कोटद्वार ‘मोहम्मद दीपक’ विवाद पर सीएम धामी का कांग्रेस पर हमला, बोले “वोट बैंक के लिए देवभूमि की पहचान से समझौता”

मुख्यमंत्री ने तुष्टीकरण की राजनीति पर साधा निशाना, कांग्रेस नेताओं के समर्थन पर उठाए सवाल

देहरादून।
कोटद्वार में दुकान के नाम को लेकर उपजे विवाद और ‘मोहम्मद’ दीपक प्रकरण पर अब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का बयान सामने आया है। मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे पर कांग्रेस को निशाने पर लेते हुए कहा कि वोट बैंक की राजनीति के लिए कांग्रेस किसी भी हद तक जा सकती है और “देवभूमि की पहचान” से भी समझौता कर सकती है।

एक सार्वजनिक कार्यक्रम में बोलते हुए सीएम धामी ने कहा कि नाम बदलने और पहचान से जुड़े मामलों को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। उन्होंने तुष्टीकरण की राजनीति पर हमला बोलते हुए कहा कि ऐसे मामलों में कुछ दल जानबूझकर समर्थन देकर भ्रम की स्थिति पैदा कर रहे हैं।

कांग्रेस नेताओं के समर्थन पर उठाए सवाल

मुख्यमंत्री ने बिना नाम लिए कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर भी कटाक्ष किया और कहा कि कुछ नेता बिना पूरे तथ्य जाने हर मुद्दे में कूद पड़ते हैं और ट्वीट के जरिए राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की राजनीति समाज में अनावश्यक विभाजन पैदा करती है।

“कांग्रेस अपने वोट बैंक के लिए किसी भी हद तक जा सकती है. वो देवभूमि की पहचान से भी समझौता कर सकती है. ऐसी ताकतों को पनपने नहीं दिया जाएगा.”
— पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड

क्या है पूरा कोटद्वार मामला?

पौड़ी जिले के कोटद्वार में एक कपड़े की दुकान के नाम को लेकर विवाद सामने आया था। जानकारी के अनुसार, एक मुस्लिम कारोबारी की दुकान के नाम में “बाबा” शब्द होने पर कुछ संगठनों के कार्यकर्ताओं ने आपत्ति जताई थी।

इसी दौरान पास में मौजूद जिम संचालक दीपक कुमार ने कथित रूप से दुकान मालिक के समर्थन में विरोध दर्ज कराया। चर्चा में यह भी सामने आया कि उन्होंने अपना नाम “मोहम्मद दीपक” बताया, जिसके बाद यह मामला सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया।

राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा मामला

इस प्रकरण को लेकर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी दीपक के समर्थन में बयान दिए थे, जिसके बाद यह मुद्दा राज्य से निकलकर राष्ट्रीय राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया।

राजनीतिक बनाम सामाजिक बहस

जहां एक पक्ष इसे अभिव्यक्ति और पहचान की स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहा है, वहीं दूसरा पक्ष इसे धार्मिक भावनाओं और सामाजिक संवेदनशीलता से जोड़ रहा है। ऐसे में यह मुद्दा अब कानून-व्यवस्था, सामाजिक सौहार्द और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच संतुलन का विषय बन गया है।

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