आपदा में क्षतिग्रस्त स्कूलों की तुरंत रिपोर्ट दें: शिक्षा मंत्री

देहरादून, उत्तराखंड के विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने मंगलवार को विद्यालयी शिक्षा महानिदेशालय में आपदा प्रभावित क्षेत्रों की समीक्षा बैठक की। बैठक में उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि आपदा से प्रभावित या क्षतिग्रस्त स्कूलों की सूचना तत्काल आपदा कंट्रोल रूम को दी जाए, ताकि बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा में कोई व्यवधान न हो।

बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि

डॉ. रावत ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आपदा संभावित क्षेत्रों में स्थित विद्यालयों के छात्रों को निकटवर्ती सुरक्षित स्कूलों में स्थानांतरित किया जाए। उन्होंने कहा कि, “बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है। इस संकट की घड़ी में हमें संवेदनशील और सक्रिय रहकर कार्य करना होगा।”

नोडल अधिकारी और टोल फ्री नंबर की व्यवस्था

शिक्षा मंत्री ने विद्यालयी शिक्षा महानिदेशक को निर्देशित किया कि हर जनपद में एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति की जाए, जो आपदाग्रस्त क्षेत्रों में स्कूलों की स्थिति पर लगातार निगरानी रखे और राहत कार्यों में सहयोग करे।

साथ ही उन्होंने विभागीय अधिकारियों से एक टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर तत्काल सक्रिय करने को कहा, ताकि सूचनाओं के आदान-प्रदान में कोई दिक्कत न हो और स्कूल प्रशासन, शिक्षक तथा अभिभावक आसानी से संपर्क कर सकें।

दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष व्यवस्था

डॉ. रावत ने बैठक में यह भी निर्देश दिए कि दिव्यांग छात्रों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए अलग से विशेष और समुचित व्यवस्था की जाए। किसी भी स्थिति में इस वर्ग के बच्चों की शिक्षा को लेकर लापरवाही न बरती जाए।

शिक्षकों के लिए दिशा-निर्देश

शिक्षकों को भी स्पष्ट निर्देश दिए गए कि वे अपने-अपने विद्यालयों के पास ही निवास करें ताकि आपातकालीन स्थिति में वे तुरंत उपलब्ध रह सकें। उन्होंने अधिकारियों को सख्त हिदायत दी कि इन नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाए।

उच्चस्तरीय अधिकारी रहे मौजूद

बैठक में महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा दीप्ति सिंह, निदेशक SCERT वंदना गर्ब्याल, निदेशक बेसिक शिक्षा अजय कुमार नौडियाल, निदेशक माध्यमिक शिक्षा डॉ. मुकुल सती, अपर निदेशक पदमेन्द्र सकलानी समेत कई अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

डॉ. रावत ने अंत में कहा कि बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा को लेकर कोई भी समझौता नहीं किया जाएगा। सभी अधिकारी पूरी तत्परता और सजगता से कार्य करें, ताकि आपदा के समय भी शिक्षा व्यवस्था प्रभावित न हो।

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