कांग्रेस के ‘कमांडर’ की चुनावी फौज लापता, मिशन 2027 से पहले संगठनात्मक चुनौती

देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में विधानसभा चुनाव 2027 की आहट तेज हो चुकी है। सत्तारूढ़ भाजपा जहां चुनावी तैयारियों को लेकर पूरी तरह सक्रिय दिखाई दे रही है, वहीं मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस अभी भी अपने संगठनात्मक ढांचे को पूर्ण रूप देने की चुनौती से जूझ रही है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल संगठन को मजबूत करने के लिए लगातार सक्रिय हैं। वे कार्यकर्ताओं के साथ संवाद, बैठकों और राजनीतिक कार्यक्रमों के माध्यम से पार्टी को मजबूती देने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि पार्टी की प्रदेश कार्यकारिणी का गठन अभी तक पूरा नहीं हो पाया है।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि चुनावी तैयारियों के इस महत्वपूर्ण दौर में कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने संगठन को पूर्ण रूप से खड़ा करने की है। प्रदेश उपाध्यक्षों, महामंत्रियों, विभिन्न विभागों और प्रकोष्ठों की जिम्मेदारियों सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर अभी अंतिम निर्णय होना बाकी है।

दूसरी ओर भाजपा संगठनात्मक स्तर पर बूथ समितियों, शक्ति केंद्रों, पन्ना प्रमुखों और लाभार्थी संपर्क अभियानों के जरिए चुनावी तैयारी को धार देने में जुटी हुई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार प्रदेशभर में दौरे कर रहे हैं, जबकि पार्टी नेतृत्व संगठन को मजबूत बनाने के लिए विभिन्न स्तरों पर बैठकें आयोजित कर रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव केवल मुद्दों के आधार पर नहीं जीते जाते, बल्कि मजबूत संगठनात्मक नेटवर्क भी जीत का महत्वपूर्ण आधार होता है। बूथ स्तर तक सक्रिय कार्यकर्ता, चुनावी प्रबंधन टीम, सोशल मीडिया नेटवर्क और प्रभावी संगठन किसी भी दल की चुनावी सफलता में अहम भूमिका निभाते हैं।

वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने स्पष्ट बहुमत हासिल कर लगातार दूसरी बार सरकार बनाई थी, जबकि कांग्रेस अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सकी थी। ऐसे में 2027 में सत्ता में वापसी का लक्ष्य लेकर चल रही कांग्रेस के लिए संगठनात्मक मजबूती सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गई है।

हालांकि कांग्रेस बेरोजगारी, महंगाई, पेपर लीक, पलायन, स्वास्थ्य सेवाओं और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर सरकार को लगातार घेर रही है, लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन मुद्दों को चुनावी सफलता में बदलने के लिए मजबूत संगठनात्मक संरचना का होना जरूरी है।

कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच भी यह सवाल लगातार उठ रहा है कि प्रदेश कार्यकारिणी का विस्तार कब होगा और चुनावी जिम्मेदारियां किस प्रकार तय की जाएंगी। क्योंकि संगठन के पूर्ण गठन के बाद ही पार्टी विधानसभा स्तर पर अपनी रणनीति को अधिक प्रभावी तरीके से लागू कर पाएगी।

आने वाले महीनों में कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी परीक्षा अपने संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं में ऊर्जा का संचार करने की होगी। 2027 का चुनाव केवल चेहरों का नहीं, बल्कि संगठन की ताकत, रणनीति और जमीनी सक्रियता का भी चुनाव माना जा रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *