बदरीनाथ धाम में शीतकालीन साधना का दौर शुरू, कड़ाके की ठंड में प्रवास को 20 साधु-संतों ने मांगी अनुमति

देहरादून/चमोली – हिमालय की गोद में स्थित बदरीनाथ धाम सदियों से ऋषि-मुनियों और साधु-संतों की तपस्थली रहा है। जैसे ही मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद होते हैं, सामान्य श्रद्धालु जहां वापस लौट जाते हैं, वहीं कई साधक कठोर जलवायु, भारी हिमपात और शून्य से नीचे के तापमान में भी धाम में रहकर ध्यान, तप और साधना करने का संकल्प लेते हैं। इस वर्ष भी ऐसा ही दृश्य देखने को मिल रहा है।

शीतकाल में बदरीनाथ धाम में रहने के लिए कुल 20 लोगों ने आवेदन किया है, जिनमें अधिकांश साधु-संत शामिल हैं। सभी ने धाम की शांत, कठोर और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर वातावरण में साधना करने की इच्छा जताई है।

शीतकाल में बदरीनाथ क्यों बनता है साधना की तपस्थली?

बदरीनाथ धाम समुद्र तल से लगभग 10,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित है।

  • यहां शीतकाल में तापमान –10°C से –20°C तक पहुंच जाता है।

  • कड़ाके की ठंड, घना हिमपात और अत्यंत शांत वातावरण साधना के लिए अद्वितीय माना जाता है।

  • ऋषियों-मुनियों की परंपरा है कि शीतकाल में वे गुफाओं और कुटियाओं में रहकर तपस्या करते हैं।

इसी विरासत को आगे बढ़ाते हुए हर साल साधु-संत धाम में रहने के लिए आवेदन करते हैं।

आम लोगों का प्रवेश पूरी तरह बंद, सुरक्षा तैनाती रहती है कठोर

बदरीनाथ मंदिर के कपाट बंद होने के बाद हनुमान चट्टी से आगे किसी भी आम व्यक्ति को जाने की अनुमति नहीं होती।
सुरक्षा की दृष्टि से—

  • सेना,

  • आईटीबीपी,

  • और बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के कर्मचारी
    पूरे क्षेत्र की निगरानी करते हैं।

कठोर मौसम और भारी बर्फबारी के चलते यहाँ शीतकाल में विशेष सुरक्षा व्यवस्था लागू रहती है।

प्रवास की अनुमति प्रक्रिया कैसे होती है?

जो भी साधु-संत या अन्य व्यक्ति शीतकाल में बदरीनाथ धाम में रहना चाहते हैं, उन्हें तय प्रक्रिया के तहत आवेदन करना होता है।

  • आवेदन ज्योतिर्मठ तहसील प्रशासन के पास जमा किया जाता है।

  • प्रशासन आवेदन को सुरक्षा और सत्यापन हेतु पुलिस कार्यालय भेजता है।

  • दस्तावेजों की जांच, बैकग्राउंड की पुष्टि और व्यक्तिगत सत्यापन के बाद ही अनुमति दी जाती है।

ज्योतिर्मठ के उपजिलाधिकारी चंद्रशेखर वशिष्ठ ने बताया—

“20 लोगों द्वारा प्राप्त आवेदनों को जांच के लिए पुलिस को भेज दिया गया है। सत्यापन के बाद ही उन्हें धाम क्षेत्र में रहने की अनुमति दी जाएगी।”

पिछले वर्ष भी लगभग इतने ही साधकों ने शीतकालीन प्रवास की मंजूरी ली थी।

कठोर मौसम में प्रवास कैसा होता है?

धाम क्षेत्र में रहने वाले साधु—

  • अत्यंत ठंड की मार झेलते हुए गुफाओं या कुटियाओं में रहते हैं

  • भोजन व ईंधन जैसी मूलभूत व्यवस्थाएं पहले से एकत्रित करके रखते हैं

  • कई साधु पूर्ण एकांत में जप, ध्यान, मौन और कठिन तप के लिए यह समय चुनते हैं

कहते हैं कि शीतकाल में बदरीनाथ धाम में व्याप्त गहन निस्तब्धता आध्यात्मिक साधना के लिए श्रेष्ठ मानी जाती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *