चारधामों को प्लास्टिक मुक्त बनाने की मुहिम तेज, 798 टन कचरा एकत्र

श्रद्धालुओं में बढ़ी जागरूकता, केदारनाथ-बद्रीनाथ-गंगोत्री में विशेष सफाई अभियान जारी

देहरादून। चारधाम यात्रा को स्वच्छ, सुगम और पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए राज्य सरकार की ओर से चलाए जा रहे अभियान का असर अब चारों धामों में दिखाई देने लगा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के आह्वान पर श्रद्धालुओं के साथ ही स्थानीय व्यापारियों और सफाई व्यवस्था से जुड़े विभागों में भी स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ी है। नगर पंचायतों और अन्य संबंधित संस्थाओं की ओर से यात्रा मार्गों एवं धाम क्षेत्रों में लगातार विशेष सफाई अभियान चलाए जा रहे हैं। इस यात्रा सीजन में अब तक चारधाम क्षेत्रों से कुल 798 टन कचरा एकत्रित किया जा चुका है।

 

सरकार का जोर चारों धामों को प्लास्टिक मुक्त बनाने के साथ-साथ एकत्रित कचरे के वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण और प्लास्टिक कचरे को रिसाइकिल करने पर है। केदारनाथ, बद्रीनाथ और गंगोत्री में नगर पंचायतों की ओर से विशेष अभियान चलाकर कचरे को एकत्रित करने, अलग-अलग करने और उसके निस्तारण की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। वहीं, यमुनोत्री में सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी जिला पंचायत के पास है।

 

केदारनाथ में 32 टन सॉलिड वेस्ट एकत्र

 

केदारनाथ धाम नगर पंचायत क्षेत्र में इस यात्रा सीजन के दौरान अब तक 32 टन सॉलिड वेस्ट एकत्रित किया जा चुका है। इसमें करीब 20 टन प्लास्टिक वेस्ट शामिल है। कचरे के बेहतर प्रबंधन के लिए इस वर्ष शहरी विकास विभाग की ओर से धाम क्षेत्र में एक अतिरिक्त कॉम्पेक्टर मशीन भी लगाई गई है। एकत्रित सॉलिड वेस्ट को गौरीकुंड पहुंचाया जा रहा है, जहां इसके बाद नीलामी की प्रक्रिया की जाएगी।

 

केदारनाथ धाम के पैदल यात्रा मार्ग पर सफाई व्यवस्था का प्रबंधन सुलभ इंटरनेशनल की ओर से किया जा रहा है। संस्था द्वारा इस यात्रा सीजन में अब तक 270 टन सॉलिड वेस्ट एकत्र किया जा चुका है। इसमें से साढ़े छह टन प्लास्टिक वेस्ट को रिसाइकिल के लिए भेजा जा चुका है। पैदल मार्ग पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही को देखते हुए सफाई व्यवस्था को लगातार बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है।

 

बद्रीनाथ में 393 टन कचरा जमा

 

बद्रीनाथ धाम में भी कचरा प्रबंधन को लेकर व्यापक स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। इस यात्रा सीजन में अब तक यहां कुल 393 टन कचरा एकत्रित किया जा चुका है, जिसमें 161 टन सूखा कूड़ा शामिल है। बद्रीनाथ नगर पंचायत की ओर से धाम में ही सॉलिड वेस्ट को कॉम्पेक्ट किया जा रहा है। इस प्रक्रिया के दौरान अब तक करीब 24 टन प्लास्टिक वेस्ट अलग किया जा चुका है।

 

बद्रीनाथ धाम में एकत्रित प्लास्टिक कचरे में पानी की बोतलों की मात्रा सबसे अधिक है। अलग किए गए प्लास्टिक वेस्ट को अब नीलामी के लिए तैयार किया जा रहा है, जिससे कचरे के निस्तारण के साथ ही उसके पुनर्चक्रण को भी बढ़ावा मिलेगा।

 

गंगोत्री में प्लास्टिक कचरे से 55 हजार रुपये की आय

 

गंगोत्री धाम में भी नगर पंचायत की ओर से सफाई और पर्यावरण संरक्षण को लेकर लगातार अभियान चलाया जा रहा है। यात्राकाल में अब तक यहां कुल 98 टन कचरा एकत्रित किया जा चुका है। इसमें से 22 टन प्लास्टिक कचरे को रिसाइकिल किया गया है। नगर पंचायत इस प्लास्टिक कचरे के रिसाइकिल से अब तक 55 हजार रुपये की आय अर्जित कर चुकी है।

 

कचरे के बेहतर उपयोग की दिशा में गंगोत्री में जैविक कचरे से खाद तैयार करने का कार्य भी किया जा रहा है। अब तक करीब ढाई टन खाद तैयार की जा चुकी है। धाम क्षेत्र में स्वच्छता बनाए रखने के लिए नगर पंचायत की ओर से प्रतिदिन विशेष सफाई अभियान संचालित किया जा रहा है।

 

यमुनोत्री में 4.85 टन प्लास्टिक कचरे का निस्तारण

 

यमुनोत्री धाम में भी प्लास्टिक कचरे के निस्तारण को लेकर अभियान चलाया जा रहा है। यात्रा क्षेत्र से अब तक 4.85 टन प्लास्टिक कचरा एकत्रित कर उसका सुरक्षित निस्तारण किया गया है। इसमें 1790 किलो प्लास्टिक कचरा जानकीचट्टी बाजार से ग्रामीण बाजार डामटा तक के क्षेत्र से एकत्र किया गया, जबकि 3060 किलो प्लास्टिक कचरा जानकीचट्टी से खरसाली बाजार क्षेत्र से एकत्रित किया गया है। यमुनोत्री धाम में सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी जिला पंचायत के पास है।

 

श्रद्धालुओं की सहभागिता से ही सफल होगा अभियान

 

राज्य सरकार का मानना है कि चारधाम केवल आस्था और संस्कृति के प्रमुख केंद्र ही नहीं, बल्कि हिमालय की संवेदनशील पारिस्थितिकी का भी महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऐसे में यात्रा के दौरान निकलने वाले प्लास्टिक और अन्य कचरे का उचित प्रबंधन बेहद जरूरी है। सरकार की ओर से श्रद्धालुओं से भी अपील की जा रही है कि वे धाम क्षेत्रों में प्लास्टिक कचरा न फैलाएं और कचरे को निर्धारित स्थानों पर ही डालें।

 

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि चारधाम हमारी आस्था और संस्कृति के साथ-साथ हिमालय की संवेदनशील पारिस्थितिकी का भी हिस्सा हैं। सरकार चारधाम यात्रा को स्वच्छ, सुगम और पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। चारों धामों को प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण और प्लास्टिक कचरे के रिसाइकिल किए जाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस अभियान की सफलता के लिए सरकार के साथ श्रद्धालुओं, स्थानीय लोगों और व्यापारियों की सहभागिता भी जरूरी है।

 

चारधाम यात्रा के दौरान बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या के बीच स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करना सरकार और स्थानीय निकायों के लिए बड़ी चुनौती है। ऐसे में कचरे को स्रोत पर अलग करने, प्लास्टिक को रिसाइकिल करने और जैविक कचरे से खाद तैयार करने जैसे प्रयास पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। चारों धामों में चल रहे इन अभियानों का उद्देश्य यात्रा क्षेत्र की स्वच्छता बनाए रखने के साथ हिमालयी पर्यावरण को प्लास्टिक प्रदूषण से बचाना भी है।

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