उत्तराखंड में वन पंचायतों के सशक्तिकरण हेतु महाधिवेशन संपन्न, वन मंत्री ने की अभिनव पहल की सराहना

वनाग्नि रोकथाम एवं वन पंचायतों के सशक्तिकरण के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा चिरमिरी टॉप, चकराता में नवगठित वन पंचायतों का महाधिवेशन आयोजित किया गया। इस सम्मेलन का उद्घाटन उत्तराखंड के माननीय वन मंत्री श्री सुबोध उनियाल ने किया। कार्यक्रम में चकराता विधायक श्री प्रीतम सिंह, जिलाधिकारी सविन बंसल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी एवं वन पंचायतों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

वन पंचायतों को सशक्त बनाने की दिशा में अहम कदम

महाधिवेशन में वन पंचायतों को जागरूक करने, उनके अधिकारों और दायित्वों पर मंथन करने तथा वनाग्नि सुरक्षा एवं रोकथाम को लेकर विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इस अवसर पर वन मंत्री श्री सुबोध उनियाल ने कहा कि उत्तराखंड में वनों की सुरक्षा केवल सरकार की नहीं, बल्कि समाज की भी जिम्मेदारी है। उन्होंने वनाग्नि रोकथाम में जनसहभागिता को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इस दिशा में ग्राम स्तर, जिला स्तर और शासन स्तर पर समितियों का गठन कर वन पंचायतों को सशक्त बनाया जा रहा है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि वनाग्नि रोकथाम में सक्रिय योगदान देने वालों को 51 हजार, 75 हजार से लेकर 1 लाख रुपये तक का पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।

वन पंचायतों को वित्तीय सहायता एवं फायर किट वितरण

वनाग्नि रोकथाम के लिए राज्य में पहली बार वन पंचायतों को आपदा राहत कोष से 15-15 हजार रुपये की धनराशि प्रदान की गई। इस धनराशि का उपयोग फायर वॉचर रखने, फायर लाइन काटने और वनाग्नि रोकथाम की अन्य गतिविधियों के लिए किया जाएगा। महाधिवेशन में कैबिनेट मंत्री ने 10 वन पंचायत सरपंचों को चेक वितरित किए, जबकि अन्य वन पंचायतों को यह राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से उनके खातों में भेजी गई।

इसके अलावा, वन पंचायत नाडा, काण्डोई, सावरा, सैंज, डेरियो, लखवाड़, कोदी भौदी, अतलेऊ, फनार और रायगी के सरपंचों को फायर किट भी प्रदान की गई, ताकि वे वनाग्नि से बचाव के लिए आवश्यक संसाधनों का बेहतर उपयोग कर सकें।

वन पंचायतों के लिए प्रशिक्षण एवं सम्मान समारोह

महाधिवेशन में एफआरआई के सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी वी. के. धवन, रेंज ऑफिसर शिव प्रसाद गैरोला तथा वन विभाग के अन्य विशेषज्ञों ने वनाग्नि रोकथाम एवं प्रबंधन को लेकर प्रशिक्षण दिया। इस दौरान वन पंचायतों के अधिकारों और दायित्वों पर भी गहन विचार-विमर्श किया गया।

कार्यक्रम में उत्कृष्ट कार्य करने वाली 10 वन पंचायतों के सरपंचों को सम्मानित भी किया गया। इन सरपंचों में संतराम, चैतराम, रामलाल सेमवाल, मदन सिंह, रघुवीर सिंह, अजीत सिंह, नवीन तोमर, केशर सिंह चौहान, अतर सिंह चौहान और अनिता का नाम शामिल है।

वन मंत्री ने जिलाधिकारी की पहल की सराहना

वन मंत्री ने जिलाधिकारी सविन बंसल द्वारा वन पंचायतों को सशक्त बनाने के लिए किए गए प्रयासों की सराहना की और अन्य जिलों को भी इस पहल से प्रेरणा लेने को कहा। जिलाधिकारी ने बताया कि देहरादून जिले में 200 वन पंचायतों को सक्रिय किया गया है और वनाग्नि की रोकथाम में स्थानीय लोगों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि वन पंचायतों को जागरूक करना, प्रशिक्षण देना और वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराना जिला प्रशासन का दायित्व है। यदि आवश्यकता हुई, तो वन पंचायतों को दूसरी किस्त में और अधिक धनराशि भी प्रदान की जाएगी।

पर्यावरण संरक्षण हमारा कर्तव्य

चकराता विधायक श्री प्रीतम सिंह ने कहा कि जलवायु परिवर्तन को संतुलित करने के लिए वनों का संरक्षण बेहद आवश्यक है। उन्होंने वन मंत्री से क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं के निस्तारण की मांग भी की।

मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने कहा कि वन पंचायतों की अवधारणा केवल उत्तराखंड राज्य में है और इसी को ध्यान में रखते हुए महाधिवेशन का आयोजन किया गया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जिला प्रशासन वन पंचायतों को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर सहयोग करता रहेगा।

महाधिवेशन में बड़ी संख्या में सहभागिता

कार्यक्रम में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, डीएफओ अभिमन्यु सिंह, एसडीएम योगेश मेहर, एसडीएम गौरव चटवाल सहित वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, वन पंचायतों के सरपंच, सदस्य और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित थे। इस महाधिवेशन के माध्यम से वन पंचायतों को न केवल सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया, बल्कि वनाग्नि सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के प्रति एक सामूहिक संकल्प भी लिया गया।

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