पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के विशेष कार्याधिकारी (OSD) से जुड़े ठिकाने पर ईडी की कार्रवाई और नकदी बरामदगी के बाद उत्तराखंड कांग्रेस में सियासी हलचल तेज हो गई है। हरीश रावत ने उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कार्यकारिणी और कांग्रेस कार्यसमिति यानी CWC के पद से इस्तीफा देने का प्रस्ताव रखा है।
हरीश रावत का कहना है कि कांग्रेस का राष्ट्रीय नेतृत्व, खासकर राहुल गांधी, भाजपा सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार लड़ाई लड़ रहा है। ऐसे में पार्टी के किसी नेता या पदाधिकारी से जुड़े विवाद का असर कांग्रेस की इस मुहिम पर नहीं पड़ना चाहिए। इसी नैतिक और सैद्धांतिक आधार पर उन्होंने अपने संगठनात्मक पदों से इस्तीफे की पेशकश की है।
वहीं, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने हरीश रावत का बचाव करते हुए भाजपा पर निशाना साधा है। उनका कहना है कि जिस मामले को लेकर हरीश रावत को घेरा जा रहा है, उस पर करीब 10 साल पहले ही रावत सरकार के समय कार्रवाई हो चुकी थी।
हरीश रावत के इस्तीफे के प्रस्ताव को लेकर कांग्रेस के भीतर अलग-अलग तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। एक ओर इसे नैतिक जिम्मेदारी के तौर पर देखा जा रहा है, तो दूसरी ओर यह सवाल भी उठ रहे हैं कि ईडी की कार्रवाई के बीच रावत का यह कदम पार्टी के भीतर किस तरह की राजनीतिक परिस्थितियां पैदा करेगा।
फिलहाल, हरीश रावत के इस्तीफे के प्रस्ताव ने उत्तराखंड कांग्रेस की सियासत को जरूर गरमा दिया है और आने वाले दिनों में इस पर पार्टी के भीतर और बाहर राजनीतिक बयानबाजी तेज होने की संभावना है।