प्रवासी बुद्धिजीवियों से मुख्यमंत्री धामी का संवाद, विकास की प्राथमिकताओं पर हुई चर्चा

CM बोले- उत्तराखण्ड की विकास यात्रा में प्रवासी उत्तराखण्डियों की महत्वपूर्ण भागीदारी, सुझावों को नीतियों में किया जाएगा शामिल

 

नई दिल्ली। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को नई दिल्ली स्थित उत्तराखण्ड निवास में विभिन्न संस्थानों से जुड़े उत्तराखण्ड के प्रवासी बुद्धिजीवियों और प्रबुद्धजनों से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने राज्य के विकास की प्राथमिकताओं, निवेश, रोजगार, रिवर्स पलायन, पर्यटन, कनेक्टिविटी, शिक्षा और युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा की। प्रवासी बुद्धिजीवियों ने भी उत्तराखण्ड के विकास को लेकर अपने सुझाव मुख्यमंत्री के समक्ष रखे।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड की विकास यात्रा में प्रवासी उत्तराखण्ड वासियों और प्रबुद्धजनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। देश और विदेश के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाने वाले प्रवासी उत्तराखण्डी राज्य के विकास में अपने अनुभव और विशेषज्ञता के माध्यम से योगदान दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि संवाद के दौरान प्राप्त सुझावों का राज्य के विकास के लिए तैयार की जाने वाली नीतियों में समावेश किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने अपनी व्यस्तताओं के बावजूद कार्यक्रम में उपस्थित होने के लिए सभी प्रवासी बुद्धिजीवियों का आभार भी व्यक्त किया।

 

विकास के लिए बजट बढ़ाकर 1.12 लाख करोड़ रुपये किया

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और प्राकृतिक संपदा से संपन्न राज्य है। राज्य सरकार विकास को गति देने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में योजनाबद्ध तरीके से काम कर रही है। सरकार ने राज्य का बजट बढ़ाकर एक लाख 12 हजार करोड़ रुपये तक किया है। उन्होंने कहा कि रिवर्स पलायन को बढ़ावा देने के लिए अभी विभिन्न क्षेत्रों में और काम किए जाने की आवश्यकता है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी’ को राज्य के विकास में उपयोगी बनाने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। पर्यटन, स्वरोजगार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों के विस्तार से रिवर्स माइग्रेशन की दिशा में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री के अनुसार, राज्य में रिवर्स माइग्रेशन में 44 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

 

मजबूत कनेक्टिविटी को निवेश के लिए बताया महत्वपूर्ण

 

मुख्यमंत्री ने राज्य की मजबूत होती कनेक्टिविटी को निवेश के लिए महत्वपूर्ण ताकत बताया। उन्होंने कहा कि दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के शुरू होने से राष्ट्रीय राजधानी और देहरादून के बीच यात्रा का समय काफी कम हुआ है। देहरादून से देश के प्रमुख शहरों के लिए 50 से अधिक हवाई सेवाएं उपलब्ध हैं।

 

उन्होंने कहा कि हरिद्वार राज्य के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में शामिल है, जबकि ऊधमसिंह नगर का पंतनगर कृषि के साथ-साथ औद्योगिक गतिविधियों के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित हुआ है। पंतनगर में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट को औद्योगिक और लॉजिस्टिक विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे क्षेत्र में विकास की संभावनाओं को और गति मिल सकती है।

 

एसडीजी रैंकिंग में राज्य की उपलब्धि का किया उल्लेख

 

मुख्यमंत्री ने राज्य की विभिन्न उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि नीति आयोग की एसडीजी रैंकिंग में उत्तराखण्ड ने शीर्ष स्थान हासिल किया है। उन्होंने कहा कि पर्वतीय और पूर्वोत्तर राज्यों की श्रेणी में भी निवेश के लिए बेहतर नीतिगत वातावरण तैयार करने की दिशा में उत्तराखण्ड को अग्रणी स्थान प्राप्त हुआ है।

 

35 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी सेवाओं में नियुक्ति

 

युवाओं और रोजगार के विषय पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि 4 जुलाई 2021 को मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद सरकार ने भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने का संकल्प लिया।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि पेपर लीक और नकल के मामलों में कठोर कार्रवाई की गई है। नकल माफिया के खिलाफ कार्रवाई करते हुए करीब 100 से अधिक लोगों को जेल भेजा गया है। उनके अनुसार, 35 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी सेवाओं में नियुक्ति दी गई है। भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए व्यापक सुधार किए गए हैं।

 

उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और मेहनती युवाओं के भविष्य की रक्षा के लिए राज्य में कठोर नकल विरोधी कानून लागू किया गया है। सरकार का प्रयास है कि किसी भी युवा की वर्षों की मेहनत, उसके सपनों और उसके अधिकार के साथ अन्याय न हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी नियुक्ति केवल एक आंकड़ा नहीं होती, बल्कि उसके पीछे किसी युवा की मेहनत और उसके परिवार की आशाएं जुड़ी होती हैं।

 

पर्यटन और स्थानीय रोजगार पर जोर

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि होमस्टे, छोटे होटल, कृषि, बागवानी और स्थानीय उद्यमों के माध्यम से बड़ी संख्या में युवा और महिलाएं स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। राज्य की पर्यटन क्षमता को अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा, कांवड़ यात्रा और आदि कैलाश जैसी यात्राओं में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंच रहे हैं।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि चारधाम यात्रा में कई गुना वृद्धि हुई है, जबकि कांवड़ यात्रा में करीब पांच करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आदि कैलाश क्षेत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के बाद पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इससे सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिला है।

 

समान नागरिक संहिता और कानूनों का किया उल्लेख

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में समान नागरिक संहिता लागू कर राज्य ने देश के सामने सुशासन और समान अधिकारों की दिशा में एक मॉडल प्रस्तुत किया है। उनके अनुसार, समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद समाज में सकारात्मक वातावरण बना है और महिलाओं, बच्चों तथा बुजुर्गों के अधिकारों को मजबूती मिली है।

 

उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की अस्मिता और डेमोग्राफी की रक्षा के लिए धर्मांतरण विरोधी और दंगा विरोधी कानून भी लागू किए गए हैं। देवभूमि की शांति और संस्कृति के खिलाफ काम करने वाली गतिविधियों पर सख्ती से कार्रवाई की जा रही है।

 

शिक्षा व्यवस्था में समानता और आधुनिकता पर जोर

 

मुख्यमंत्री ने शिक्षा व्यवस्था में समानता और आधुनिकता को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए कदमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्य में मदरसा बोर्ड को समाप्त कर उसके स्थान पर उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की व्यवस्था की गई है, जिसमें सभी वर्गों को शामिल किया गया है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि इसका उद्देश्य प्रदेश के प्रत्येक बच्चे को समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। ‘नेशन फर्स्ट’ की भावना के साथ शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य में निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित नहीं हो रहे 250 से अधिक मदरसों के विरुद्ध कार्रवाई की गई है। देवभूमि उत्तराखण्ड में शिक्षा के मंदिर मजबूत हों और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले, यह सरकार की प्राथमिकता है।

 

सीमांत क्षेत्रों में कनेक्टिविटी और खेल सुविधाओं का विस्तार

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखण्ड के समग्र विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है। सीमांत क्षेत्रों तक सड़क, रेल, रोपवे और हवाई कनेक्टिविटी का विस्तार किया जा रहा है। चारधाम यात्रा और धार्मिक पर्यटन को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ा गया है। युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर ही रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा किए जा रहे हैं।

 

उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड के युवा खेल के क्षेत्र में भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं। 38वें राष्ट्रीय खेलों के सफल आयोजन के बाद देवभूमि उत्तराखण्ड खेलभूमि के रूप में भी अपनी नई पहचान बना रहा है। राज्य सरकार खेल सुविधाओं के विकास और खिलाड़ियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए लगातार कार्य कर रही है।

 

प्रवासी बुद्धिजीवियों ने दिए विकास के सुझाव

 

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत उत्तराखण्ड के प्रबुद्धजनों ने राज्य के विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने सुझाव मुख्यमंत्री के समक्ष रखे। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रवासी उत्तराखण्डियों के अनुभव, विशेषज्ञता और राज्य के प्रति जुड़ाव का उपयोग उत्तराखण्ड के विकास में किया जाना महत्वपूर्ण है।

 

कार्यक्रम में प्रसून जोशी, प्रो. प्रदीप जोशी, अश्विनी लोहानी, प्रो. हर्ष वी. पंत, सुभाष धुलिया, प्रो. धनंजय जोशी, सुष्मिता रावत, डॉ. सरिता पाठक, कुलानंद जोशी, निर्मल पाठक, हरिसुमन बिष्ट, देव रतूड़ी, डॉ. सुषमा रावत, डॉ. निधि गुसाईं, देवेंद्र गुसाईं, डॉ. के.के. पाण्डेय, विनोद बछेती, डी.एस. रावत, डॉ. सरोज पाण्डेय, शंकर पाण्डेय, प्रो. दिनेश सकलानी, प्रो. पवन कुमार जोशी, वीरेंद्र सिंह नेगी, पवन कुमार मैठानी, हरेंद्र असवाल, संजय जोशी, डॉ. भुवन चंद्र पाण्डेय, विजय जोशी, डॉ. मेघा बिष्ट, लक्ष्मी रावत सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन प्रो. गोविंद सिंह ने किया।

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