हरिद्वार में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों के क्षमता विकास एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम में किया प्रतिभाग, बोले- ‘मेरा गांव-मेरी जिम्मेदारी’ की भावना से करें काम
हरिद्वार, 8 अक्टूबर 2026। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को हरिद्वार में त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों के क्षमता विकास के लिए आयोजित एक दिवसीय अभिमुखीकरण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि सशक्त पंचायतें ही विकसित उत्तराखण्ड की मजबूत नींव हैं। ग्राम स्तर पर विकास की योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने और अंतिम व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने में पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के सभी विकासखंडों में एक साथ 60 हजार से अधिक पंचायत प्रतिनिधियों को क्षमता विकास प्रशिक्षण से जोड़ना ग्राम स्तर पर विकास को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से प्रशिक्षण में प्राप्त जानकारी और अनुभव का उपयोग गांवों के विकास के लिए करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि पंचायत प्रतिनिधि लोकतंत्र की महत्वपूर्ण कड़ी होने के साथ-साथ सरकार और जनता के बीच मजबूत सेतु का कार्य करते हैं। स्थानीय स्तर की समस्याओं की वास्तविक जानकारी पंचायत प्रतिनिधियों को होती है। ऐसे में वे सरकारी योजनाओं को जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने और ग्रामीण क्षेत्रों की प्राथमिकताओं को विकास योजनाओं में शामिल कराने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
‘मेरा गांव-मेरी जिम्मेदारी’ की भावना से करें काम
मुख्यमंत्री ने पंचायत प्रतिनिधियों से ‘मेरा गांव-मेरी जिम्मेदारी’ की भावना के साथ कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक सरकार की योजनाओं की जानकारी पहुंचाने के साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि पात्र लाभार्थियों को वास्तव में योजनाओं का लाभ मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पंचायतों को अधिक संसाधन, आधारभूत सुविधाएं और आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराकर उन्हें विकास की नेतृत्वकर्ता संस्थाओं के रूप में मजबूत किया जा रहा है। उत्तराखण्ड सरकार भी पंचायतों को सशक्त और सक्षम बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि 2 अक्टूबर 2026 से शुरू हुए जन योजना अभियान के तहत ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत स्तर पर विकास योजनाएं तैयार की जा रही हैं। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से कहा कि योजनाओं को केवल औपचारिकता तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इनमें स्थानीय जरूरतों, ग्रामीणों के सुझावों और उपलब्ध संसाधनों को प्राथमिकता दी जाए।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक पंचायत को अपनी विकास योजना में स्पष्ट लक्ष्य, समयसीमा और अपेक्षित परिणाम निर्धारित करने चाहिए, ताकि विकास कार्यों की नियमित निगरानी की जा सके और उनका वास्तविक लाभ ग्रामीण जनता तक पहुंच सके।
पेयजल, सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य को मिले प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंचायतों की विकास योजनाओं में पेयजल, सड़क, स्वच्छता, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों को स्पष्ट रूप से शामिल किया जाना चाहिए। ग्राम सभाओं में ग्रामीणों की समस्याओं और सुझावों को गंभीरता से सुना जाए तथा विकास कार्यों की प्रगति की नियमित समीक्षा की जाए।
उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि योजनाओं का लाभ वास्तव में किन परिवारों तक पहुंच रहा है, इसकी जानकारी पंचायत स्तर पर उपलब्ध हो। उन्होंने कमजोर, गरीब और वंचित वर्गों की जरूरतों को विकास योजनाओं में विशेष प्राथमिकता देने पर जोर दिया।
56 हजार से अधिक प्रतिनिधियों को दिया जा चुका प्रशिक्षण
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2025-26 में प्रदेश के 56 हजार से अधिक पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण दिया गया है। राज्य की 7,817 ग्राम पंचायतों में से 5,972 ग्राम पंचायतों में पंचायत भवन ग्राम सचिवालय के रूप में संचालित हो रहे हैं।
उन्होंने बताया कि पिछले पांच वर्षों में 1,362 पंचायत भवनों का निर्माण किया गया है, जबकि 584 पंचायत भवनों की मरम्मत कराई गई है। इसके साथ ही एक हजार से अधिक ग्राम पंचायतों का कम्प्यूटरीकरण भी किया जा चुका है।
डिजिटल पंचायत से पारदर्शिता पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि ई-ग्राम स्वराज पोर्टल के माध्यम से पंचायतों की कार्ययोजनाओं, वित्तीय एवं भौतिक प्रगति तथा विकास कार्यों की जियो टैगिंग की जा रही है। डिजिटल पंचायत की व्यवस्था का उद्देश्य पंचायतों के कामकाज को अधिक पारदर्शी, सरल और प्रभावी बनाना है।
उन्होंने कहा कि पंचायत का पैसा जनता का पैसा है और उसकी एक-एक पाई का हिसाब जनता के सामने होना चाहिए। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से विकास कार्यों की संख्या बढ़ाने की बजाय उनके गुणवत्ता और वास्तविक प्रभाव पर ध्यान देने को कहा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क निर्माण की गुणवत्ता, पेयजल योजनाओं की उपयोगिता और पंचायत भवनों के माध्यम से ग्रामीणों को मिलने वाली सेवाओं की नियमित निगरानी होनी चाहिए। विकास कार्य समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरे किए जाएं।
स्वच्छ और स्वस्थ गांव बनाने में पंचायतों की अहम भूमिका
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वच्छ और स्वस्थ गांवों के निर्माण में पंचायतों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए जिला पंचायतों को ग्रामीण मोटर मार्गों और स्थानीय बाजारों की सफाई के लिए कचरा उठाने वाली मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं। विकासखंड स्तर पर भी सफाई एवं अपशिष्ट प्रबंधन के लिए विशेष मशीनों की व्यवस्था की गई है।
उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से स्वच्छता को केवल सरकारी अभियान न मानकर इसे जनभागीदारी का आंदोलन बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि गांवों में नियमित सफाई, कूड़ा निस्तारण और स्वच्छ वातावरण के लिए ग्रामीणों को भी सक्रिय रूप से जोड़ा जाना चाहिए।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार स्वयं सहायता समूहों, महिला उद्यमिता, कृषि, बागवानी, स्थानीय उत्पादों और पर्यटन को बढ़ावा देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कार्य कर रही है। गांवों में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाना तथा पलायन को कम करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण सहित कई महत्वपूर्ण कदम महिला सशक्तिकरण के लिए उठाए गए हैं। पंचायत प्रतिनिधियों को भी महिलाओं और युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार तथा स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ने की दिशा में प्रयास करने चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों के विकास के साथ-साथ उत्तराखण्ड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान देना होगा। स्थानीय परंपराएं, लोक संस्कृति और पारंपरिक उत्पाद ग्रामीण अर्थव्यवस्था के साथ-साथ राज्य की पहचान को भी मजबूत करते हैं।
गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही को बनाएं प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने पंचायत प्रतिनिधियों से कहा कि प्रत्येक विकास कार्य में गुणवत्ता, समयबद्धता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि पंचायतों को अधिक सक्षम, पारदर्शी और परिणाम आधारित बनाना है।
उन्होंने विश्वास जताया कि पंचायत प्रतिनिधियों के सामूहिक प्रयासों से ग्रामीण विकास को नई गति मिलेगी और विकसित उत्तराखण्ड के संकल्प को साकार करने में गांवों की महत्वपूर्ण भूमिका सुनिश्चित होगी।
पंचायतों के माध्यम से योजनाओं को धरातल तक पहुंचाने पर जोर
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि सरकार की विभिन्न योजनाओं को धरातल पर सफल बनाने में पंचायतों की महत्वपूर्ण भूमिका है। सड़क, बिजली, पंचायत भवन, विद्यालय सहित विकास की तमाम योजनाएं पंचायतों के माध्यम से ग्रामीणों तक पहुंचती हैं।
उन्होंने कहा कि पंचायतों में जनप्रतिनिधित्व और सक्रियता बढ़ने से गांवों में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से सरकारी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने और उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का आह्वान किया।
मदन कौशिक ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सेवा के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर देशभर में सेवा संकल्प अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के माध्यम से गांवों में विकास की नई संभावनाएं सामने आ रही हैं। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से विकास योजनाओं में सक्रिय भागीदारी निभाने और ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की अपील की।
ये रहे मौजूद
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा, जिला पंचायत अध्यक्ष किरण चौधरी, रानीपुर विधायक आदेश चौहान, पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद, राज्य मंत्री देशराज कर्णवाल, आदेश सैनी, ब्लॉक प्रमुख बहादराबाद आशा नेगी, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर, मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र, अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) जितेंद्र कुमार, उप जिलाधिकारी हरिद्वार योगेश मेहरा, जिला पंचायत राज अधिकारी अतुल प्रताप सिंह सहित विभिन्न ग्राम पंचायतों से आए ग्राम प्रधान, पंचायत प्रतिनिधि एवं संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।