देहरादून। उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय (UTU) के आंतरिक परीक्षा पेपर लीक मामले की जांच अब और गहराती जा रही है। मामले में गिरफ्तार असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. आशीष कुमार गुप्ता की भूमिका की परतें खोलने में जुटी देहरादून पुलिस अब उनके पिछले करीब 16 वर्षों के शैक्षणिक रिकॉर्ड और परीक्षा संबंधी कार्यों की भी जांच कर रही है। जांच एजेंसियों को आशंका है कि वर्तमान मामला कोई अकेली घटना नहीं हो सकता और पूर्व में आयोजित कुछ परीक्षाओं की गोपनीयता भी भंग हुई हो सकती है।
इसी संभावना को देखते हुए वर्ष 2010 से अब तक डॉ. गुप्ता द्वारा तैयार किए गए विभिन्न प्रश्नपत्रों और परीक्षा प्रक्रियाओं को जांच के दायरे में लाया गया है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कहीं पहले भी प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाओं में उनकी कोई भूमिका तो नहीं रही।
कई संस्थानों में रहा लंबा शैक्षणिक सफर
पुलिस जांच में सामने आया है कि डॉ. आशीष कुमार गुप्ता वर्ष 2010 से लगातार उत्तराखंड के विभिन्न निजी इंजीनियरिंग संस्थानों में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में कार्यरत रहे। इस दौरान उन्हें कई बार उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय की परीक्षाओं के लिए प्रश्नपत्र तैयार करने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई।
जांच के अनुसार उनका शैक्षणिक कार्यकाल इस प्रकार रहा—
मार्च 2010 से जुलाई 2013 – डीआईटी यूनिवर्सिटी
अगस्त 2013 से सितंबर 2018 – जेबीआईटी संस्थान
सितंबर 2018 से जुलाई 2019 – उत्तरांचल यूनिवर्सिटी
जुलाई 2019 से जुलाई 2026 – शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग
पुलिस का मानना है कि शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से जुड़ने के बाद उनकी भूमिका विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रणाली में और अधिक महत्वपूर्ण हो गई थी। इसी दौरान उन्हें कई गोपनीय प्रश्नपत्र तैयार करने की जिम्मेदारी भी मिली।
डिजिटल साक्ष्यों की हो रही फॉरेंसिक जांच
जांच एजेंसियां अब आरोपी प्रोफेसर के मोबाइल फोन, लैपटॉप, ई-मेल, व्हाट्सएप चैट, क्लाउड डेटा और अन्य डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच करा रही हैं। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि प्रश्नपत्र किस माध्यम से लीक किया गया, किन लोगों तक पहुंचा और इस पूरे नेटवर्क में कितने लोग शामिल थे।
जांच का मुख्य उद्देश्य यह भी है कि कहीं पेपर लीक का कोई संगठित नेटवर्क तो सक्रिय नहीं था, जो लंबे समय से परीक्षा प्रणाली की गोपनीयता को प्रभावित कर रहा हो।
पुरानी परीक्षाओं की भी होगी जांच
पुलिस सूत्रों के अनुसार, केवल मौजूदा मामले की जांच तक सीमित रहने के बजाय अब पिछले वर्षों में आयोजित उन परीक्षाओं की भी समीक्षा की जाएगी, जिनके प्रश्नपत्र डॉ. गुप्ता ने तैयार किए थे। यदि जांच में किसी अन्य परीक्षा में भी अनियमितता या गोपनीयता भंग होने के प्रमाण मिलते हैं तो उन मामलों में भी अलग से कार्रवाई की जा सकती है।
कॉलेज ने सेवा समाप्त की, विश्वविद्यालय ने लगाया प्रतिबंध
पेपर लीक मामले में गिरफ्तारी के बाद शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग ने डॉ. आशीष कुमार गुप्ता की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी हैं।
कॉलेज के निदेशक प्रो. टी.एस. सिद्धू ने बताया कि नियमानुसार नोटिस जारी करने के बाद प्रोफेसर को बर्खास्त कर दिया गया है। वहीं उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए उन्हें अगले सात वर्षों तक विश्वविद्यालय की सभी परीक्षा संबंधी गतिविधियों से प्रतिबंधित कर दिया है।
साथ ही विश्वविद्यालय ने परीक्षा गोपनीयता में लापरवाही को लेकर शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग को भी चेतावनी जारी की है।
परीक्षा नियंत्रक की शिकायत पर दर्ज हुआ मुकदमा
इस मामले में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक डॉ. विनय कुमार पटेल की लिखित शिकायत पर देहरादून के प्रेमनगर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया।
शिकायत में बताया गया कि 7 और 8 जुलाई को आयोजित होने वाली आंतरिक परीक्षाओं के लिए डॉ. आशीष कुमार गुप्ता को प्रश्नपत्र तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी। आरोप है कि उन्होंने परीक्षा की गोपनीयता भंग करते हुए कुछ लोगों को अनुचित लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से प्रश्नपत्र लीक कर दिया।
एसएसपी बोले- नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भी होगी पहचान
देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेंद्र डोबाल ने कहा कि शिकायत मिलने के बाद तत्काल मुकदमा दर्ज कर मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया।
उन्होंने बताया कि पुलिस अब पूरे मामले की गहन जांच कर रही है। यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति, छात्र, बिचौलिए या संस्थान की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इन विषयों के प्रश्नपत्र हुए थे लीक
प्रारंभिक जांच के अनुसार पेपर लीक का मामला “मशीन लर्निंग फॉर इंटरनेट ऑफ थिंग्स” तथा “इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड थ्योरी” विषयों की आंतरिक परीक्षाओं से जुड़ा है।
बताया जा रहा है कि परीक्षा आयोजित होने से पहले ही दोनों विषयों के प्रश्नपत्र कुछ छात्रों तक पहुंच गए थे। मामला सामने आते ही विश्वविद्यालय प्रशासन हरकत में आया और पुलिस को शिकायत दी गई।
पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी पुलिस
फिलहाल पुलिस डिजिटल साक्ष्यों, फॉरेंसिक रिपोर्ट और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के आधार पर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में लगी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि यह केवल एक परीक्षा तक सीमित मामला था या पिछले कई वर्षों से प्रश्नपत्र लीक का कोई संगठित तंत्र सक्रिय था।
यदि जांच में पुराने मामलों के प्रमाण मिलते हैं तो UTU की कई पूर्व परीक्षाओं की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं और जांच का दायरा और व्यापक हो सकता है।