पिथौरागढ़ में बेटियों ने तोड़ी परंपरा, पिता को कंधा देकर दी मुखाग्नि, पेश की मिसाल

पिथौरागढ़ जिले के बेरीनाग क्षेत्र से एक भावुक और प्रेरणादायक मामला सामने आया है, जहां बेटियों ने समाज की रूढ़िवादी परंपराओं को तोड़ते हुए अपने पिता के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी निभाई। इस घटना ने न केवल लोगों को भावुक किया, बल्कि समाज को एक मजबूत संदेश भी दिया।

बेरीनाग विकासखंड के मोना गांव निवासी 73 वर्षीय नंदन सिंह दशौनी का 29 मार्च को बीमारी के चलते निधन हो गया था। उनका कोई बेटा नहीं था, जिससे अंतिम संस्कार को लेकर परिवार और ग्रामीणों में असमंजस की स्थिति बन गई थी।

पिता के निधन की खबर मिलते ही उनकी विवाहित बेटियां—हेमा कार्की और नीमा कार्की—अपने मायके पहुंचीं और उन्होंने स्वयं पिता की अर्थी को कंधा देने और मुखाग्नि देने का निर्णय लिया। उन्होंने साफ कहा कि बेटा न होने का मतलब यह नहीं कि पिता के अंतिम संस्कार में कोई कमी रह जाए, वे बेटे की तरह अपना फर्ज निभाएंगी।

अगले दिन जब शव यात्रा निकली, तो दोनों बेटियों ने पूरे सम्मान के साथ अपने पिता की अर्थी को कंधा दिया। इसके बाद श्मशान घाट पहुंचकर उन्होंने चिता को मुखाग्नि दी। यह दृश्य इतना भावुक था कि वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। बेटियों के इस साहसिक कदम की पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है।

गौरतलब है कि इससे पहले भी गंगोलीहाट क्षेत्र में ऐसी ही एक घटना सामने आई थी, जहां सात बेटियों ने अपने पिता का अंतिम संस्कार कर समाज को नई दिशा दी थी।

यह घटना बदलते समाज की तस्वीर पेश करती है, जहां बेटियां अब हर जिम्मेदारी निभाने के लिए आगे आ रही हैं और पुरानी परंपराओं को चुनौती देकर नई सोच को जन्म दे रही हैं।

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