देहरादून। उत्तराखंड में इस वर्ष की मानसूनी आपदा लगातार कहर बरपा रही है। राज्य सरकार द्वारा अब तक किए गए सर्वेक्षण के आधार पर कुल 5702 करोड़ रुपये के नुकसान का आकलन किया गया है। वहीं, आपदा प्रबंधन विभाग का कहना है कि यह आंकड़ा अभी प्रारंभिक है और मानसून समाप्त होने के बाद वास्तविक नुकसान का पता चल सकेगा।
केंद्रीय टीम करेगी दौरा
आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने जानकारी दी कि राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से वित्तीय सहायता पैकेज देने का अनुरोध किया है। केंद्र की ओर से गठित टीम 8 और 9 सितंबर को आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेगी और स्थलीय निरीक्षण कर क्षतिपूर्ति पैकेज का निर्धारण करेगी।
सबसे अधिक नुकसान सड़क और सिंचाई क्षेत्र को
विभागीय सर्वे के मुताबिक सबसे ज्यादा नुकसान लोक निर्माण विभाग (PWD) को हुआ है, जिसे 1163 करोड़ रुपये का नुकसान झेलना पड़ा है। वहीं, सिंचाई विभाग को 266 करोड़ रुपये का नुकसान दर्ज किया गया है। इसके अलावा बिजली आपूर्ति, पेयजल परियोजनाएं, कृषि और पर्यटन क्षेत्र को भी भारी क्षति पहुंची है।
मानवीय हानि का बड़ा आंकड़ा
1 अप्रैल 2025 से 31 अगस्त 2025 तक की अवधि में राज्य में आपदा के कारण
79 लोगों की मौत
115 लोग घायल
90 लोग लापता हुए हैं।
इसके अलावा,
3953 छोटे-बड़े पशुओं की मृत्यु हुई,
238 पक्के भवन और 2 कच्चे मकान पूरी तरह ध्वस्त हो गए,
2835 पक्के भवन और 402 कच्चे मकान गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं।
व्यवसायिक प्रतिष्ठान, होटल, होमस्टे और रेस्टोरेंट पर भी आपदा का गहरा असर पड़ा है।
सरकार का पुनर्निर्माण पर जोर
सचिव सुमन ने कहा कि जैसे ही बारिश का दौर थमेगा और मानसून विदा होगा, राज्य में बड़े पैमाने पर पुनर्निर्माण और पुनर्वास कार्य शुरू कर दिए जाएंगे। प्राथमिकता सड़कों और पुलों की मरम्मत, बिजली और पेयजल आपूर्ति बहाल करने के साथ-साथ प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाना होगी।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस बार अतिवृष्टि और भूस्खलन के कारण सड़क, पुल और भवनों के साथ-साथ कृषि क्षेत्र को भी अभूतपूर्व नुकसान हुआ है।
आगे और बढ़ सकता है आंकड़ा
विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून की विदाई तक राज्य में नुकसान का आंकड़ा और बढ़ सकता है। राज्य सरकार ने केंद्र से आपातकालीन राहत पैकेज की मांग कर दी है ताकि पुनर्वास कार्यों में तेजी लाई जा सके।