देहरादून। उत्तराखंड की प्रीमियम हिमालयन ट्राउट फिश ने पहली बार अंतरराष्ट्रीय बाजार में दस्तक देकर नया इतिहास रच दिया है। राज्य से पहली बार 5 मीट्रिक टन ट्राउट फिश नेपाल निर्यात की गई है। इस उपलब्धि से न केवल उत्तराखंड के मत्स्य पालन क्षेत्र को नई पहचान मिली है, बल्कि इससे जुड़े 33 मत्स्य पालकों को लगभग 23.5 लाख रुपये की आय भी प्राप्त हुई है। राज्य सरकार अब ट्राउट फिश को केवल नेपाल तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि दुबई सहित खाड़ी देशों और देश के बड़े महानगरों में भी इसकी पहुंच बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। मत्स्य विभाग का मानना है कि आने वाले महीनों में नेपाल को लगभग 30 मीट्रिक टन ट्राउट फिश का निर्यात किया जा सकता है। दुबई निर्यात की तैयारी, लेकिन सामने हैं कई चुनौतियां उत्तराखंड सरकार दुबई के बाजार में भी ट्राउट फिश पहुंचाने की तैयारी कर रही है। पिछले वर्ष गल्फ फूड एक्सपो के दौरान अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के साथ सकारात्मक बातचीत हुई थी, लेकिन अभी तक निर्यात शुरू नहीं हो पाया है। विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे तीन प्रमुख कारण हैं— – राज्य में आधुनिक फिश प्रोसेसिंग प्लांट का अभाव। – उत्तराखंड में तैयार होने वाली ट्राउट फिश का औसत वजन 700 से 800 ग्राम, जबकि गल्फ देशों में लगभग 3 किलोग्राम वजन की मछली की मांग। – निर्यात से जुड़े तकनीकी मानकों और दस्तावेजी प्रक्रियाओं को पूरी तरह पूरा करना। इन चुनौतियों को दूर करने के लिए सरकार बड़े आकार की ट्राउट फिश तैयार करने, आधुनिक प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने और कोल्ड चेन नेटवर्क को मजबूत करने पर काम कर रही है। 150 साल पुराना है ट्राउट फिश पालन का इतिहास उत्तराखंड में ट्राउट फिश पालन की शुरुआत ब्रिटिश शासनकाल में हुई थी। वर्ष 1850 के दशक में अंग्रेज स्विट्जरलैंड से ट्राउट फिश का बीज हिमालयी क्षेत्रों में लाए थे। तब से यह मछली राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों की पहचान बन गई और आज इसे उत्तराखंड की सबसे प्रीमियम मछलियों में गिना जाता है। रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ा उत्पादन राज्य में ट्राउट फिश उत्पादन लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है। वर्ष 2020-21 में जहां उत्पादन लगभग 250 मीट्रिक टन था, वहीं 2025-26 में यह बढ़कर करीब 800 मीट्रिक टन तक पहुंच गया। यह उत्पादन प्रदेशभर में संचालित 1,625 रेसवेज के माध्यम से किया जा रहा है। हजारों परिवारों की बढ़ी आमदनी मत्स्य पालन अब उत्तराखंड के हजारों परिवारों के लिए रोजगार और आय का मजबूत माध्यम बन चुका है। वर्ष 2021-22 में जहां 10,011 परिवार इस व्यवसाय से जुड़े थे, वहीं 2025-26 तक यह संख्या बढ़कर 15,657 परिवारों तक पहुंच गई। इनमें 3,584 महिला मत्स्य पालक भी शामिल हैं, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में अहम भूमिका निभा रही हैं। मत्स्य पालन पर सरकार का बढ़ता फोकस मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत अब तक 1,651 मत्स्य पालकों को लाभ दिया जा चुका है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदेश में कुल 11,805 मीट्रिक टन मछली उत्पादन हुआ, जिससे लगभग 165 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ। मत्स्य विभाग का बजट भी लगातार बढ़ाया गया है। वर्ष 2021-22 में विभाग का बजट 55.76 करोड़ रुपये था, जिसे बढ़ाकर 2026-27 में 261.41 करोड़ रुपये कर दिया गया है। आईटीबीपी को भी हो रही सप्लाई उत्तराखंड की ट्राउट फिश की गुणवत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2024 से अब तक 45.10 टन ट्राउट फिश भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) को भी सप्लाई की जा चुकी है, जिसकी कुल कीमत लगभग 2.10 करोड़ रुपये रही है। मत्स्य पालन विभाग का कहना है कि आने वाले समय में ट्राउट फिश की ब्रांडिंग, आधुनिक प्रोसेसिंग, कोल्ड चेन और अंतरराष्ट्रीय मार्केटिंग पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि उत्तराखंड की यह प्रीमियम हिमालयन ट्राउट दुनिया के बड़े बाजारों तक अपनी पहचान बना सके।
देहरादून। उत्तराखंड की प्रीमियम हिमालयन ट्राउट फिश ने पहली बार अंतरराष्ट्रीय बाजार में दस्तक देकर नया इतिहास रच दिया है। राज्य से पहली बार 5 मीट्रिक टन ट्राउट फिश नेपाल निर्यात की गई है। इस उपलब्धि से न केवल उत्तराखंड के मत्स्य पालन क्षेत्र को नई पहचान मिली है, बल्कि इससे जुड़े 33 मत्स्य पालकों को लगभग 23.5 लाख रुपये की आय भी प्राप्त हुई है।
राज्य सरकार अब ट्राउट फिश को केवल नेपाल तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि दुबई सहित खाड़ी देशों और देश के बड़े महानगरों में भी इसकी पहुंच बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। मत्स्य विभाग का मानना है कि आने वाले महीनों में नेपाल को लगभग 30 मीट्रिक टन ट्राउट फिश का निर्यात किया जा सकता है।
दुबई निर्यात की तैयारी, लेकिन सामने हैं कई चुनौतियां
उत्तराखंड सरकार दुबई के बाजार में भी ट्राउट फिश पहुंचाने की तैयारी कर रही है। पिछले वर्ष गल्फ फूड एक्सपो के दौरान अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के साथ सकारात्मक बातचीत हुई थी, लेकिन अभी तक निर्यात शुरू नहीं हो पाया है।
विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे तीन प्रमुख कारण हैं—
– राज्य में आधुनिक फिश प्रोसेसिंग प्लांट का अभाव।
– उत्तराखंड में तैयार होने वाली ट्राउट फिश का औसत वजन 700 से 800 ग्राम, जबकि गल्फ देशों में लगभग 3 किलोग्राम वजन की मछली की मांग।
– निर्यात से जुड़े तकनीकी मानकों और दस्तावेजी प्रक्रियाओं को पूरी तरह पूरा करना।
इन चुनौतियों को दूर करने के लिए सरकार बड़े आकार की ट्राउट फिश तैयार करने, आधुनिक प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने और कोल्ड चेन नेटवर्क को मजबूत करने पर काम कर रही है।
150 साल पुराना है ट्राउट फिश पालन का इतिहास
उत्तराखंड में ट्राउट फिश पालन की शुरुआत ब्रिटिश शासनकाल में हुई थी। वर्ष 1850 के दशक में अंग्रेज स्विट्जरलैंड से ट्राउट फिश का बीज हिमालयी क्षेत्रों में लाए थे। तब से यह मछली राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों की पहचान बन गई और आज इसे उत्तराखंड की सबसे प्रीमियम मछलियों में गिना जाता है।
रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ा उत्पादन
राज्य में ट्राउट फिश उत्पादन लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है। वर्ष 2020-21 में जहां उत्पादन लगभग 250 मीट्रिक टन था, वहीं 2025-26 में यह बढ़कर करीब 800 मीट्रिक टन तक पहुंच गया। यह उत्पादन प्रदेशभर में संचालित 1,625 रेसवेज के माध्यम से किया जा रहा है।
हजारों परिवारों की बढ़ी आमदनी
मत्स्य पालन अब उत्तराखंड के हजारों परिवारों के लिए रोजगार और आय का मजबूत माध्यम बन चुका है। वर्ष 2021-22 में जहां 10,011 परिवार इस व्यवसाय से जुड़े थे, वहीं 2025-26 तक यह संख्या बढ़कर 15,657 परिवारों तक पहुंच गई। इनमें 3,584 महिला मत्स्य पालक भी शामिल हैं, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में अहम भूमिका निभा रही हैं।
मत्स्य पालन पर सरकार का बढ़ता फोकस
मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत अब तक 1,651 मत्स्य पालकों को लाभ दिया जा चुका है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदेश में कुल 11,805 मीट्रिक टन मछली उत्पादन हुआ, जिससे लगभग 165 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ।
मत्स्य विभाग का बजट भी लगातार बढ़ाया गया है। वर्ष 2021-22 में विभाग का बजट 55.76 करोड़ रुपये था, जिसे बढ़ाकर 2026-27 में 261.41 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
आईटीबीपी को भी हो रही सप्लाई
उत्तराखंड की ट्राउट फिश की गुणवत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2024 से अब तक 45.10 टन ट्राउट फिश भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) को भी सप्लाई की जा चुकी है, जिसकी कुल कीमत लगभग 2.10 करोड़ रुपये रही है।
मत्स्य पालन विभाग का कहना है कि आने वाले समय में ट्राउट फिश की ब्रांडिंग, आधुनिक प्रोसेसिंग, कोल्ड चेन और अंतरराष्ट्रीय मार्केटिंग पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि उत्तराखंड की यह प्रीमियम हिमालयन ट्राउट दुनिया के बड़े बाजारों तक अपनी पहचान बना सके।