वन महकमे में बड़े प्रशासनिक फेरबदल के संकेत, कई अहम पदों पर होंगे बदलाव
1 जुलाई से संभाल सकते हैं PCCF HoFF की जिम्मेदारी, लंबा कार्यकाल मिलेगा फायदा
देहरादून। उत्तराखंड वन विभाग में नेतृत्व परिवर्तन का रास्ता लगभग साफ हो गया है। विभाग के सर्वोच्च पद प्रमुख वन संरक्षक एवं हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स (PCCF HoFF) के लिए आयोजित विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक में वरिष्ठ आईएफएस अधिकारी कपिल लाल के नाम पर सहमति बन गई है। माना जा रहा है कि वर्तमान वन प्रमुख रंजन कुमार मिश्र के 30 जून को सेवानिवृत्त होने के बाद कपिल लाल 1 जुलाई से विभाग की कमान संभाल सकते हैं।
वन विभाग में नए मुखिया की नियुक्ति के साथ ही शीर्ष स्तर से लेकर फील्ड स्तर तक व्यापक प्रशासनिक फेरबदल की संभावना भी तेज हो गई है। विभाग में कई महत्वपूर्ण पदों और दायित्वों को लेकर मंथन शुरू हो चुका है।
डीपीसी बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों के नामों पर हुआ विचार
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में आयोजित विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक में वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के नामों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में प्रमुख सचिव वन, वर्तमान पीसीसीएफ हॉफ तथा भारत सरकार के प्रतिनिधि के रूप में मध्य प्रदेश के वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।
बैठक में वरिष्ठता के आधार पर तीन प्रमुख अधिकारियों—कपिल लाल, नीना ग्रेवाल और एस.पी. सुबुद्धि—के नामों पर विचार किया गया। इनमें सबसे वरिष्ठ होने के कारण कपिल लाल का दावा सबसे मजबूत माना गया।
कपिल लाल के नाम पर बनी सहमति
1993 बैच के भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी कपिल लाल को विभाग में एक सख्त, अनुशासित और प्रशासनिक दृष्टि से सक्षम अधिकारी माना जाता है। उनके खिलाफ किसी प्रकार की विभागीय जांच या शिकायत लंबित नहीं है, जिससे उनकी दावेदारी और मजबूत हो गई।
हालांकि कुछ समय पहले तक यह चर्चा थी कि वे केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर जा सकते हैं, लेकिन डीपीसी में उनके नाम पर बनी सहमति ने इन अटकलों को विराम दे दिया है।
लंबे कार्यकाल से मिल सकता है स्थायित्व
वन विभाग के लिए सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि कपिल लाल का सेवा कार्यकाल वर्ष 2031 तक है। ऐसे में उन्हें लगभग पांच वर्षों तक विभाग का नेतृत्व करने का अवसर मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे कार्यकाल के कारण वे वन संरक्षण, जैव विविधता, वन्यजीव संरक्षण, मानव-वन्यजीव संघर्ष और जलवायु परिवर्तन से जुड़े दीर्घकालिक सुधारों को प्रभावी ढंग से लागू कर सकते हैं।
30 जून को सेवानिवृत्त होंगे रंजन कुमार मिश्र
वर्तमान में वन विभाग की कमान वरिष्ठ आईएफएस अधिकारी रंजन कुमार मिश्र के हाथों में है, जो इसी माह सेवानिवृत्त हो रहे हैं। उनके कार्यकाल में विभाग ने कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं और संरक्षण कार्यक्रमों को आगे बढ़ाया।
अब विभाग की निगाहें नए नेतृत्व पर टिकी हैं, जिससे वन प्रबंधन और संरक्षण की दिशा में नई रणनीति सामने आने की उम्मीद है।
वन्यजीव, कैंपा और वन पंचायत जैसे अहम प्रभारों पर भी होगा मंथन
नए वन प्रमुख की नियुक्ति के साथ विभाग में अन्य महत्वपूर्ण पदों पर भी बदलाव की संभावना है। वर्तमान में कपिल लाल कैंपा और नियोजन जैसे महत्वपूर्ण प्रभार संभाल रहे हैं। उनके नए दायित्व संभालने के बाद इन पदों के लिए नए अधिकारियों की नियुक्ति करनी होगी।
इसके अलावा पीसीसीएफ वाइल्डलाइफ का प्रतिष्ठित पद भी रिक्त होने जा रहा है, जिसे विभाग के सबसे महत्वपूर्ण पदों में गिना जाता है।
नीना ग्रेवाल और एसपी सुबुद्धि पर नजर
वरिष्ठता के आधार पर पीसीसीएफ वाइल्डलाइफ पद के लिए 1993 बैच की आईएफएस अधिकारी नीना ग्रेवाल का नाम सबसे आगे माना जा रहा है। वर्तमान में वे राज्य प्रतिनियुक्ति पर वन विकास निगम की प्रबंध निदेशक के रूप में कार्यरत हैं।
वहीं 1994 बैच के वरिष्ठ अधिकारी एसपी सुबुद्धि भी इस पद के प्रमुख दावेदारों में शामिल हैं। फिलहाल वे वन पंचायत की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
बी.के. गांगटे को भी मिल सकती है अहम जिम्मेदारी
हाल ही में केंद्र सरकार से प्रतिनियुक्ति पूरी कर लौटे वरिष्ठ आईएफएस अधिकारी बी.के. गांगटे को अभी तक कोई नया दायित्व नहीं सौंपा गया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार उन्हें भी किसी महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त किया जा सकता है।
फील्ड स्तर पर भी होंगे बड़े बदलाव
वन विभाग में केवल शीर्ष अधिकारियों के स्तर पर ही नहीं, बल्कि फील्ड स्तर पर भी बड़े पैमाने पर तबादले और दायित्वों में बदलाव की तैयारी चल रही है। वन संरक्षक, मुख्य वन संरक्षक और अन्य अधिकारियों के कार्यक्षेत्रों को लेकर विभाग पहले ही प्रारंभिक तैयारी कर चुका है।
सूत्रों का कहना है कि नए वन प्रमुख के कार्यभार संभालने के बाद तबादला सूची और जिम्मेदारियों की समीक्षा की जाएगी तथा उनकी प्राथमिकताओं के अनुरूप व्यापक फेरबदल किए जा सकते हैं।
वन विभाग में होने वाला यह नेतृत्व परिवर्तन आने वाले वर्षों में विभाग की कार्यशैली, संरक्षण नीतियों और प्रशासनिक ढांचे को नई दिशा दे सकता है।