 जुलाई से मदरसा बोर्ड होगा भंग
देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने राज्य के मदरसों को औपचारिक शिक्षा प्रणाली से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है। उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा विधेयक 2025 को मंजूरी मिलने के बाद अब इसके क्रियान्वयन पर तेजी से काम शुरू हो गया है। सरकार की योजना है कि राज्य के सभी मदरसों को उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा बोर्ड (UBSE) से संबद्ध किया जाए, ताकि वहां पढ़ने वाले छात्रों को भी वही शैक्षणिक ढांचा और मान्यता मिले जो अन्य स्कूलों के छात्रों को मिलती है।
नया प्राधिकरण संभालेगा जिम्मेदारी
सरकार अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन कर रही है। यह प्राधिकरण राज्य के सभी अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों — जैसे मदरसे, सिख, ईसाई, जैन और बौद्ध समुदाय से जुड़े शिक्षण संस्थानों — की मान्यता, संचालन, गुणवत्ता नियंत्रण और निगरानी का काम करेगा।
इसके लिए विस्तृत नियमावली तैयार की जा चुकी है, जिसे जल्द कैबिनेट में पेश किया जाएगा। मंजूरी मिलते ही प्राधिकरण औपचारिक रूप से काम शुरू कर देगा।
मदरसा बोर्ड 1 जुलाई से समाप्त
नई व्यवस्था के तहत 1 जुलाई से राज्य का मदरसा बोर्ड भंग हो जाएगा। इसके बाद सभी मदरसे सामान्य विद्यालयों की तरह उत्तराखंड बोर्ड के अंतर्गत संचालित होंगे।
मदरसों को मान्यता के लिए दो स्तरों पर प्रक्रिया पूरी करनी होगी:
अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से मान्यता
उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा बोर्ड से संबद्धता
छात्रों को क्या होगा फायदा?
सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से मदरसों में पढ़ने वाले छात्रों को:
राज्य बोर्ड का मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रम
समान परीक्षा प्रणाली
आधिकारिक प्रमाणपत्र
उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में समान अवसर
मिल सकेंगे। इससे आगे की पढ़ाई और रोजगार में किसी तरह की बाधा नहीं रहेगी।
कैसे होगी संबद्धता प्रक्रिया?
मदरसों को संबद्धता के लिए अपने संस्थान से जुड़े दस्तावेज, शिक्षकों की योग्यता, भवन, कक्षाएं और अन्य सुविधाओं का विवरण देना होगा। शिक्षा विभाग और अल्पसंख्यक विभाग मिलकर इस प्रक्रिया को सरल और समयबद्ध बनाने में जुटे हैं।
अल्पसंख्यक विभाग के विशेष सचिव पराग मधुकर धकाते के अनुसार, शिक्षा विभाग से समन्वय किया जा रहा है और संबंधित अधिकारियों को नियमों की जानकारी दी जा रही है।
किन जिलों पर रहेगा ज्यादा असर?
राज्य में बड़ी संख्या में मदरसे देहरादून, हरिद्वार, उधम सिंह नगर और नैनीताल जिलों में संचालित हैं। यहां हजारों छात्र धार्मिक शिक्षा के साथ सामान्य विषय भी पढ़ते हैं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद इन छात्रों को वही शैक्षणिक ढांचा मिलेगा जो अन्य स्कूलों में लागू है।
सरकार की प्राथमिकता: बिना व्यवधान बदलाव
अधिकारियों का कहना है कि पूरी प्रक्रिया इस तरह लागू की जाएगी कि किसी भी मदरसे या छात्र को असुविधा न हो और शैक्षणिक सत्र प्रभावित न हो।