Jyoti Rautela ने नई दिल्ली में कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव Priyanka Gandhi Vadra से मुलाकात कर उत्तराखंड की राजनीतिक स्थिति और आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर विस्तृत चर्चा की। इस मुलाकात को उत्तराखंड में कांग्रेस की चुनावी तैयारियों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
महिला संगठन और चुनाव रणनीति पर हुई चर्चा
नई दिल्ली में हुई इस बैठक में उत्तराखंड की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों, महिला कांग्रेस संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने, महिला भागीदारी बढ़ाने और आगामी विधानसभा चुनावों की रणनीति पर विस्तार से मंथन किया गया।
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में खास तौर पर महिला शक्ति को संगठन की मजबूती से जोड़ने और ग्रामीण क्षेत्रों तक कांग्रेस की पहुंच बढ़ाने पर फोकस किया गया।
प्रियंका गांधी को उत्तराखंड आने का न्योता
Jyoti Rautela ने इस दौरान Priyanka Gandhi Vadra को देवभूमि उत्तराखंड आने का निमंत्रण भी दिया, जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार कर लिया।
माना जा रहा है कि आगामी महीनों में प्रियंका गांधी का उत्तराखंड दौरा कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरने का काम कर सकता है।
बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने पर जोर
बैठक में Priyanka Gandhi Vadra ने आगामी चुनावी वर्ष को देखते हुए संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कार्यकर्ताओं के बीच सक्रिय संवाद और जनसंपर्क अभियान तेज करने की सलाह भी दी।
कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि मजबूत संगठनात्मक ढांचे के बिना चुनावी मुकाबले में प्रभावी बढ़त हासिल करना मुश्किल होगा।
“पूरी मजबूती के साथ चुनाव लड़ेगी कांग्रेस”
मुलाकात के बाद Jyoti Rautela ने कहा कि कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व उत्तराखंड की राजनीतिक गतिविधियों और संगठन विस्तार पर लगातार नजर बनाए हुए है।
उन्होंने विश्वास जताया कि आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पूरी एकजुटता और मजबूती के साथ मैदान में उतरेगी। साथ ही उन्होंने कहा कि पार्टी महिलाओं, युवाओं और आम जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर लगातार सक्रिय है।
उत्तराखंड में तेज हो रही चुनावी हलचल
Uttarakhand में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज हो रही हैं। एक ओर सत्तारूढ़ भाजपा संगठन और सरकार के स्तर पर सक्रिय नजर आ रही है, वहीं कांग्रेस भी अपने संगठन को मजबूत करने और चुनावी रणनीति तैयार करने में जुट गई है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले महीनों में उत्तराखंड की राजनीति में बड़े दौरे, संगठनात्मक बदलाव और चुनावी अभियानों की रफ्तार और तेज हो सकती है।