देहरादून। अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर गठित अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा की गई CBI जांच की सिफारिश की घोषणा को अस्पष्ट और भ्रमित करने वाला करार दिया है। मंच का कहना है कि सरकार की यह घोषणा न तो अंकिता के माता-पिता की अपेक्षाओं के अनुरूप है और न ही पिछले तीन वर्षों से आंदोलनरत उत्तराखंड की जनता की मांगों को पूरी तरह संबोधित करती है।
शनिवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंच के पदाधिकारियों ने कहा कि सरकार की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि CBI जांच किन बिंदुओं पर होगी, उसकी समय-सीमा क्या होगी और जांच किस निगरानी तंत्र के तहत की जाएगी। मंच ने आरोप लगाया कि सरकार का यह निर्णय जनभावनाओं को शांत करने का प्रयास भर प्रतीत होता है।
हाईकोर्ट की निगरानी में CBI जांच की मांग
मंच ने दोहराया कि उनकी प्रमुख मांग है कि CBI जांच हाईकोर्ट की निगरानी में कराई जाए, ताकि जांच की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर कोई सवाल न उठे। इसके साथ ही मंच ने मांग की कि जांच के सभी बिंदुओं को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाए और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी एवं जवाबदेह हो।
मंच ने कहा कि इस हत्याकांड के पीछे जिन कथित VIPs की भूमिका बताई जा रही है, उनकी पहचान सार्वजनिक की जाए और दोष सिद्ध होने पर उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। मंच का आरोप है कि अब तक जांच को जानबूझकर सीमित दायरे में रखा गया है।
सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति
संयुक्त संघर्ष मंच ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर सरकार की ओर से स्पष्ट और आधिकारिक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। मंच ने आंदोलन को और तेज करने की घोषणा करते हुए कहा कि:
10 जनवरी को देहरादून में मशाल जुलूस निकाला जाएगा
11 जनवरी को उत्तराखंड बंद का आह्वान किया गया है
मंच का कहना है कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल के लिए नहीं, बल्कि अंकिता को न्याय दिलाने और प्रदेश की बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए है।
न्याय तक संघर्ष जारी रहेगा
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंच के सदस्यों ने कहा कि तीन साल बीत जाने के बावजूद आज भी इस मामले में कई अहम सवाल अनुत्तरित हैं। जब तक हर सवाल का जवाब नहीं मिलता और दोषियों को सजा नहीं मिलती, तब तक उनका संघर्ष सड़क से अदालत तक जारी रहेगा।