“उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था चरमराई: शिक्षक संघ कार्य बहिष्कार पर, लाखों छात्रों की पढ़ाई ठप”
देहरादून | 28 अगस्त 2025
उत्तराखंड में स्कूली शिक्षा संकट के दौर से गुजर रही है। राज्य के सरकारी स्कूलों में पहले से ही शिक्षकों की भारी कमी थी, लेकिन अब राजकीय शिक्षक संघ के कार्य बहिष्कार और प्रधानाचार्य/प्रधानाध्यापक प्रभारी शिक्षकों के सामूहिक त्यागपत्र ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है। परिणामस्वरूप कक्षा 6 से 12 तक के 1.5 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं शिक्षा से वंचित हो रहे हैं।
क्या है पूरा मामला?
उत्तराखंड में प्रधानाचार्य पदों की नियुक्ति में पदोन्नति बनाम सीमित भर्ती परीक्षा के विवाद ने तूल पकड़ लिया है।
राजकीय शिक्षक संघ का आरोप है कि सरकार न्यायोचित पदोन्नति नहीं कर रही और वरिष्ठता को नजरअंदाज कर रही है।
मुख्य विवाद:
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सरकार का प्रस्ताव: 50% पद सीमित भर्ती परीक्षा से और 50% पद पदोन्नति के जरिए भरने का निर्णय।
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शिक्षक संघ की मांग: 100% पद पदोन्नति से भरे जाएं, जैसा कि पहले होता रहा है।
इस मुद्दे पर मामला पहले से न्यायालय में लंबित है, जिससे शिक्षा विभाग भी निर्णय लेने की स्थिति में नहीं है। इसी कारण आठ वर्षों से पदोन्नति प्रक्रिया रुकी हुई है।
शिक्षा व्यवस्था की गिरती स्थिति:
उत्तराखंड शिक्षा विभाग के आधिकारिक आंकड़े बता रहे हैं कि राज्य के सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी है:
| पद | रिक्तियां |
|---|---|
| प्रधानाचार्य (इंटर कॉलेज) | 1,180 |
| प्रधानाध्यापक (हाईस्कूल) | 830 |
| एलटी (सहायक अध्यापक) | 3,055 |
| प्रवक्ता | 4,745 |
| कुल रिक्त पद | 9,810 |
इन आंकड़ों से साफ है कि सिर्फ भवन और स्मार्ट क्लासरूम से नहीं, बल्कि मानव संसाधन की गंभीर जरूरत है।
प्रभारी शिक्षकों का सामूहिक त्यागपत्र
जिन शिक्षकों को प्रधानाचार्य या प्रधानाध्यापक का प्रभार सौंपा गया था, उन्होंने भी 18 अगस्त से सामूहिक त्यागपत्र दे दिया है। इसका सीधा असर स्कूलों की प्रशासनिक और शैक्षणिक व्यवस्था पर पड़ा है। कई विद्यालयों में परीक्षा, नामांकन, समयसारिणी और रिपोर्टिंग कार्य रुक चुके हैं।
छात्रों का भविष्य अधर में
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लगभग 1,51,812 छात्र-छात्राएं प्रभावित।
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पढ़ाई, परीक्षा और मूल्यांकन कार्य ठप।
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ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और ज्यादा खराब, जहां पहले से ही एक या दो शिक्षक ही तैनात थे।
अतिथि शिक्षक भी नाराज
राज्य सरकार ने जब स्थायी शिक्षकों की कमी को भरने के लिए अतिथि शिक्षकों की तैनाती की, तो शुरुआत में कुछ राहत मिली, लेकिन वे भी नियमितीकरण की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं। इससे शिक्षण कार्य में निरंतरता नहीं रह पाई है।
सरकार का पक्ष:
राज्य के शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा:
“सरकार शिक्षा की गुणवत्ता के लिए प्रतिबद्ध है। स्मार्ट क्लास, वर्चुअल क्लास, पुस्तकालय और प्रयोगशालाओं के निर्माण पर जोर दिया जा रहा है। पदोन्नति प्रक्रिया को भी गति दी जा रही है।”
हालांकि शिक्षक संघ का आरोप है कि यह सब “कागजों और घोषणाओं तक ही सीमित” है। जमीनी स्तर पर शिक्षक नहीं, तो तकनीक भी बेकार है।
राष्ट्रीय सर्वेक्षण भी चिंताजनक
केंद्र सरकार के शिक्षा सर्वेक्षण के अनुसार उत्तराखंड की सरकारी स्कूलों में:
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गणित और विज्ञान में बच्चों की समझदारी औसत से नीचे है।
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ड्रॉपआउट दर बढ़ रही है, खासकर दूरस्थ क्षेत्रों में।
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कई बच्चों के लिए स्कूल सिर्फ मिड डे मील केंद्र बनकर रह गए हैं।
अब आगे क्या?
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शिक्षक संघ मामले को सर्वोच्च स्तर तक ले जाने की तैयारी में है।
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शिक्षा विभाग न्यायालय के आदेश का इंतजार कर रहा है।
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अभिभावक संगठनों ने भी सरकार से तत्काल समाधान की मांग की है।