“आपदा में सरकार आपके साथ है: उत्तरकाशी में सीएम धामी ने घर-घर जाकर बांधा ढांढस, राहत कार्यों पर जताई गंभीरता”

उत्तरकाशी/उत्तराखंड:
लगातार बारिश और भूस्खलन से त्रस्त उत्तरकाशी जिले के स्यानाचट्टी क्षेत्र में आपदा से जूझ रहे लोगों का हाल जानने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को क्षेत्र का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने प्रभावित परिवारों से घर-घर जाकर मुलाकात की, उनकी समस्याएं सुनीं और हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया। मुख्यमंत्री ने साफ कहा—

“सरकार आपदा की इस घड़ी में हर प्रभावित परिवार के साथ खड़ी है, किसी को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा।”


आपदा प्रभावितों से सीधे संवाद

मुख्यमंत्री ने अपने दौरे के दौरान स्यानाचट्टी क्षेत्र के उन घरों का दौरा किया, जो हालिया भूस्खलन और मूसलधार बारिश से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। उन्होंने न केवल प्रशासनिक समीक्षा की, बल्कि आम जनता से सीधे संवाद भी किया। उन्होंने कहा कि राहत और पुनर्वास कार्यों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी, और जहां जरूरत होगी वहां सीधी निगरानी भी की जाएगी।


“समस्याएं अलग, समाधान एक – सरकार”

सीएम धामी ने कहा कि उत्तरकाशी, धराली, थराली, और हर्षिल जैसे क्षेत्रों में भारी जनधन की हानि हुई है। कई स्थानों पर 20 फीट तक मलबा और पानी जमा है, जिससे राहत पहुंचाने में चुनौतियां आ रही हैं। उन्होंने बताया कि राज्य में हर आपदा क्षेत्र की समस्या भिन्न है—कहीं जमीन में दरारें, तो कहीं सड़कें पूरी तरह तबाह हो चुकी हैं।

इन सबके लिए सरकार ने भूगर्भीय सर्वेक्षण कराने का भी निर्णय लिया है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की संभावना का पहले से आकलन हो सके।


“राहत कार्य युद्धस्तर पर, केंद्र से टीम भी पहुंच रही”

मुख्यमंत्री ने बताया कि राहत कार्य युद्धस्तर पर जारी हैं। सड़कों की मरम्मत, मलबा हटाने, और राहत सामग्री की आपूर्ति पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। साथ ही केंद्र सरकार की ओर से भी एक विशेष टीम आपदा का जायजा लेने के लिए राज्य में पहुंच रही है, जो नुकसान का मूल्यांकन कर रिपोर्ट सौंपेगी।


विपक्ष के आरोपों पर सीएम का जवाब

आपदा राहत कार्यों में हीलाहवाली और प्रशासनिक सुस्ती के आरोपों पर विपक्ष की ओर से लगातार घेराबंदी हो रही है। इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा:

“आपदा राजनीति का विषय नहीं, मानवता की सेवा का समय है। कोई भी अधिकारी या कर्मचारी यदि राहत कार्यों में लापरवाही बरतता है तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।”


अवैध निर्माण पर जताई चिंता

सीएम धामी ने यह भी कहा कि नदियों के किनारे हुए अवैध निर्माणों ने इस आपदा के प्रभाव को और भी गंभीर बना दिया है। उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया कि भविष्य में इस पर कठोर कार्यवाही की जाएगी।

“प्राकृतिक जलधाराओं के मार्ग में बाधा डालना, खुद के लिए संकट मोल लेना है,” उन्होंने कहा।


जनता से सीधा संवाद और भरोसा

मुख्यमंत्री का यह दौरा केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं था, बल्कि लोगों में यह भरोसा पैदा करने का प्रयास भी था कि सरकार मात्र घोषणा तक सीमित नहीं, बल्कि मौके पर मौजूद होकर राहत देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई जल्दी नहीं हो सकती, लेकिन सरकार का हरसंभव प्रयास रहेगा कि प्रभावितों को राहत मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं को टाला जा सके।


निष्कर्ष:

उत्तराखंड एक बार फिर आपदा की मार झेल रहा है, लेकिन मुख्यमंत्री के इस जमीनी दौरे ने यह संकेत दिया है कि शासन इस बार सिर्फ फाइलों पर नहीं, मैदान में भी सक्रिय है। अब जनता की निगाहें इस पर टिकी हैं कि राहत कार्यों की रफ्तार कितनी तेज़ होती है और कितनी पारदर्शिता के साथ यह काम आगे बढ़ता है।

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