चमोली। आपदा के दर्द के बीच चमोली जिले के सेरा गांव की एक बेटी की शादी सादगी से संपन्न हुई। मोक्ष गदेरे में आए सैलाब ने न केवल कई परिवारों को उजाड़ दिया बल्कि शादी का सपना भी टूटता हुआ नजर आने लगा। लेकिन हिम्मत और रिश्तेदारों के सहयोग ने इस संकट को भी मात दे दी। महिपाल सिंह गुसांई की बेटी नीमा की शादी बुधवार को गोपेश्वर के एक बारातघर में पूरे सादगी भरे माहौल में सम्पन्न हुई।
आपदा का गहरा जख्म, फिर भी निभाई रस्में
17 सितंबर की रात धुर्मा गांव की पहाड़ियों पर बादल फटने के बाद मोक्ष गदेरे ने रौद्र रूप धारण कर लिया था। तेज बहाव में सेरा गांव के आठ मकान बह गए और कई मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। इन्हीं मकानों में महिपाल सिंह गुसांई का मकान भी शामिल था। मकान के साथ ही उनकी पूरी जमापूंजी और बेटी के विवाह का सारा सामान भी बह गया। ऐसे हालात में विवाह संपन्न कराना असंभव लग रहा था।
लेकिन रिश्तेदारों और गांव वालों ने हिम्मत दी। सबने मिलकर नीमा की शादी के लिए सहयोग किया और आखिरकार बेटी की विदाई का सपना पूरा हो सका।
बरातघर में सजी सादगी भरी शादी
23 और 24 सितंबर को नीमा की शादी की तारीख पहले से तय थी। नीमा की शादी पोखरी ब्लॉक के कलसीर डाडों गांव के गौरव सिंह के साथ तय हुई थी। आपदा के बावजूद, 24 सितंबर को गोपेश्वर के बारातघर में यह शादी सादे समारोह के साथ हुई।
बरात जब बारातघर पहुंची तो वहां का माहौल भावुक हो उठा। हर किसी की आंखों में आपदा का दर्द और बेटी की विदाई का जज्बा साफ झलक रहा था। गांव के आपदा प्रभावित परिवार भी इस शादी में शामिल हुए और दुल्हन को आशीर्वाद देकर विदा किया।
अधिकारियों ने भी दिया साथ
इस शादी को खास बनाने और पीड़ित परिवार को हिम्मत देने के लिए जिले के आला अधिकारी भी मौजूद रहे। जिला जज, जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी, अपर जिलाधिकारी समेत सभी जिला स्तरीय अधिकारियों ने शादी में शिरकत की और दुल्हन नीमा को आशीर्वाद दिया। उनकी मौजूदगी ने परिवार के टूटे हौसले को संभालने का काम किया।
बुधवार को अपराह्न पांच बजे बरात पोखरी के लिए रवाना हुई। माहौल सादा जरूर था लेकिन आत्मीयता और सहयोग की भावना ने इस विवाह को खास बना दिया।
पिता की आंखों से छलका दर्द और आभार
आपदा प्रभावित महिपाल गुसांई ने कहा कि घर बह जाने के बाद पूरी हिम्मत टूट गई थी, लेकिन रिश्तेदारों और समाज ने हौंसला दिया। उन्होंने कहा कि इस कठिन समय में हर किसी का सहयोग मिला और बेटी का विवाह संपन्न हो पाया।
चमोली आपदा ने जहां कई घरों को उजाड़ दिया, वहीं समाज और प्रशासन के सहयोग ने यह दिखा दिया कि कठिन से कठिन हालात में भी इंसान एकजुट होकर हर विपत्ति का सामना कर सकता है। सेरा गांव की बेटी नीमा की सादगी भरी शादी इसका उदाहरण बन गई।