प्रेमनगर पुल पर उठे सवाल: उद्घाटन का इंतजार था या मजबूरी में खोला गया रास्ता?

अस्थायी ह्यूम पाइप पुल टूटने के बाद आनन-फानन में यातायात शुरू, स्थानीय लोगों ने विभाग की कार्यशैली पर उठाए सवाल; पीडब्ल्यूडी ने कहा—यह महज संयोग था

देहरादून। प्रेमनगर में टोंस नदी पर बने पुल को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। पिछले वर्ष भारी बारिश में क्षतिग्रस्त हुए पुल की मरम्मत और रेट्रोफिटिंग का कार्य लगभग एक वर्ष तक चलता रहा। इस दौरान लोक निर्माण विभाग (PWD) लगातार दावा करता रहा कि पुल लगभग तैयार है और जल्द ही यातायात के लिए खोल दिया जाएगा। लेकिन निर्धारित समय बीतने के बावजूद पुल शुरू नहीं किया गया। अब जब मानसून के दौरान बनाया गया अस्थायी ह्यूम पाइप पुल टूट गया, तो विभाग ने मुख्य पुल को तत्काल खोल दिया। इससे स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा तेज हो गई कि यदि पुल पहले से तैयार था तो इसे पहले क्यों नहीं खोला गया।

सितंबर 2025 में क्षतिग्रस्त हुआ था पुल

15 और 16 सितंबर 2025 को हुई भारी बारिश के दौरान प्रेमनगर स्थित टोंस नदी पर बने पुल का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था। सुरक्षा कारणों से पुल पर आवागमन पूरी तरह बंद कर दिया गया। इसके बाद स्थानीय लोगों की सुविधा के लिए नदी के भीतर ह्यूम पाइप आधारित अस्थायी पुल बनाया गया, जिससे यातायात संचालित होता रहा।

लोक निर्माण विभाग ने उस समय दावा किया था कि मुख्य पुल को दोबारा बनाने की आवश्यकता नहीं है। केवल क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत और रेट्रोफिटिंग कर इसे पहले से अधिक मजबूत बनाया जाएगा तथा निर्माण कार्य जल्द पूरा कर लिया जाएगा।

समय बीतता गया, लेकिन नहीं खुला पुल

निर्माण कार्य लंबा खिंचने के कारण स्थानीय लोगों में असंतोष बढ़ता गया। विभाग की ओर से बाद में यह भी कहा गया कि पुल का लगभग 99 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और इसे 10 जुलाई 2026 तक यातायात के लिए खोल दिया जाएगा। निर्धारित तिथि बीतने के बाद भी पुल चालू नहीं हुआ।

जब अधिकारियों से देरी का कारण पूछा गया तो उनका कहना था कि निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और केवल उद्घाटन एवं औपचारिक कार्यक्रम की तिथि तय होना बाकी है।

अस्थायी पुल टूटा तो बदल गई स्थिति

11 जुलाई की देर रात लगातार बारिश के कारण टोंस नदी पर बनाया गया अस्थायी ह्यूम पाइप पुल क्षतिग्रस्त होकर टूट गया। इससे पूरे क्षेत्र में यातायात बाधित हो गया और लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए लोक निर्माण विभाग ने मुख्य पुल को तत्काल यातायात के लिए खोल दिया। इसके बाद क्षेत्र में आवागमन सामान्य हो गया, लेकिन इसी के साथ सवाल भी उठने लगे कि यदि पुल पहले से सुरक्षित और तैयार था तो उसे पहले क्यों नहीं खोला गया।

स्थानीय लोगों ने उठाए सवाल

स्थानीय निवासी राहुल राजपूत का कहना है कि पुल पूरी तरह तैयार होने से पहले ही खोल दिया गया है और अभी भी कुछ हिस्सों में निर्माण कार्य जारी है। उनका आरोप है कि यदि अस्थायी पुल नहीं टूटता तो संभवतः मुख्य पुल अभी भी उद्घाटन की प्रतीक्षा में बंद रहता।

वहीं नियमित यात्री शुभम का कहना है कि पिछले एक वर्ष के दौरान अस्थायी पुल कई बार क्षतिग्रस्त हुआ और बरसात में उस पर सफर करना जोखिम भरा था। उनका आरोप है कि मुख्य पुल के केवल एक हिस्से को नुकसान पहुंचा था, फिर भी उसकी मरम्मत में लगभग एक वर्ष लग गया।

स्थानीय लोगों का दावा है कि अस्थायी पुल टूटने के बाद रातों-रात मशीनें लगाकर मुख्य पुल पर शेष कार्य पूरा किया गया और जल्दबाजी में यातायात शुरू कराया गया।

पीडब्ल्यूडी ने बताया महज संयोग

लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता राजेश शर्मा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पुल की भार क्षमता का परीक्षण और तकनीकी मूल्यांकन अंतिम चरण में था। उनके अनुसार, मुख्य पुल पूरी तरह तैयार था और केवल कुछ फिनिशिंग कार्य तथा नदी संरक्षण (रिवर प्रोटेक्शन) से जुड़े कार्य शेष थे, जिन्हें बाद में भी पूरा किया जा सकता था।

उन्होंने कहा कि जिस दिन अस्थायी पुल क्षतिग्रस्त हुआ, उसी दिन मुख्य पुल का यातायात के लिए खुलना केवल एक संयोग था, न कि किसी प्रकार की मजबूरी।

अब भी बाकी हैं कई सवाल

हालांकि पुल पर यातायात बहाल होने से स्थानीय लोगों को राहत जरूर मिली है, लेकिन पूरे घटनाक्रम ने विभागीय कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि पुल तकनीकी रूप से पहले से तैयार था तो उद्घाटन की औपचारिकताओं के कारण उसे बंद क्यों रखा गया? और यदि अभी भी निर्माण कार्य शेष था तो उसे तत्काल यातायात के लिए खोलने का निर्णय किस आधार पर लिया गया?

इन सवालों के बीच प्रेमनगर पुल का मुद्दा अब केवल निर्माण कार्य तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह सरकारी परियोजनाओं में समयबद्धता, पारदर्शिता और निर्णय प्रक्रिया पर भी बहस का विषय बन गया है।

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