लद्दाख हिंसा: चार की मौत, दर्जनों घायल – सोनम वांगचुक पर केंद्र का निशाना, उपराज्यपाल ने बताया ‘साजिश’

लद्दाख में बुधवार को हुआ उग्र प्रदर्शन बीते कई दशकों में सबसे गंभीर हिंसक घटना साबित हुआ। राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची के तहत विशेष संवैधानिक गारंटी की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़प में चार लोगों की मौत हो गई, जबकि कम से कम 59 लोग घायल हुए हैं। इनमें 30 पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए लेह में कर्फ्यू लागू कर दिया गया है और अतिरिक्त पुलिस व अर्धसैनिक बल तैनात कर दिए गए हैं।

केंद्र ने सोनम वांगचुक को ठहराया जिम्मेदार

हिंसा के कुछ घंटों बाद गृह मंत्रालय ने प्रेस बयान जारी कर सीधे तौर पर पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को जिम्मेदार बताया। मंत्रालय का आरोप है कि वांगचुक के “भड़काऊ भाषण” और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं ने युवाओं को उकसाया।
सरकार ने कहा कि वांगचुक के हालिया भाषण में ‘अरब स्प्रिंग’ और नेपाल के जेन ज़ी आंदोलनों का जिक्र कर युवाओं को हिंसा की ओर धकेला गया।

वांगचुक का जवाब: भूख हड़ताल समाप्त, युवाओं से शांति की अपील

हिंसा के बाद वांगचुक ने अपनी 15 दिन लंबी भूख हड़ताल समाप्त करने की घोषणा की। उन्होंने युवाओं से संयम रखने की अपील करते हुए कहा –
“यह मेरे जीवन का सबसे दुखद दिन है। पांच साल से हम शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष कर रहे थे, लेकिन आज की हिंसा ने हमारी नैतिक ऊंचाई को आघात पहुंचाया।”
साथ ही उन्होंने चेताया कि युवाओं की असली समस्या नौकरियों की कमी, लोकतांत्रिक अधिकारों का अभाव और अधूरी संवैधानिक गारंटी है।

हिंसा कैसे भड़की?

  • बुधवार सुबह बंद के आह्वान के साथ प्रदर्शन शुरू हुआ।

  • भीड़ ने कुछ ही घंटों में बीजेपी कार्यालय, सीईसी ऑफिस और सरकारी संपत्तियों को आग के हवाले कर दिया।

  • सुरक्षा बलों ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया, लेकिन हालात काबू से बाहर हो गए।

  • प्रशासन को 1989 जैसी पुनरावृत्ति की आशंका जताते हुए सख्त कदम उठाने पड़े।

उपराज्यपाल की प्रतिक्रिया

लद्दाख के उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता ने इसे “साजिश का नतीजा” बताया। उन्होंने कहा –
“आज की घटनाएं स्वतःस्फूर्त नहीं थीं। यह शांति भंग करने की एक सुनियोजित कोशिश थी।”

आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगें

  1. लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए।

  2. क्षेत्र को छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक गारंटी मिले।

  3. लेह और कारगिल के लिए अलग-अलग लोकसभा सीटें।

  4. स्थानीय युवाओं को नौकरियों में आरक्षण

केंद्र की सफाई

गृह मंत्रालय ने कहा कि आंदोलनकारियों से बातचीत जारी है। साथ ही सरकार ने हाल के कदम गिनाए:

  • अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षण 45% से बढ़ाकर 84%

  • महिलाओं को स्थानीय निकायों में एक-तिहाई आरक्षण

  • भोटी और पर्गी भाषाओं को आधिकारिक दर्जा

  • 1800 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू।

इसके अलावा हाई पावर कमिटी की बैठक, जो पहले 6 अक्टूबर को तय थी, अब 25-26 सितंबर को ही बुलाई जा रही है।

विपक्ष और राजनीति

  • कांग्रेस पार्षद फुंतसोग स्तानज़िन त्सेपग पर भी भड़काऊ भाषण देने का मामला दर्ज।

  • वहीं बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कांग्रेस पर देश में अस्थिरता फैलाने का आरोप लगाया।

 

लद्दाख की मौजूदा स्थिति भारत के संघीय ढांचे और संवैधानिक व्यवस्था के लिए चुनौती बन चुकी है।
अगर सरकार और आंदोलनकारियों के बीच शीघ्र और ठोस संवाद स्थापित नहीं हुआ तो यह असंतोष एक लंबे राजनीतिक और सामाजिक संकट में बदल सकता है।

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