नैनीताल: भीड़ापानी की बेटी पूजा पडियार ने ऐपण कला को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया – कुमाऊं की लोककला की गूँज अब देश-विदेश में
हल्द्वानी। कुमाऊं की समृद्ध संस्कृति का प्रतीक मानी जाने वाली पारंपरिक लोककला ऐपण को नई पहचान दिलाने में नैनीताल जिले के भीड़ापानी गांव की बेटी पूजा पडियार एक प्रमुख नाम बनकर उभर रही हैं। भीमताल विधानसभा क्षेत्र के ओखलकांडा ब्लॉक से संबंध रखने वाली पूजा पिछले 20 वर्षों से ऐपण कला के संरक्षण, संवर्धन और प्रसार में लगातार कार्य कर रही हैं। उनका समर्पण न केवल इस कला को आधुनिक रूप दे रहा है, बल्कि इसे अंतरराष्ट्रीय मंचों तक भी पहुंचा रहा है।
पूजा ने अपनी प्रतिभा को संगठित स्वरूप देते हुए ‘ऐपण क्रिएशन’ नाम से एक ब्रांड की स्थापना की है। इस ब्रांड के माध्यम से वह कुमाऊं की विरासत और परंपराओं पर आधारित अनेक सजावटी और उपयोगी उत्पाद तैयार कर रही हैं। उनके उत्पादों की लोकप्रियता सिर्फ उत्तराखंड तक सीमित नहीं है; देश के विभिन्न राज्यों सहित विदेशों से भी उनकी कृतियों की बड़ी मात्रा में मांग आ रही है, जिससे यह स्पष्ट है कि कुमाऊं की यह लोककला अब सीमाओं को पार कर रही है।
पूजा द्वारा बनाए गए उत्पादों में
– शादी-विवाह की पारंपरिक चौकियां
– ऐपण डिजाइन वाली नेम प्लेट्स
– फोटो फ्रेम
– जूट बैग
– लकड़ी के सजावटी सामान
– ऐपण से सजे वस्त्र, जैसे कुर्ते, टी-शर्ट और पारंपरिक कुमाऊंनी टोपियां
मुख्य रूप से शामिल हैं।
इन सभी वस्तुओं पर कुमाऊंनी संस्कृति की झलक स्पष्ट दिखाई देती है, जिसे लोग बेहद पसंद कर रहे हैं। पूजा का मानना है कि आधुनिक बाजार में लोककला को नए अंदाज में प्रस्तुत करने से न सिर्फ कलाकार को मंच मिलता है, बल्कि संस्कृति को भी नई ऊर्जा मिलती है।
पूजा केवल व्यावसायिक स्तर पर ही नहीं, बल्कि संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। वह समय-समय पर स्कूलों में जाकर बच्चों को ऐपण कला का प्रशिक्षण देती हैं, जिससे यह पारंपरिक कला आने वाली पीढ़ियों में भी जीवित रहे। उनका कहना है कि अपनी जड़ों से जुड़ाव ही हमें हमारी वास्तविक पहचान प्रदान करता है।
सोशल मीडिया के माध्यम से भी पूजा ने ऐपण कला को व्यापक मंच दिया है। उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक पेज बनाया है, जहां से हजारों लोग उनके कार्यों को देखते, पसंद करते और ऑर्डर करते हैं। उनकी बनाई नीम करौली बाबा और कैंची धाम की पेंटिंग सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुई थी, जिसे लाखों लोगों ने सराहा। इसी पेंटिंग के बाद उन्हें विदेशों से भी कई ऑर्डर मिलने शुरू हो गए, जिसने उनके कला सफर को नई दिशा दी।
पूजा ने बताया कि उनकी पूरी कोशिश उत्तराखंड की लोककलाओं को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने की है, ताकि दुनिया कुमाऊं की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को करीब से जान सके। अपने बेहतरीन कार्य और योगदान के लिए उन्हें कई सम्मान और पुरस्कारों से भी नवाजा जा चुका है।
पूजा पडियार की यह यात्रा न केवल एक कलाकार की सफलता की कहानी है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि अगर जुनून और लगन हो तो पहाड़ की प्रतिभा को कोई सीमा रोक नहीं सकती।