सोनप्रयाग की भीड़ ने बढ़ाई चिंता, चारधाम यात्रा में कैरिंग कैपेसिटी पर फिर बहस

Sonprayag में उमड़ी भारी भीड़ का वीडियो सामने आने के बाद एक बार फिर Char Dham Yatra की “कैरिंग कैपेसिटी” को लेकर बहस तेज हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि उच्च हिमालयी क्षेत्रों में क्षमता से अधिक भीड़ भविष्य में पर्यावरणीय और आपदा संबंधी बड़े खतरे पैदा कर सकती है।

22 दिनों में साढ़े 10 लाख श्रद्धालु पहुंचे

19 अप्रैल से शुरू हुई चारधाम यात्रा में 10 मई तक करीब 10.5 लाख श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। लगातार बढ़ती भीड़ के कारण कई स्थानों पर व्यवस्थाओं पर दबाव साफ दिखाई दे रहा है।

विशेष रूप से Sonprayag में यात्रियों की भारी भीड़ और लंबी कतारों ने प्रशासनिक तैयारियों और यात्रा प्रबंधन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या होती है कैरिंग कैपेसिटी?

कैरिंग कैपेसिटी का मतलब किसी स्थान पर एक समय में उतने ही लोगों की मौजूदगी से है, जितना वहां का पर्यावरण, संसाधन और आधारभूत ढांचा सुरक्षित रूप से संभाल सके।

पहले राज्य सरकार ने चारधामों के लिए प्रतिदिन श्रद्धालुओं की संख्या निर्धारित की थी:

  • Kedarnath Temple – 12 हजार

  • Badrinath Temple – 15 हजार

  • Gangotri Temple – 7 हजार

  • Yamunotri Temple – 4 हजार

लेकिन इस वर्ष यह व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू नहीं दिखाई दे रही, जबकि कई धामों में निर्धारित संख्या से कहीं अधिक श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।

विशेषज्ञों ने जताई पर्यावरणीय चिंता

Ashish Garg का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में क्षमता से अधिक भीड़ का सीधा असर पर्यावरण पर पड़ता है।

उनके अनुसार:

  • ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं

  • ब्लैक कार्बन जमा होने से बर्फ की मोटाई घट रही है

  • कूड़े और वाहनों से गर्मी बढ़ रही है

  • हरियाली और प्राकृतिक संतुलन प्रभावित हो रहा है

उन्होंने कहा कि अगर हिल स्टेशनों और तीर्थ क्षेत्रों में कैरिंग कैपेसिटी का पालन नहीं हुआ, तो भविष्य में गंभीर दुष्परिणाम देखने को मिल सकते हैं।

आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों की राय

National Disaster Management Authority के सदस्य Dinesh Kumar Aswal ने कहा कि ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और प्रतिदिन तय संख्या के जरिए यात्रा को प्रबंधित किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि Pushkar Singh Dhami स्वयं यात्रा व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे हैं और व्यवस्थाओं में लगातार सुधार किया जा रहा है।

पर्यटन मंत्री ने भी माना जरूरी

Satpal Maharaj ने भी माना कि पहाड़ों की सीमित क्षमता को ध्यान में रखते हुए ही यात्रियों की संख्या नियंत्रित होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि:

  • पहाड़ों में जगह सीमित है

  • अत्यधिक भीड़ से व्यवस्थाएं चरमरा सकती हैं

  • यात्रियों को धीरे-धीरे और रुक-रुक कर यात्रा करनी चाहिए

  • स्वास्थ्य जांच के बाद ही ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जाना बेहतर है

बढ़ती भीड़ से सामने आ रहीं चुनौतियां

विशेषज्ञों के मुताबिक, कैरिंग कैपेसिटी से अधिक भीड़ के कारण:

  • ट्रैफिक जाम

  • पार्किंग संकट

  • कचरा प्रबंधन की समस्या

  • स्वास्थ्य और आपदा जोखिम

  • पर्यावरणीय दबाव

लगातार बढ़ रहे हैं।

चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड संख्या जहां आस्था का बड़ा प्रतीक मानी जा रही है, वहीं हिमालयी क्षेत्रों की संवेदनशीलता को देखते हुए संतुलित और नियंत्रित यात्रा प्रबंधन की जरूरत भी पहले से अधिक महसूस की जा रही है।

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