Uttarakhand High Court का बड़ा फैसला: पहली शादी छुपाकर दूसरी शादी व यौन संबंध बनाना दुष्कर्म
“भ्रमित सहमति” वास्तविक नहीं, IPC की धारा 375 के तहत बलात्कार माना जाएगा – हाईकोर्ट
नैनीताल,
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए कहा है कि यदि कोई पुरुष अपनी पहली शादी छुपाकर दूसरी महिला से विवाह करता है और उसी आधार पर यौन संबंध बनाता है, तो इसे भारतीय दंड संहिता की धारा 375(4) के तहत बलात्कार माना जाएगा। अदालत ने साफ कहा कि इस स्थिति में महिला की सहमति “भ्रमित सहमति” है, जो कानून की नजर में वास्तविक नहीं मानी जाएगी।
क्या है मामला?
देहरादून निवासी पीड़िता ने सितंबर 2021 में एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप लगाया गया कि अभियुक्त सार्थक वर्मा ने अपनी पहली शादी छुपाकर 24 अगस्त 2020 को हिन्दू रीति-रिवाज से उससे विवाह किया। शादी के बाद उस पर दहेज की मांग, मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना और यौन शोषण किया गया। बाद में पीड़िता को पता चला कि सार्थक पहले से विवाहित है।
इसी आधार पर उसके खिलाफ धारा 498ए, 494, 377, 323, 504, 506 आईपीसी और दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज हुआ। बाद में जांच अधिकारी ने कुछ धाराएं हटाईं लेकिन नए जांच अधिकारी ने गंभीर धाराएं जोड़ दीं, जिनमें धारा 375(4), 376, 493, 495 और 496 शामिल हैं।
अभियुक्त की दलील
सार्थक वर्मा ने हाईकोर्ट में धारा 482 सीआरपीसी के तहत याचिका दाखिल कर कहा कि:
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पुलिस ने निष्पक्ष जांच नहीं की।
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बिना आधार उसके खिलाफ गंभीर धाराएं जोड़ दी गईं।
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पीड़िता पहले से उसकी शादी के बारे में जानती थी और इसी तरह की शिकायत पहले भी दर्ज करा चुकी थी।
पीड़िता और राज्य सरकार का पक्ष
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पीड़िता ने कहा कि यदि उसे पहले से अभियुक्त की शादी की जानकारी होती, तो वह कभी विवाह और संबंध के लिए सहमत नहीं होती।
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राज्य सरकार की ओर से भी कहा गया कि जांच के दौरान यह तथ्य स्पष्ट हुआ कि अभियुक्त ने अपनी पहली शादी छुपाकर विवाह और यौन संबंध बनाए।
हाईकोर्ट का आदेश
न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि:
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यदि कोई महिला यह मानकर यौन संबंध बनाती है कि वह विधिवत पत्नी है, जबकि पति पहले से विवाहित हो, तो यह भ्रमित सहमति होगी।
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यह भारतीय दंड संहिता की धारा 375 के अंतर्गत दुष्कर्म (Rape) की परिभाषा में आता है।
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सुप्रीम कोर्ट और अन्य उच्च न्यायालयों के फैसलों का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि इस तरह की सहमति कानूनन मान्य नहीं।