महीनों से बंद शहरी स्वास्थ्य सेवाओं को दोबारा शुरू करने की तैयारी, दुर्गम निकायों में स्वास्थ्य सुविधाएं मजबूत करने पर रहेगा जोर
देहरादून। उत्तराखंड में महीनों से बंद पड़े शहरी स्वास्थ्य केंद्रों को दोबारा शुरू करने की तैयारी तेज हो गई है। प्रदेश के 114 अर्बन आरोग्य मंदिरों को अब नए सिरे से संचालित किया जाएगा। खास बात यह है कि इन स्वास्थ्य केंद्रों के संचालन की जिम्मेदारी अब किसी निजी कंपनी या बाहरी संस्था के बजाय नगर निकायों को सौंपी जाएगी।
इसके लिए शासन स्तर पर नई व्यवस्था तैयार की जा रही है और जल्द ही नई एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) और दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। नई व्यवस्था के तहत आरोग्य मंदिरों का बजट और संचालन भी नगर निकायों के स्तर से किया जाएगा।
कंपनी का संचालन बंद होने के बाद बंद पड़े थे आरोग्य मंदिर
प्रदेश में अर्बन आरोग्य मंदिरों का संचालन अभी तक कंपनी के माध्यम से किया जा रहा था। कंपनी का संचालन बंद होने के बाद राज्य के कई आरोग्य मंदिरों की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुईं और बड़ी संख्या में केंद्र बंद हो गए।
इन स्वास्थ्य केंद्रों के संचालन को दोबारा पटरी पर लाने के लिए अलग-अलग विकल्पों पर विचार किया गया। इसी क्रम में ब्रिडकुल (BRIDCUL) के माध्यम से आरोग्य मंदिरों का संचालन कराने की योजना भी बनाई गई थी। इसके लिए एमओयू की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी।
हालांकि अब ब्रिडकुल के प्रस्ताव को रद्द कर दिया गया है। सरकार ने इसके बजाय आरोग्य मंदिरों का संचालन सीधे नगर निकायों के स्तर से कराने का निर्णय लिया है।
अब नगर निकाय संभालेंगे पूरी जिम्मेदारी
नई व्यवस्था के तहत संबंधित नगर निगम, नगर पालिका और अन्य शहरी निकाय अपने क्षेत्र में संचालित होने वाले आरोग्य मंदिरों की व्यवस्था संभालेंगे। आरोग्य मंदिरों के संचालन के लिए आवश्यक बजट भी निकायों के स्तर से खर्च किया जाएगा।
शहरी विकास विभाग और स्वास्थ्य विभाग मिलकर इसके लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करेंगे। इसमें आरोग्य मंदिरों की संख्या, स्थान, बजट, स्टाफ और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े मानकों को निर्धारित किया जाएगा।
शहरी विकास सचिव नितेश झा के अनुसार आरोग्य मंदिरों की प्रक्रिया में बदलाव किया गया है और जल्द ही एसओपी जारी की जाएगी। नई व्यवस्था में निकायों को संचालन की जिम्मेदारी दी जाएगी तथा उनके स्तर से ही आरोग्य मंदिरों का बजट खर्च किया जाएगा।
जहां स्वास्थ्य सुविधाएं कम, वहां खोले जाएंगे आरोग्य मंदिर
नई व्यवस्था में आरोग्य मंदिरों के स्थान चयन पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। सरकार का प्रयास है कि ऐसे क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर आरोग्य मंदिर खोले जाएं, जहां लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए अधिक दूरी तय करनी पड़ती है।
विशेष रूप से पर्वतीय और दुर्गम क्षेत्रों के नगर निकायों में आरोग्य मंदिरों के संचालन पर जोर दिया जाएगा। इससे स्थानीय लोगों को अपने आसपास प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
देहरादून, हरिद्वार और नैनीताल में 40 केंद्र
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) की योजना के तहत देहरादून, हरिद्वार और नैनीताल जिलों में 40 आरोग्य मंदिर खोले जाने हैं। इन जिलों के शहरी क्षेत्रों में पहले से बड़ी संख्या में आरोग्य मंदिर संचालित होते रहे हैं।
नई व्यवस्था में इन तीन जिलों में आरोग्य मंदिरों की संख्या को जरूरत के अनुसार तय किया जाएगा। जहां शहरी क्षेत्र में पहले से पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हैं, वहां केंद्रों की संख्या कम की जा सकती है। इसके बजाय पर्वतीय क्षेत्रों के ऐसे निकायों में नए आरोग्य मंदिर खोले जाएंगे, जहां स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी है।
स्वास्थ्य और शहरी विकास विभाग मिलकर बनाएंगे खाका
आरोग्य मंदिरों को लेकर नई व्यवस्था का पूरा खाका स्वास्थ्य विभाग और शहरी विकास विभाग मिलकर तैयार करेंगे। इसके तहत निकायवार जरूरत का आकलन किया जाएगा।
यह भी देखा जाएगा कि किस नगर निकाय में कितने आरोग्य मंदिरों की जरूरत है, वहां कितनी आबादी को इसका लाभ मिलेगा और मौजूदा स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति क्या है। इसी आधार पर केंद्रों का चयन किया जाएगा।
सरकार का उद्देश्य केवल बंद पड़े आरोग्य मंदिरों को दोबारा खोलना ही नहीं है, बल्कि उन्हें जरूरत वाले क्षेत्रों तक पहुंचाना भी है, ताकि शहरी और पर्वतीय क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बेहतर हो सके।
नई एसओपी का इंतजार
आरोग्य मंदिरों के संचालन को लेकर नई व्यवस्था लागू करने से पहले शासन की ओर से विस्तृत एसओपी जारी की जाएगी। इसमें संचालन की जिम्मेदारी, बजट खर्च, केंद्रों के चयन और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए जाएंगे।
नई एसओपी जारी होने के बाद नगर निकायों को आरोग्य मंदिरों के संचालन की जिम्मेदारी सौंपने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इससे लंबे समय से बंद पड़े इन स्वास्थ्य केंद्रों को दोबारा शुरू करने का रास्ता साफ होगा।
सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना और विशेषकर उन क्षेत्रों के लोगों को प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है, जहां वर्तमान में स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या कम है।