शिक्षक दिवस पर स्कूल में ही नहीं पहुंचे शिक्षक, ताला बंद कर लौटे बच्चे! चमोली के भलागांव में शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

दोनों शिक्षक अनुपस्थित, शिक्षण कार्य ठप; ग्रामीणों ने कहा- ऐसे कैसे संवरेगा पहाड़ के बच्चों का भविष्य?

चमोली: शिक्षक दिवस के मौके पर जहां देशभर में गुरुजनों के सम्मान में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे थे, वहीं चमोली गढ़वाल के दूरस्थ राजकीय जूनियर हाई स्कूल भलागांव में शिक्षा व्यवस्था की बदहाल तस्वीर सामने आई। 5 सितंबर 2026 को विद्यालय में तैनात दोनों शिक्षक अनुपस्थित रहे, जिसके चलते स्कूल में शिक्षण कार्य ठप रहा। विद्यालय में शिक्षक नहीं पहुंचने से बच्चों और अभिभावकों में भारी नाराजगी है।

ग्रामीणों का आरोप है कि पर्वतीय क्षेत्रों के सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की अनुपस्थिति और विभागीय स्तर पर प्रभावी निगरानी के अभाव का खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। शिक्षक दिवस के दिन ही विद्यालय में शिक्षक नहीं होने की घटना ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कभी एक शिक्षक तो कभी दूसरा, पढ़ाई का कोई ठिकाना नहीं

विद्यालय की कक्षा 6 में पढ़ने वाली छात्रा गुंजन भट्ट ने अपनी परेशानी बयां करते हुए कहा कि स्कूल में कभी एक शिक्षक आते हैं तो कभी दूसरे। हालात ऐसे हैं कि बच्चों को अपने पाठ्यक्रम के विषयों तक की पूरी जानकारी नहीं हो पा रही है। छात्रा की यह बात ग्रामीण सरकारी स्कूलों में शिक्षा की वास्तविक स्थिति को सामने लाती है।

ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों के लिए विद्यालय शिक्षा का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है, लेकिन जब शिक्षक ही नियमित रूप से स्कूल नहीं पहुंचेंगे तो बच्चों की पढ़ाई कैसे आगे बढ़ेगी। दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले अभिभावक अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने की उम्मीद में सरकारी विद्यालयों पर निर्भर हैं।

महिला मंगल दल ने जताया आक्रोश

विद्यालय की स्थिति को लेकर महिला मंगल दल की अध्यक्ष एवं सदस्यों ने भी नाराजगी जताई है। अंजना भट्ट ने कहा कि दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था लगातार कमजोर होती जा रही है। शिक्षकों की कथित मनमानी और विभागीय मॉनिटरिंग की कमी के कारण बच्चों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।

उन्होंने कहा कि गांव के लोग तमाम मुश्किलों के बावजूद अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए स्कूल भेजते हैं, लेकिन विद्यालय में शिक्षक ही उपलब्ध नहीं होंगे तो बच्चों की शिक्षा का स्तर कैसे सुधरेगा।

ग्रामीण महिला सुमन भट्ट समेत अन्य अभिभावकों ने भी बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता जताई। उनका कहना है कि पहाड़ के गांवों में पहले ही शिक्षा के सीमित संसाधन हैं। ऐसे में शिक्षकों की अनुपस्थिति बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ के समान है।

शिक्षक दिवस पर ही व्यवस्था की खुली पोल

ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षक दिवस बच्चों और शिक्षकों के लिए विशेष दिन होता है, लेकिन भलागांव में इसी दिन विद्यालय की व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई। ग्रामीणों के अनुसार विद्यालय में दोनों शिक्षक अनुपस्थित रहे, जिससे बच्चों को पढ़ाई नहीं मिल सकी।

अभिभावकों का कहना है कि यदि शिक्षक किसी अपरिहार्य कारण से विद्यालय नहीं पहुंच पा रहे थे तो विभाग को वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए थी। दूरस्थ विद्यालयों में एक दिन की पढ़ाई बाधित होना भी बच्चों की शिक्षा पर असर डालता है।

पहाड़ के सरकारी स्कूलों में मॉनिटरिंग पर सवाल

भलागांव की घटना ने एक बार फिर पर्वतीय और दूरदराज के सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की उपस्थिति और विभागीय मॉनिटरिंग व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूलों की नियमित निगरानी नहीं होने के कारण कई जगह शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग से मांग की है कि विद्यालय में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए और अनुपस्थित रहने की स्थिति में जिम्मेदारी तय की जाए। साथ ही अधिकारियों से स्कूल की वास्तविक स्थिति का स्थलीय निरीक्षण करने और बच्चों की पढ़ाई सुचारू कराने की मांग की गई है।

अभिभावकों लज्जू देवी, रौशनी देवी, गुड्डी देवी, पुष्पा देवी, सुमन देवी, रीता देवी और अंजना देवी ने कहा कि सरकार दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था सुधारने के दावे करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर तस्वीर अलग नजर आ रही है।

ग्रामीणों का सवाल है कि जब विद्यालय में शिक्षक ही नियमित रूप से उपलब्ध नहीं होंगे, तो पहाड़ के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कैसे मिलेगी? लोगों ने विभाग से तत्काल कार्रवाई कर विद्यालय में नियमित शिक्षण व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।

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