देहरादून। उत्तराखंड में नियमितीकरण और समान कार्य–समान वेतन की मांग को लेकर जारी उपनल कर्मियों का आंदोलन रविवार को उस समय शोक में बदल गया, जब जिला निर्वाचन कार्यालय देहरादून में तैनात कनिष्ठ सहायक नीलम डोभाल की आकस्मिक मौत की खबर आई। सात दिनों से चल रहे धरने के बीच नीलम की मृत्यु ने पूरे आंदोलन को झकझोर दिया है। आंदोलनरत कर्मचारियों ने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।
धरना स्थल के लिए निकलते वक्त हुई मौत
सूत्रों के अनुसार नीलम डोभाल रविवार सुबह आंदोलन स्थल के लिए घर से निकल रही थीं, तभी अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी और उनकी मौत हो गई। यह घटना धरना स्थल पर नहीं हुई, लेकिन इसका सीधा प्रभाव आंदोलन पर पड़ा है।
नीलम और उनके पति दोनों उपनल कर्मचारी थे और राज्य स्थापना दिवस के एक दिन बाद से जारी इस आंदोलन में लगातार शामिल थे।
संयुक्त मोर्चा के प्रदेश संयोजक विनोद डोभाल ने दावा किया कि नीलम पिछले कई दिनों से मानसिक तनाव और डिप्रेशन में थीं। उनका कहना है कि सरकार की संवेदनहीनता और लंबी अनिश्चितता ने कर्मचारियों को मनोवैज्ञानिक रूप से तोड़ दिया है। हालांकि, नीलम की मौत के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
कर्मचारी संगठनों ने जताया शोक, सरकार पर आरोप
उपनल महासंघ के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष महेश भट्ट ने नीलम की मौत को बेहद दुखद बताते हुए कहा कि यह इस बात का संकेत है कि सरकार कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को सात दिनों से खुले आसमान के नीचे बैठना पड़ रहा है और अब एक महिला कर्मचारी को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा।
भट्ट ने कहा कि यह आंदोलन अब सिर्फ नियमितीकरण की लड़ाई नहीं, बल्कि कर्मचारियों की गरिमा और सुरक्षा का भी सवाल बन गया है।
समर्थन बढ़ा, आंदोलन रहेगा जारी
उपनल कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि नीलम की मौत के बावजूद आंदोलन रुकेगा नहीं। वे अपने नियमितीकरण, सुरक्षित भविष्य और वेतन समानता की मांग को लेकर संघर्ष जारी रखेंगे।
सामाजिक, राजनीतिक और कर्मचारी संगठनों का समर्थन आंदोलन को और गति दे रहा है। आंदोलनकारियों का कहना है कि सरकार का रवैया अभी तक सकारात्मक नहीं दिख रहा है, लेकिन वे अपनी मांगों पर अडिग रहेंगे।
सुप्रीम कोर्ट से भी सरकार को झटका
उधर, उपनल कर्मचारियों के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी है। इससे सरकार पर नियमितीकरण को लेकर जल्द निर्णय लेने का दबाव और बढ़ गया है। नैनीताल हाईकोर्ट पहले ही उपनल कर्मियों को नियमित करने के लिए नियमावली बनाने का आदेश दे चुका है, जबकि नियमावली नहीं बन पाने पर कर्मचारियों ने अवमानना याचिका दायर कर रखी है।
आगे क्या?
नीलम डोभाल की मौत ने आंदोलन के भावनात्मक तापमान को और बढ़ा दिया है। कर्मचारी लगातार सरकार पर आरोप लगा रहे हैं कि समस्याओं की अनदेखी के कारण ऐसे हालात बन रहे हैं। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश और आंदोलन के दबाव के बीच अपने निर्णय कब और कैसे लेती है।