देहरादून। उत्तराखंड में 1,320 मेगावाट की कोयला आधारित बिजली खरीद को लेकर कांग्रेस और भाजपा सरकार के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस ने अदाणी पावर से प्रस्तावित दीर्घकालिक बिजली खरीद की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए टेंडर की शर्तों में बदलाव के आरोप लगाए हैं। वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बिजली की जरूरतों को देखते हुए पूरी प्रक्रिया नियमों के तहत अपनाई गई है।
मामले को लेकर कांग्रेस ने 17 सितंबर को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार से कई सवाल पूछे थे। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने दावा किया कि टेंडर की 86 में से 84 शर्तों में बदलाव किए गए। पार्टी ने यह भी सवाल उठाया कि उत्तराखंड की जरूरत के लिए प्रस्तावित परियोजना छत्तीसगढ़ में क्यों स्थापित की जा रही है।
सीएम धामी बोले- कांग्रेस के पास कोई मुद्दा नहीं
शुक्रवार को देहरादून में मीडिया से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कांग्रेस के आरोपों पर जवाब दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की ओर से उठाए जा रहे मुद्दे झूठ पर आधारित हैं और उनके पास सरकार को घेरने के लिए ठोस मुद्दे नहीं हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की दीर्घकालिक बिजली जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। सरकार के अनुसार प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के जरिए बिजली खरीद का रास्ता अपनाया गया है। उत्तराखंड सरकार के ऊर्जा विभाग ने भी कांग्रेस के 84 शर्तें बदलने के आरोप को खारिज किया है और कहा है कि प्रक्रिया टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली के तहत हुई।
कांग्रेस ने टेंडर की 86 में से 84 शर्तों पर उठाए सवाल
कांग्रेस का आरोप है कि मूल निविदा प्रक्रिया में बड़े बदलाव किए गए। पार्टी के मुताबिक परियोजना को उत्तराखंड में स्थापित करने की बाध्यता हटाकर देश के किसी भी हिस्से में स्थापित करने का प्रावधान किया गया और 1,320 मेगावाट बिजली एक ही बोलीदाता से लेने की व्यवस्था की गई।
कांग्रेस ने फिक्स्ड चार्ज, परियोजना की समयसीमा और दूसरे राज्य से बिजली लाने की ट्रांसमिशन लागत समेत कई प्रावधानों पर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी ने सरकार से पूरी निविदा प्रक्रिया सार्वजनिक करने और स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग की है।
सरकार का तर्क- पहले प्रस्तावित सरकारी परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी
सरकार की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण के मुताबिक, पहले UJVNL और THDC के संयुक्त उपक्रम के जरिए ताप विद्युत परियोजना स्थापित करने का प्रस्ताव था। ऊर्जा विभाग के अनुसार THDC, जो NTPC की सहायक कंपनी है, को ताप विद्युत उत्पादन की अनुमति नहीं मिलने के कारण यह प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका। इसके बाद निजी कंपनी के माध्यम से टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली की प्रक्रिया अपनाई गई।
बिजली खरीद को लेकर सरकार और कांग्रेस के दावे अलग
कांग्रेस का कहना है कि इस प्रक्रिया से लंबे समय में उत्तराखंड के बिजली उपभोक्ताओं पर वित्तीय बोझ बढ़ सकता है। पार्टी ने 25 साल की बिजली खर