देहरादून: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने देहरादून सहित राज्य के अन्य क्षेत्रों की नदियों, नालों और खालों पर हो रहे अतिक्रमण के मामलों पर सख्ती दिखाई है। मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने देहरादून की बिंदाल नदी से अतिक्रमण हटाने के लिए राज्य सरकार द्वारा दाखिल शपथ पत्र पर संज्ञान लिया। सरकार ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि 30 जून 2025 तक बिंदाल नदी से अतिक्रमण पूरी तरह हटा दिया जाएगा।
मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंद्र और न्यायमूर्ति आलोक कुमार मेहरा की खंडपीठ के समक्ष प्रमुख सचिव वन आर. के. सुधांशु, प्रमुख सचिव सिंचाई डॉ. राजेश कुमार, सचिव शहरी विकास नीतीश कुमार झा, और सचिव राजस्व एस. एन. पांडे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हुए।
कोर्ट के निर्देश: कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए कि देहरादून क्षेत्र में नदियों और नालों पर बिना मानचित्र स्वीकृति के किए जा रहे सभी अवैध निर्माणों को तत्काल प्रभाव से रोका जाए। इसके अलावा, देहरादून के विकासनगर क्षेत्र में प्रशासन द्वारा की गई ध्वस्तीकरण कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट 21 अप्रैल तक कोर्ट में पेश करने को कहा गया है। साथ ही अतिक्रमण वाले चिन्हित क्षेत्रों के मानचित्र भी कोर्ट में दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
जनहित याचिकाएं और आरोप: इस मामले में दायर जनहित याचिकाओं में अजय नारायण शर्मा, रेनू पाल और उर्मिला थापर ने अदालत का ध्यान दिलाया कि देहरादून के सहस्त्रधारा क्षेत्र में जलमग्न भूमि पर बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य हो रहे हैं, जिससे जल स्रोतों के सूखने और पर्यावरण को गंभीर खतरा पैदा हो रहा है।
दूसरी याचिका में ऋषिकेश में नालों, खालों और ढांग क्षेत्रों में हो रहे अवैध निर्माण और अतिक्रमण की ओर इशारा किया गया है। तीसरी याचिका के अनुसार, देहरादून में लगभग 100 एकड़, विकासनगर में 140 एकड़, ऋषिकेश में 15 एकड़ और डोईवाला में करीब 15 एकड़ क्षेत्र नदियों की भूमि पर अवैध कब्जों के अधीन है।
सरकार की कार्रवाई: राज्य सरकार की ओर से सचिव शहरी विकास ने कोर्ट को जानकारी दी कि एक विशेष कमेटी बनाकर इन अतिक्रमणों की पहचान की गई है। चिन्हित अतिक्रमणकारियों को नोटिस भेजे जा चुके हैं और हटाने की प्रक्रिया शुरू है।
अगली सुनवाई: कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 21 अप्रैल 2025 की तिथि निर्धारित की है, जिसमें सरकार द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट और मानचित्रों का अवलोकन किया जाएगा।