मुख्यमंत्री ने रामपुर तिराहा में सात शहीदों के प्रतिमा स्थल का किया शिलान्यास, ₹27 लाख की धनराशि स्वीकृत; राज्य अतिथि गृह के उच्चीकरण और स्मारक की ई-लाइब्रेरी व संग्रहालय विस्तार की भी घोषणा
मुजफ्फरनगर/देहरादून। उत्तराखंड राज्य आंदोलन के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले रामपुर तिराहा शहीद स्थल पर शुक्रवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य आंदोलन के अमर बलिदानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। रामपुर तिराहा कांड की 32वीं बरसी के अवसर पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में मुख्यमंत्री ने शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर आंदोलनकारियों के बलिदान को याद किया।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने रामपुर तिराहा कांड में शहीद हुए सात आंदोलनकारियों के प्रतिमा स्थल का शिलान्यास किया और इसके लिए ₹27 लाख की धनराशि स्वीकृत किए जाने की जानकारी दी। उन्होंने यह भी घोषणा की कि राज्य आंदोलन में शहीद हुए जिन आंदोलनकारियों की प्रतिमाएं अब तक स्थापित नहीं हो सकी हैं, उनकी प्रतिमाएं उनके पैतृक गांव अथवा निवास क्षेत्र में उपयुक्त स्थान पर स्थापित की जाएंगी।
शहीदों की स्मृतियों को भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य आंदोलन के बलिदानियों की स्मृतियों को केवल स्मारकों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की जरूरत है। इसी उद्देश्य से रामपुर तिराहा स्थित शहीद स्मारक परिसर को और विकसित करने की घोषणा की गई है।
उन्होंने रामपुर तिराहा स्थित राज्य अतिथि गृह के उच्चीकरण, स्मारक परिसर में मौजूद पुस्तकालय को ई-लाइब्रेरी के रूप में विकसित करने और संग्रहालय के विस्तार की घोषणा की। प्रस्तावित संग्रहालय में उत्तराखंड की पारंपरिक संस्कृति को दर्शाने वाली सामग्री, पारंपरिक वाद्य यंत्र, वेशभूषा और लोक संस्कृति से जुड़ी वस्तुओं को शामिल किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने राज्य आंदोलनकारियों के पुनः चिन्हीकरण की प्रक्रिया भी जल्द पूरी करने की बात कही।
सात शहीदों के प्रतिमा स्थल का शिलान्यास
रामपुर तिराहा कांड में शहीद हुए सात आंदोलनकारियों के प्रतिमा स्थल का मुख्यमंत्री ने शिलान्यास किया। हालिया रिपोर्ट के अनुसार इनमें राजेश नेगी, गिरीश भद्री, सत्येंद्र सिंह चौहान, रविंद्र रावत चौहान, अशोक कुमार, राजेश लखेरा और सूर्य प्रकाश थपलियाल शामिल हैं। प्रतिमा स्थल के निर्माण के लिए ₹27 लाख की स्वीकृति दी गई है।
मुख्यमंत्री ने शहीद स्मारक के लिए भूमि दान करने वाले स्वर्गीय पंडित महावीर शर्मा के योगदान को भी याद किया और उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया। स्मारक परिसर में उनकी प्रतिमा स्थापित किए जाने का भी उल्लेख किया गया।
1 और 2 अक्टूबर 1994 की घटना को बताया आंदोलन का पीड़ादायक अध्याय
मुख्यमंत्री ने कहा कि 1 और 2 अक्टूबर 1994 की रात रामपुर तिराहा में दिल्ली जा रहे राज्य आंदोलनकारियों के साथ हुई घटना उत्तराखंड राज्य आंदोलन के इतिहास का बेहद पीड़ादायक अध्याय है।
उन्होंने कहा कि पृथक उत्तराखंड राज्य की मांग को लेकर आंदोलनकारियों ने लंबे समय तक संघर्ष किया। खटीमा, मसूरी, रामपुर तिराहा और श्रीनगर के श्री यंत्र टापू सहित विभिन्न स्थानों पर आंदोलनकारियों ने बलिदान दिया। उनके संघर्ष और बलिदान के बाद ही उत्तराखंड अलग राज्य के रूप में अस्तित्व में आया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य आंदोलन के बलिदानियों के सपनों के अनुरूप उत्तराखंड के निर्माण की दिशा में सरकार लगातार काम कर रही है।
जिन शहीदों की प्रतिमाएं नहीं लगीं, गांवों में होंगी स्थापित
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि राज्य आंदोलन में शहीद हुए ऐसे आंदोलनकारी जिनकी प्रतिमाएं अभी तक स्थापित नहीं हुई हैं, उनकी प्रतिमाएं उनके पैतृक गांव या निवास क्षेत्र में उपयुक्त स्थान पर स्थापित की जाएंगी।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार देश की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले उत्तराखंड के वीर सैनिकों की स्मृतियों को चिरस्थायी बनाने के लिए उनके पैतृक गांवों में प्रतिमाएं स्थापित करने की दिशा में पहले ही निर्णय ले चुकी है। इसी भावना के साथ राज्य आंदोलन के अमर बलिदानियों की स्मृतियों को भी संरक्षित किया जाएगा।
राज्य आंदोलनकारियों के हित में उठाए गए कदमों का किया उल्लेख
मुख्यमंत्री ने राज्य आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों के लिए सरकार की ओर से किए गए कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों को सरकारी सेवाओं में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इस आरक्षण से लाभान्वित आश्रितों को नियुक्ति पत्र भी दिए गए हैं। आश्रित प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को सरल करते हुए इन्हें तहसील स्तर पर जारी करने के आदेश दिए गए हैं।
राज्य आंदोलनकारियों की समस्याओं के समाधान के लिए उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद के गठन की जानकारी भी मुख्यमंत्री ने दी।
शहीदों के नाम पर सड़कों और विद्यालयों के नाम रखने की प्रक्रिया
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में सड़कों और विद्यालयों के नाम शहीद राज्य आंदोलनकारियों के नाम पर रखे जाने के संबंध में आदेश जारी किए जा चुके हैं।
इसके साथ ही रामपुर तिराहा, खटीमा, देहरादून और मसूरी स्थित शहीद स्थलों के पुनर्निर्माण और विस्तार की प्रक्रिया शुरू किए जाने की बात भी उन्होंने कही।
राज्य पर्वों तथा जिला और प्रदेश स्तर के कार्यक्रमों में राज्य आंदोलनकारियों को आमंत्रित कर सम्मानित करने और परिवहन निगम की बसों में उन्हें निःशुल्क यात्रा की सुविधा दिए जाने का भी मुख्यमंत्री ने उल्लेख किया।
आंदोलन में मातृशक्ति की भूमिका को किया याद
मुख्यमंत्री धामी ने उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन में महिलाओं की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि माताओं और बहनों ने अनेक कठिनाइयों का सामना करते हुए पृथक राज्य आंदोलन को निर्णायक मुकाम तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों ने ऐसे उत्तराखंड की कल्पना की थी, जहां नागरिकों के अधिकारों का सम्मान हो, युवाओं को आगे बढ़ने के अवसर मिलें और राज्य की संस्कृति एवं परंपराएं सुरक्षित रहें।
स्थानीय लोगों के सहयोग को भी किया याद
मुख्यमंत्री ने रामपुर तिराहा कांड के दौरान आंदोलनकारियों की मदद करने वाले स्थानीय लोगों के योगदान को भी याद किया। उन्होंने कहा कि उस कठिन दौर में स्थानीय लोगों ने आंदोलनकारियों को सहयोग और शरण दी थी। उत्तराखंड की जनता उनके इस योगदान को हमेशा याद रखेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शहीदों और राज्य आंदोलनकारियों का संघर्ष आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा। उनके अनुसार, बलिदानियों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि उनके सपनों और भावनाओं के अनुरूप उत्तराखंड को आगे बढ़ाया जाए।
श्रद्धांजलि सभा में कई प्रमुख लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार कपिल देव अग्रवाल, विधान परिषद सदस्य वंदना वर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष किरण चौधरी, मुजफ्फरनगर भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. सुधीर सैनी, उत्तराखंड संस्कृति, साहित्य एवं कला परिषद की उपाध्यक्ष मधु भट्ट, उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद के उपाध्यक्ष सुभाष बड़थ्वाल, संस्कृति सचिव युगल किशोर पंत, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर सहित बड़ी संख्या में राज्य आंदोलनकारी, जनप्रतिनिधि और स्थानीय लोग मौजूद रहे।
रामपुर तिराहा में सात शहीदों के प्रतिमा स्थल के शिलान्यास और ₹27 लाख की स्वीकृति को इस कार्यक्रम की प्रमुख घोषणाओं में शामिल किया गया।