देहरादून। वित्तीय वर्ष 2026-27 में उत्तराखंड सरकार के सामने राजस्व लक्ष्य हासिल करने की चुनौती बनी हुई है। विभागवार राजस्व वसूली की समीक्षा में सामने आया है कि राज्य ने अब तक कुल वार्षिक लक्ष्य का करीब 26 प्रतिशत राजस्व ही जुटाया है। वहीं, कुछ प्रमुख विभागों की वसूली अपेक्षाकृत बेहतर है तो खनन और ऊर्जा विभाग के कुछ मदों में राजस्व प्राप्ति की रफ्तार धीमी बनी हुई है।
सरकार ने राजस्व बढ़ाने के लिए पुराने बकाये की वसूली, नए राजस्व स्रोत तलाशने, डिजिटल निगरानी बढ़ाने और विभागों के बीच डेटा साझा करने पर जोर दिया है।
67,526 करोड़ के लक्ष्य में अब तक 17,743 करोड़ की प्राप्ति
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए उत्तराखंड सरकार ने कुल 67,526 करोड़ रुपये राजस्व प्राप्ति का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके मुकाबले अब तक 17,743 करोड़ रुपये, यानी करीब 26 प्रतिशत राजस्व प्राप्त हुआ है।
वहीं, राज्य के अपने राजस्व का वार्षिक लक्ष्य 25,219 करोड़ रुपये रखा गया है। इसके मुकाबले अब तक 8,299 करोड़ रुपये, यानी करीब 32 प्रतिशत की प्राप्ति हुई है।
स्टाम्प-रजिस्ट्रेशन में 37 प्रतिशत वसूली
विभागवार आंकड़ों में स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग की राजस्व प्राप्ति 37 प्रतिशत रही है। विभाग का वार्षिक लक्ष्य 3,092 करोड़ रुपये है, जिसके मुकाबले 1,143 करोड़ रुपये की प्राप्ति हुई है।
समीक्षा में बताया गया कि कुल रजिस्टर्ड दस्तावेजों की संख्या में करीब 5 से 6 प्रतिशत की गिरावट आई है। इसके बावजूद सर्किल दरों में संशोधन के बाद राजस्व संग्रह में वृद्धि दर्ज की गई।
राजस्व बढ़ाने के लिए स्टाम्प अधिनियम की विभिन्न धाराओं की समीक्षा और अगले तीन से पांच महीनों में वर्चुअल रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। समान नागरिक संहिता पोर्टल और सब रजिस्ट्रार कार्यालयों के बीच डेटा समन्वय स्थापित कर वसीयत पंजीकरण को आसान बनाने की तैयारी भी है।
SGST में 31 प्रतिशत राजस्व प्राप्त
राज्य कर विभाग के SGST का वार्षिक लक्ष्य 12,200 करोड़ रुपये है। 31 जुलाई तक इसके मुकाबले 3,830 करोड़ रुपये, यानी 31 प्रतिशत राजस्व प्राप्त हुआ।
नॉन-GST यानी VAT में 2,652 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 1,020 करोड़ रुपये, यानी 38 प्रतिशत की प्राप्ति हुई है।
सरकार ने विभाग को राजस्व के ऐसे संभावित स्रोतों की पहचान करने के निर्देश दिए हैं, जहां अभी पूरी तरह कर संग्रह नहीं हो पा रहा है। इसके लिए AI आधारित इंटेलिजेंस सॉफ्टवेयर विकसित करने की योजना है। इसमें बिजली खपत, रियल एस्टेट और इनकम टैक्स समेत विभिन्न डेटा का इस्तेमाल कर संभावित टैक्स गैप की पहचान की जा सकेगी।
आबकारी विभाग को 30 प्रतिशत राजस्व, 355 करोड़ पुराना बकाया
आबकारी विभाग का वार्षिक लक्ष्य 5,384 करोड़ रुपये है। इसके मुकाबले 1,623 करोड़ रुपये, यानी करीब 30 प्रतिशत राजस्व प्राप्त हुआ है। विभाग की करीब 98 प्रतिशत आबकारी दुकानों का नवीनीकरण भी पूरा हो चुका है।
हालांकि, वर्ष 2016-17 से करीब 355 करोड़ रुपये का पुराना बकाया वसूली के लिए लंबित है। मुख्य सचिव ने इस राशि की वसूली सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
परिवहन विभाग में 31 प्रतिशत वसूली
परिवहन विभाग का वार्षिक राजस्व लक्ष्य 1,703 करोड़ रुपये है। इसके मुकाबले अब तक 530 करोड़ रुपये, यानी 31 प्रतिशत राजस्व प्राप्त हुआ है।
विभाग के अनुसार इलेक्ट्रिक वाहनों पर दी जा रही सब्सिडी के कारण करीब 74 करोड़ रुपये की राजस्व हानि हो रही है। इसे देखते हुए लग्जरी वाहनों पर सब्सिडी को चरणबद्ध तरीके से कम करने या समाप्त करने का प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया है।
वहीं, बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों से शत-प्रतिशत ग्रीन सेस वसूली सुनिश्चित करने के लिए सभी एंट्री प्वाइंट को ANPR कैमरों से जोड़ने के निर्देश दिए गए हैं।
खनन विभाग की वसूली 18 प्रतिशत
राजस्व प्राप्ति के आंकड़ों में खनन विभाग की स्थिति सरकार के लिए चुनौती बनी हुई है। विभाग का वार्षिक लक्ष्य 1,500 करोड़ रुपये है, जबकि जुलाई के अंत तक केवल 267 करोड़ रुपये, यानी 18 प्रतिशत राजस्व प्राप्त हुआ।
खनन रॉयल्टी दरों में लंबे समय से संशोधन नहीं हुआ था। अब दरों में बढ़ोतरी की गई है। सरकार को उम्मीद है कि संशोधित दरों से आगे राजस्व संग्रह में वृद्धि होगी।
मुख्य सचिव ने वन और गैर-वन क्षेत्रों में नए खनन लॉट चिह्नित करने में जिला प्रशासन को सहयोग देने के निर्देश दिए हैं। चंद्रभागा खनन लीज से जुड़े प्रत्यावेदन को न्यायालय के आदेश के अनुसार 15 दिन में निस्तारित करने और SASCI के तहत प्रस्तावित माइनिंग सेक्टर रिफॉर्म को जल्द लागू करने को भी कहा गया है।
ऊर्जा विभाग के करेत्तर राजस्व की रफ्तार धीमी
ऊर्जा विभाग में कर राजस्व का लक्ष्य 550 करोड़ रुपये है, जिसके मुकाबले 122 करोड़ रुपये, यानी 22 प्रतिशत प्राप्त हुए हैं।
वहीं, करेत्तर राजस्व का लक्ष्य भी 550 करोड़ रुपये है, लेकिन इसमें अब तक केवल 40 करोड़ रुपये, यानी 7 प्रतिशत की प्राप्ति हुई है।
समीक्षा में बताया गया कि उच्च न्यायालय के आदेश के बाद CPSES और निजी डेवलपर्स की ओर से वाटर टैक्स देना बंद किए जाने से राजस्व प्रभावित हुआ है। इसकी भरपाई के लिए इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया है। साथ ही जनता पर अतिरिक्त बोझ न पड़े, इसका ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं।
वन विभाग में नए राजस्व स्रोत तलाशने पर जोर
वन विभाग के लिए 752 करोड़ रुपये का राजस्व लक्ष्य निर्धारित किया गया है। बैठक में लीसा निष्कर्षण से जुड़े राजस्व और लागत पर भी चर्चा हुई। बताया गया कि इससे मिलने वाले राजस्व की तुलना में श्रम और परिचालन लागत अधिक है।
ऐसे में विभाग को अधिक राजस्व की संभावनाएं तलाशने के लिए नवाचार आधारित पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
चार खनन लॉट के नवीनीकरण प्रस्ताव पोर्टल पर दर्ज
गंगा समेत अन्य नदियों के चार खनन लॉट के नवीनीकरण प्रस्ताव परिवेश पोर्टल पर दर्ज किए जा चुके हैं। गोला, नंधौर और दाबका में खनन नवीनीकरण और पर्यावरणीय मंजूरी से जुड़े कार्यों के लिए कंसल्टेंट नियुक्त किया गया है।
वन निगम को भी समय पर खनन लॉट उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है, ताकि उनसे राजस्व प्राप्त किया जा सके।
पर्यटन से राजस्व बढ़ाने पर भी जोर
राज्य में राजस्व के नए स्रोत तलाशने के बीच पर्यटन क्षेत्र से आय बढ़ाने की संभावनाओं पर भी जोर दिया गया है। वरिष्ठ पत्रकार नरेंद्र सेठी के अनुसार उत्तराखंड में पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए पर्यटन से जुड़े राजस्व के नए विकल्प विकसित किए जा सकते हैं।
उनका कहना है कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों और पर्यटन क्षमता को ध्यान में रखते हुए ऐसी नीतियां तैयार करने की जरूरत है, जिनसे राज्य की राजस्व प्राप्ति बढ़ाने में मदद मिल सके।
सरकार का फोकस नए स्रोत और डिजिटल निगरानी पर
कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी के अनुसार राज्य सरकार का प्रयास प्रदेश के राजस्व को बढ़ाना है। खनन और आबकारी समेत विभिन्न विभागों में राजस्व बढ़ाने के लिए नए लक्ष्य और विकल्पों पर काम किया जा रहा है।
वित्तीय वर्ष 2026-27 के शुरुआती आंकड़ों से स्पष्ट है कि विभागों की राजस्व वसूली की रफ्तार अलग-अलग है। स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग में 37 प्रतिशत वसूली के मुकाबले खनन में 18 प्रतिशत और ऊर्जा के करेत्तर राजस्व में महज 7 प्रतिशत प्राप्ति हुई है।
अब सरकार का जोर बकाया वसूली, नए राजस्व स्रोतों की तलाश, डिजिटल निगरानी और विभागीय डेटा के बेहतर इस्तेमाल के जरिए राजस्व संग्रह बढ़ाने पर है।