चमोली में कहर बरपाती बारिश – चार गांवों में तबाही, 35 मकान ध्वस्त, 15 लोग लापता”

देहरादून/चमोली। उत्तराखंड का चमोली जिला एक बार फिर प्राकृतिक आपदा की मार झेल रहा है। बीती रात लगभग 10:30 बजे से 11 बजे के बीच हुई मूसलधार बारिश के बाद पहाड़ों से आए पानी और मलबे ने नगर पंचायत नंदानगर के चार गांवों को तबाह कर दिया। घुर्मा, कुंतरी, लागाफालू, शेरापूरा और सरपानी गांव इस आपदा की चपेट में आ गए।

प्राप्त जानकारी के अनुसार अब तक 35 मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं और 15 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। वहीं, बचाव दलों ने दो लोगों को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया है, जबकि 20 से अधिक घायलों का अस्पताल में इलाज जारी है। इस आपदा ने न सिर्फ इंसानों को प्रभावित किया बल्कि कई गौशालाएं और मवेशी भी बह गए, जिससे ग्रामीणों की आजीविका पर गंभीर संकट मंडरा रहा है।

सबसे ज्यादा नुकसान कुंतरी और घुर्मा में

सूत्रों के मुताबिक, कुंतरी गांव में सात मकान पूरी तरह ध्वस्त हो गए और 7 से 8 लोग लापता हैं। वहीं, घुर्मा गांव में पांच मकान बह गए और दो लोग अब भी लापता हैं। सेरापुर और सरपानी में भी घरों और खेतों को भारी नुकसान पहुंचा है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि अचानक आई इस आपदा ने उन्हें संभलने का मौका ही नहीं दिया।

राहत-बचाव कार्य जारी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घटना की जानकारी मिलने के बाद जिला प्रशासन को युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य चलाने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी संदीप तिवारी और एसपी सर्वेश पवार सुबह ही मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा ले चुके हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी प्रभावितों को आपदा मानकों के अनुसार आर्थिक मदद और अस्थायी आवास की व्यवस्था तत्काल उपलब्ध कराई जा रही है।

सड़कें टूटीं, मोक्ष नदी उफान पर

आपदा का एक बड़ा कारण मोक्ष नदी का उफान भी बताया जा रहा है। कई जगहों पर सड़के टूटने से राहत और बचाव कार्य में बाधाएं आ रही हैं। हालांकि, मुख्यमंत्री धामी ने भरोसा दिलाया कि शाम तक मुख्य सड़क मार्गों को सुचारू कर लिया जाएगा

“आपदा पर नियंत्रण असंभव, लेकिन सरकार हर वक्त साथ” – धामी

मुख्यमंत्री धामी ने कहा, “आपदाओं पर नियंत्रण किसी के हाथ में नहीं है। चमोली में जिन क्षेत्रों में तबाही आई है, वहां कोई अनियोजित विकास कार्य नहीं हुआ है। फिर भी प्रकृति की मार हमें झेलनी पड़ रही है। लेकिन राज्य सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है।”

एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और प्रशासनिक टीमें लगातार राहत कार्य में जुटी हुई हैं।

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