देहरादून: उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने बागेश्वर जिले में खड़िया (सोपस्टोन) के अनियंत्रित खनन पर सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि किसी भी खनन ऑपरेटर को अनुमति देने से पहले उसके दावों का सत्यापन अनिवार्य होगा।
जांच की जिम्मेदारी जिला खान अधिकारी को
हाईकोर्ट ने बागेश्वर में खनन पट्टा धारकों के दावों की जांच की जिम्मेदारी जिला खान अधिकारी को सौंपी है। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि संबंधित इकाइयों के पास वैध अनुमति और नियमों के अनुरूप मशीनरी है।
पर्यावरणीय जांच भी होगी सख्त
पर्यावरण नियमों के पालन की जांच के लिए उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिए गए हैं कि एक सप्ताह के भीतर क्षेत्रीय अधिकारी नामित किया जाए। यह अधिकारी जिला खान अधिकारी के साथ मिलकर संयुक्त निरीक्षण करेगा।
क्या है पूरा मामला
हाईकोर्ट ने ग्रामीणों की शिकायत पर स्वतः संज्ञान लेते हुए 6 जनवरी 2025 को बागेश्वर में सभी खनन कार्यों पर रोक लगा दी थी और मशीनें जब्त करने के आदेश भी दिए थे। इसके बाद कई खनन संचालकों ने अदालत में दलील दी कि उनके पास वैध अनुमति है और वे नियमों का पालन कर रहे हैं।
वैध संचालकों को मिल सकती है राहत
अदालत ने संकेत दिए हैं कि जो खनन संचालक सभी नियमों का पालन कर रहे हैं और जिनके पास वैध दस्तावेज हैं, उन्हें काम करने की अनुमति दी जा सकती है। हालांकि, यह अनुमति केवल सत्यापन के बाद ही दी जाएगी।
स्टोन क्रशर को लेकर स्थिति स्पष्ट
अदालत ने साफ किया कि यह मामला केवल सोपस्टोन खनन तक सीमित है और स्टोन क्रशर इकाइयों पर इसका सीधा प्रभाव नहीं पड़ेगा। 6 जनवरी 2025 का आदेश स्टोन क्रशर संचालन में बाधा नहीं बनेगा।
अगली सुनवाई कब?
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि खनन संचालक दो सप्ताह में अपने दावे प्रस्तुत करें और अधिकारी अगले दो सप्ताह में जांच रिपोर्ट तैयार करें। मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल 2026 को होगी।